अध्याय 4 औद्योगिकरण का युग / Era of industrialization

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औद्योगिक क्रांति से पहले हाथ का श्रम और वाष्पशक्ति उपनिवेशों में औद्योगिकरण फैक्ट्रियों का आना औद्योगिक विकास वस्तुओं के लिए बाजार

 

★ औद्योगीकरण का युग :-
प्रारंभिक फैक्ट्रियों के शुरु होने के समय से ही लोग औद्योगीकरण की शुरुआत मानते हैं। लेकिन औद्योगीकरण की शुरुआत से ठीक पहले भी इंग्लैंड में अंतर्राष्ट्रीय बाजार के लिये बड़े पैमाने पर उत्पादन होता था। बड़े पैमाने पर उत्पादन के उस काल को आदि-औद्योगीकरण का काल कहते हैं

 

 

★ औद्योगिक क्रांति :- औद्योगिकरण को अकसर हम कारखानों के विकास के साथ ही जोड़कर देखते हैं।

 

◆ कारखानों की शुरुआत

इंगलैंड में कारखाने सबसे पहले 1730 के दशक में बनने शुरु हुए, और अठारहवीं सदी के अंत तक पूरे इंगलैड में जगह जगह कारखाने दिखने लगे। उत्पादन का स्तर किस कदर बढ़ा इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि कपास का आयात 1760 में 25 पाउंड से बढ़कर 1787 में 229 लाख पाउंड हो गया।

 

★ औद्योगिक परिवर्तन की गति

● 1840 के दशक तक सूती उद्योग और कपास उद्योग में तेजी से वृद्धि हुई। उसके बाद 1840 से लेकर 1860 के दशक तक लोहा और स्टील उद्योग में तेजी आई।

● यह वह दौर था जब उपनिवेशों में रेल का प्रसार हो रहा था। इसलिए 1873 आते आते इंगलैंड से लौह-इस्पात का निर्यात 770 लाख पाउंड हो गया। यह सूत और कपास के निर्यात का दोगुना था।

● लेकिन औद्योगीकरण से रोजगार के अवसरों में कोई खास परिवर्तन नहीं हुआ। उन्नीसवीं सदी के अंत तक भी संगठित उद्योगों में केवल 20% कामगार ही काम कर रहे थे। अभी भी अधिकतर श्रमिक घरेलू इकाइयों में कार्यरत थे।

● पारंपरिक उद्योगों में भी कई परिवर्तन हुए। ये परिवर्तन साधारण से दिखने वाली नई खोजों के कारण संभव हुए। उदाहरण: खाद्य संसाधन, भवन निर्माण, बर्तन निर्माण, काँच, चमड़ा उद्योग, फर्नीचर, आदि।

● नई तकनीक को पैर जमाने में हमेशा ही लंबा वक्त लगता है। शुरु में मशीनें उतनी कार्यकुशल नहीं थीं जितना कि उनके आविष्कारक दावा करते थे।

● मशीनों की मरम्मत करना भी महंगा साबित होता था। इसलिए कोई भी उद्योगपति नई मशीनों में निवेश करने से कतराता था।
श्रमिकों की कोई कमी नहीं थी, इसलिए मजदूरी दर भी कम थी।

● इसलिए व्यवसायी और उद्योगपति श्रमिकों से काम लेना ही बेहतर समझते थे। इसलिए उन्नीसवीं सदी के मध्य का एक आम श्रमिक मशीन चलाने वाला न होकर एक पारंपरिक कारीगर होता था।

● हाथ से बनी चीजों को परिष्कृत माना जाता था इसलिए उनकी मांग अधिक होती थी।
लेकिन उन्नीसवीं सदी के अमेरिका में स्थिति कुछ अलग थी। वहाँ पर श्रमिकों की कमी होने के कारण मशीनीकरण ही एकमात्र रास्ता बचा था।

 

 

◆ श्रमिकों का जीवन

● काम की तलाश में गांव के लोग भारी संख्या में शहरों की ओर पलायन कर रहे थे। यदि किसी का कोई दोस्त या रिश्तेदार पहले से शहर में रहता था तो उसे काम मिलने में आसानी होती थी। कई लोगों को महीनों तक नौकरी मिलने का इंतजार करना पड़ता था। पैसे की कमी के कारण इन लोगों को पुलों या रैन बसेरों में रात बितानी पड़ती थी। कुछ निजी स्वामियों ने भी रैन बसेरे बनवाए थे। गरीबों के लिए पूअर लॉ अथीरिटी बनी थी जो बेघर लोगों के लिए कैजुअल वार्ड की व्यवस्था करती थी।

 

◆ पूर्व औद्योगिकरण :-

यूरोप में सबसे पहले कारखाने लगने से पहले कारखाने लगने से पहले के समय को पूर्व औद्योगिक काल कहा जाता है। इसी समय में गांव में सामान को बनाया जाता है जिसे शहर के व्यापारी खरीदते थे।

 

 

◆ कारखानों कि शुरूआत

● सबसे पहले इंग्लैंड में कारखाना 1730 के दशक में बनना शुरू हुआ।

● 18वीं सदी के आखिर तक पूरे इंग्लैंड में जगह-जगह पर कारखाने दिखने लगे थे।

● इसी समय का पहला प्रत्येक कपास था। 1760 में ब्रिटेन में 2.5 मिलियन पाउंड का कपास आयात होता था।

● मजदूरों की कार्यकुशलता बढ़ गई। मशीनों की सहायता से प्रत्येक मजदूर अधिक मात्रा में और बेहतर उत्पाद बनाने लगा

● औद्योगिकरण की शुरुआत मुख्य रूप से सूती वस्त्र उद्योग से हुए

 

 

◆ औद्योगिकरण की रफ्तार

● औद्योगिकरण का मतलब सिर्फ कारखानों का लगना नहीं था। इस काल में सूती वस्त्र कपास, उद्योग एवं लोहा तथा स्टील में भी काफी तेजी से बदलाव हुए

● औद्योगिकरण के पहले दौर में सूती कपड़ा सबसे पहले क्षेत्रक में हुआ था।

● रेलवे के प्रसार के बाद लोहा इस्पात उद्योग में भी तेजी से वृद्धि हुआ।

● 1873 आते-आते ब्रिटेन से लोहा और इस्पात के निर्यात की कीमत 78 मिलीयन पाउंड हो गई थी।

 

 

◆ हाथ कि श्रम और वाष्प शक्ति :-

● उस समय में मजदूरों की कोई कमी नहीं थी। इसलिए मजदूरों की किल्लत में कोई परेशानी नहीं था, इसलिए वहां की मशीनों में पूंजी लगाने की अपेक्षा श्रमिकों से काम लेना ही बेहतर माना जाता था।

● मशीन से बनी वस्तु एक जैसी होती थी। वह हाथ से बनी वस्तु की गुणवत्ता और सुंदरता का मुकाबला नहीं कर सकती थी और अमीर लोग हाथ से बनी वस्तु का इस्तेमाल ज्यादा करना पसंद करते थे,

● लेकिन 19वीं सदी में अमेरिका का अलग ही हाल था। वहां पर मजदूरों की कमी के कारण मशीनीकरण ही एकमात्र रास्ता बचा था।

 

 

◆ 19वीं शताब्दी में यूरोप उद्योगपति हाथ के श्रम को अधिक पसंद क्यों करते थे?

● ब्रिटेन में उद्योगपतियों को मानव श्रम की कमी नहीं थी।

● वह मशीन इसलिए नहीं लगाना चाहते थे क्योंकि मशीन में अधिक पूंजी लगाना पड़ता था।

● कुछ मौसमी उद्योगों के लिए उद्योगों में श्रमिकों द्वारा हाथ से काम करवाना अच्छा समझते थे।

● बाजार में अक्सर बारीक डिजाइन और खास अकारो वाली चीजों की मांग रखी थी जो कि हस्त कौशल पर निर्भर थी।

 

 

◆ भारतीय कपड़ो का युग

● मशीन उद्योग से पहले का योग अंतर्राष्ट्रीय बाजार में।

● भारतीय रेशमा और सूती वस्त्र का दबदबा था।

● उच्च किस्म का कपड़ा भारत से निर्णय और फारसी सौदागर पंजाब से अफगानिस्तान तक लेकर जाते थे।

● सूरत, हुगली और वसूली प्रमुख बंदरगाह थे और इसी नेटवर्क से विभिन्न प्रकार के व्यापारी व्यापार करते थे।

◆ दो प्रकार के व्यापारी थे। आपूर्ति सौदागर और निर्यात सौदागर

 

 

◆ मशीन उद्योग के बाद का युग

● 1750 के दशक तक भारतीय सौदागरों के नियंत्रण वाला नेटवर्क टूटने लगा।

● और यूरोपीय कंपनियों की ताकत बढ़ने लगी। सूरत और हुगली जैसे बंदर ग्रह कमजोर पड़ गए।

● मुंबई तथा कोलकाता एक नए बंदरगाह के रूप में जो के व्यापार को यूरोपीय कंपनियों के द्वारा नियंत्रित किया जाता था। जो कि यूरोपीय जहाजों के द्वारा होता था।

● शुरुआती में भारत के पास कपड़ा व्यापार में कोई कमी नहीं था, लेकिन 18वीं सदी तक यूरोप में भी भारतीय कपड़ों की मांग भारी मात्रा में बड़ी।

 

 

 ◆ ईस्ट इंडिया कंपनी के आने के बाद बुनकरों की स्थिति

1.)भारतीय व्यापार पर ईस्ट इंडिया कंपनी का अधिकार हो गया।

2.)कपड़ा के व्यापार में सक्रिय व्यापारियों और दलालों को खत्म करके बुनकरों पर प्रत्यक्ष नियंत्रण

3.)बुनकरों को अन्य खरीदारों के साथ कारोबार करने पर पाबंदी लगा दी।

4.)बुनकरों और गुमास्ता के बीच अक्सर टकराव होते रहता था।

5.)बुनकरों को कंपनी से मिलने वाली कीमत बहुत ही कम होती है।

 

◆ औद्योगिक क्रांति का अर्थ :-

औद्योगिक क्रांति हम उस क्रांति को कहते हैं जिसमें 18वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में उत्पादन की तकनीक और संगठन में अनेक क्रांतिकारी परिवर्तन ला दिए। यह परिवर्तन इतनी तेज रफ्तार से आए हैं और इतने प्रभावशाली सिद्ध हुए कि उन्हें क्रांति का नाम दे दिया गया इस क्रांति में घरेलू उद्योग धंधे के स्थान पर फैक्ट्री सीस्टम को जन्म दिया, कार्य हाथों के स्थान पर मशीनों से होने लगा और छोटे कारीगरों संस्थान पूंजीपति श्रेणी ने ले लिया।

 

◆ महत्वपूर्ण घटनाक्रम

● 1600 – ईस्ट इंडिया कंपनी का भारत आगमन।

● 1730 – इंग्लैंड में फैक्ट्रियों की शुरुआत।

● 1764 – सिपनिंग जेनी का अविष्कार।

● 1781 – जेम्स वाट द्वारा स्टीम इंजन का अविष्कार एवं पेटेंट।

● 1785 – कार्ट राइट ने बिजली से चलने वाले करघों का आविष्कार किया।

● 1840 – औद्योगिकरण के पिछले चरण में ब्रिटेन अग्रणी उत्पादक बना।


[1:15 am, 13/03/2023] Deepsk Master’s: ● 1850 – लंदन में रेलवे स्टेशनों का विकास ।

● 1854 – मुंबई में पहली कपास मिल ( कपड़ा मिल ) की स्थापना।

● 1855 – बंगाल में पहली जुट मिल का खुलना।

● 1861 – अहमदाबाद में पहली कपड़ा मिल की स्थापना।

● 1863 लंदन में भूमिगत रेलवे की शुरुआत।

● 1873 – ब्रिटेन में लौहा इस्पात का निर्यात प्रारंभ।

● 1874 – मद्रास में पहली करघा मशीन द्वारा उत्पादन प्रारंभ।

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