उत्तर प्रदेश भौगोलिक स्वरूप स्थिति एवं विस्तार (Uttar Pradesh GK)

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स्थिति एवं विस्तार : 

उत्तर प्रदेश भारत के सीमांत प्रदेशों में से एक है इस की उत्तरी सीमा उत्तराखंड राज्य से लगी हुई है दक्षिण में मध्य प्रदेश और पूर्वी सीमा बिहार से लगी हुई है पश्चिम सीमा पर हिमाचल प्रदेश हरियाणा दिल्ली और राजस्थान स्थित है

 

इस राज्य के स्पष्ट दो प्राकृतिक भाग

(1) वितरित मैदानी भाग
(2) दक्षिणी पठारी भाग

 

 

विस्तृत मैदानी भाग :-  विस्तृत मैदानी भाग का निर्माण प्रमुख गंगा और उसकी सहायक नदियां यमुना गडंस्क रामगंगा आदि द्वारा पावर पर्वतीय क्षेत्रों से लाए गए और शादी जवानों से हुआ है यमुना और गणतंत्र नदियां इस विशाल मैदानी भाग की क्रम शहर पश्चिमी और पूर्वी सीमा निर्धारित करती है यह मैदान उत्तर में शिवालिक की पहाड़ियों और दक्षिण में पठारी भाग के मध्य में स्थित है इस भाग को धरातल इस रचना तापमान वर्षा और प्राकृतिक वनस्पति की दृष्टि से निम्न भागों में बांटा जाता है

 

(1) गंगा का ऊपरी मैदानी भाग
(2) गंगा का मध्य मैदानी भाग
(3) गंगा का पूर्वी मैदानी भाग

 

 

गंगा का ऊपर मैदानी भाग :- गंगा का यह भाग शिवालिक की पहाड़ियों के दक्षिणी भाग में स्थित है उत्तर में शिवालिक पड़े दक्षिण में बुंदेलखंड का पठार और दक्षिण पश्चिम से मालवा का पठार इसकी सीमा रेखा निर्धारित करते हैं गंगा का ऊपरी मैदानी भाग में 500 किमी लंबी 80 टीवी चौड़ी मैदानी पट्टी के रूप में फैला हुआ है एक भाग में बाबर और तराई का मैदानी क्षेत्र स्थित है धरातल की दृष्टि से भाबर क्षेत्र पर्वतीय भू-भाग में है जो कि उत्तरी बिजनौर पीलीभीत शाहजहांपुर तथा खीरी आदि जिलों में फैला हुआ है जबकि तराई क्षेत्र का विस्तार बहराइच गोंडा बस्ती गोरखपुर आदि जिलों में है|

 

 

गंगा का मध्य मैदानी भाग :- गंगा के इस भाग में विशाल समतल मैदानी क्षेत्र आता है जिनकी सामान्यता ऊंचाई 135 से 225 मीटर तक है इस मैदानी भाग में बहने वाली नदियां द्वारा यहां पर अत्यधिक मात्रा में का मिट्टी लाकर बिछाई गई है जो कि कृषि के लिए बहुत उपयोगी है इस मध्य मैदानी क्षेत्र काढाल उत्तर पश्चिम से दक्षिण पूर्वी की ओर यह है यहां पर स्थित प्राचीन काम मिट्टी वाले चित्र में यहां नदियाे नहीं पहुंच पाता है बांगर क्षेत्रों का निर्माण हुआ है जबकि बाढ़ के समय जलमग्न होने वाले भागों में खादर क्षेत्रों का निर्माण हुआ है यह चित्र प्रमुखता गंगा यमुना और गंगा राम गंगा दोआब में पाए जाते हैं|

 

 

गंगा नदी का पूर्वी मैदानी भाग:- इस भाग में बनारस गाजीपुर जौनपुर आजमगढ़ बलिया मिर्जापुर आदि जिले आते हैं वो सरचना दृष्टि से इस भाग में खादर क्षेत्रों का अधिक विस्तार हुआ है इस मैदानी क्षेत्र की समुद्र तल से ऊंचाई लगभग 80 से 100 मीटर तक है जहां पर गंगा और उसकी सहायक नदियां द्वारा बहा कर लाई गई कांप मिट्टी पाई जाती है यहां पर अनेक स्थानों पर जिलेबी हैं जो कि वर्षा ऋतु में पश्चात सूख जाती हैं इस प्रकार की झीलों को उस क्षेत्र में चौर तथा शाबर के नाम से पुकारा जाता है|

 

 

दक्षिणी पठारी भाग :- दक्षिणी पठारी भाग में प्रमुख रूप से बुंदेलखंड और बघेलखंड के भूभाग आते हैं

 

बुंदेलखंड:- इस भूभाग का दक्षिणी क्षेत्र प्राचीन पहाड़ियों और निसंतान ओ द्वारा निर्मित है यह चट्टाने इस क्षेत्र में अनेक स्थानों पर तिलों के रूप में मिलती है तथा इसकी सामान्य ऊंचाई 450 मीटर है यहां पर लाल रंग की मिट्टी मिलती है|

 

बघेलखंड :- क्षेत्र के अंतर्गत मिर्जापुर जिले का अधिकांश भाग आता है इस भूभाग की औसत ऊंचाई लगभग 450 मीटर है यहां पर अनेक क्षेत्रों में शंकु आकार पीले पाए जाते हैं बघेलखंड का पठारी भाग अनेक स्थानों पर अत्यंत कटा फटा है तथा यहां बहने वाली नदियों ने संक्री घाटियों का निर्माण किया है इस क्षेत्र की प्रमुख नदी सोन है इस क्षेत्र की जलवायु भी बुंदेलखंड के समान ही है तथा यहां पर वनों की अधिकता के कारण लकड़ी काटने का कार्य किया जाता है|

 

 

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