मध्य प्रदेश का भौतिक विभाजन | Physical division of Madhya Pradesh

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☆ मध्य प्रदेश का भौतिक विभाजन

धरातलीय विशेषताओं के आधार पर प्रदेश को मुख्यतः तीन भागों में बाँटा गया है।

1. मध्य उच्च प्रदेश
राज्य में सर्वाधिक विस्तृत मध्य उच्च प्रदेश है। यह प्रदेश विभिन्न पठारों की संयुक्त संरचना है।
इसके मुख्यतः पाँच भाग हैं

(i) मालवा का पठार

• मध्य प्रदेश के मध्य पश्चिमी भाग को मालवा पठार के नाम से जाना जाता है।

• मालवा का पठार नर्मदा नदी के उत्तर में स्थित है। यह पठार दक्कन ट्रैप का ही भाग है। यह लावा निर्मित पठार है। मालवा पठार नर्मदा व चम्बल के मध्य में पड़ता है।

• मालवा के पठार का क्षेत्रफल मध्य प्रदेश के कुल क्षेत्रफल का 28% है।

• इसकी भौगोलिक स्थिति 20°10′ से 25’8′ उत्तरी अक्षांश तथा 74°59′ से 7920′ पूर्वी देशान्तर के मध्य है।

• कर्क रेखा इसे दो भागों में विभाजित करती है।

• मालवा का पठार काली मिट्टी के लिए प्रसिद्ध है, जो कपास के उत्पादन के लिए सर्वाधिक उपयुक्त होती है।

• इस पठारी क्षेत्र में उज्जैन, साँची, भीमबेटका, विदिशा और उदयगिरि की गुफाएँ पाई जाती हैं।

• मालवा के पठार की सबसे ऊंची चोटी सिंगार (881मी) है।

• इस पठार का विस्तार गुना, राजगढ़, भोपाल, रायसेन, सागर, विदिशा, शाजापुर, देवास, इन्दौर, सीहोर, उज्जैन, रतलाम, मन्दौर, झाबुआ तथा घाट जिले में है। राज्य का वृहद भू-भाग मालवा पठार के अन्तर्गत आता है।

 

 

(ii) मध्य भारत का पठार

• मध्य भारत का पठार मालवा पठार के पूर्वोत्तर में स्थित है।

• इसका कुल क्षेत्रफल 32,896 वर्ग किमी है, जो मध्य प्रदेश के क्षेत्रफल का 10.68% है।

• शिवपुरी, मुरैना, भिण्ड, ग्वालियर, मन्दसौर और नीमच आदि क्षेत्र इस पठार के अन्तर्गत आते हैं।

• इस क्षेत्र की प्रमुख नदियाँ चम्बल, पावर्ती, कालीसिन्ध है।

• जलोढ़ एवं काली मिट्टी पाए जाने के कारण यहाँ गेहूं, ज्वार, बाजरा की फसल उगाई जाती है।

• शीशम, सागौन, नीम, पीपल तथा खैर आदि यहाँ के वनों में पाए जाने वाले प्रमुख वृक्ष हैं।

• इस पठारी क्षेत्र में सहरिया जनजाति रहती है।

 

 

(iii) बुन्देलखण्ड का पठार

• इस पठार का विस्तार छतरपुर, पन्ना, टीकमगढ़, दतिया, शिवपुरी और गुना आदि जिलों में पाया जाता है।

• इस पठार का विस्तार प्रदेश के कुल क्षेत्र के 7.70% पर है।

• बुन्देलखण्ड का पठार ग्रेनाइट व नीस चट्टानों से बना है। इस क्षेत्र की चट्टानों में फॉस्फेट की प्रमुखता पाई जाती है।

• इस क्षेत्र में लाल और काली मिट्टी का सम्मिश्रण पाया जाता है।

• इस पठार से बेतवा, केन, धसान व सिन्ध नदियाँ प्रवाहित होती हैं।

• यहाँ समतलप्राय मैदान (Peneplain) व टोर आकृतियाँ पाई जाती हैं।

• बुन्देलखण्ड पठार की सबसे ऊँची चोटी सिद्ध बाबा (1172 मी) है।

 

 

(iv) विन्ध्यन कगारी प्रदेश (रीवा-पन्ना का पठार)

• विन्ध्यन कगारी प्रदेश मालवा पठार के उत्तर-पूर्व में फैला हुआ है तथा कर्क रेखा के उत्तर में स्थित है।

• यह एक त्रिकोण आकार का पठारी क्षेत्र है।

• इसकी भौगोलिक स्थिति 2310 से 25°12 उत्तरी अक्षांश और 78°4′ से 8218′ पूर्वी देशान्तर के मध्य विस्तृत है।

• इसके अन्तर्गत सतना, रीवा, पन्ना, दमोह आदि क्षेत्र आते हैं। इसी प्रदेश की कगार भूमि में ‘जबेरा का गुम्बद’ पाया जाता है।

• इस पठार के सहारे टोंस और सहायक नदियाँ चचाई, केवटी, बहुती, विण्डम आदि जल प्रपात बनाती हैं।

• यमुना और सोन नदियों के जलद्विभाजक का कार्य कैमूर श्रेणी करती है।

• केन, सोनार, बेथरमा, टोंस इस प्रदेश बहने वाली प्रमुख नदियाँ हैं।

• केन नदी इस क्षेत्र में गहरी कन्दराएँ बनाती है।

• यह क्षेत्र चूना पत्थर और हीरा के लिए प्रसिद्ध है।

• गेहूँ इस क्षेत्र की प्रमुख फसल है। इस क्षेत्र में पूर्व की ओर चावल की खेती भी होती है।

 

 

(v) नर्मदा सोन घाटी

• यह घाटी प्रदेश का सबसे निम्न भौगोलिक क्षेत्र है, जिसकी औसत ऊँचाई 300 मीटर है। यह घाटी एक भ्रंश घाटी है।

• जबलपुर, नरसिंहपुर, होशंगाबाद, रायसेन, खण्डवा आदि जिलों में इस घाटी का विस्तार पाया जाता है।

• यहाँ से दक्कन ट्रैप की चट्टानें मिलती हैं।

• इस घाटी क्षेत्र में नर्मदा नदी ने विन्ध्यन शैल समूह को काटकर मन्धाता कन्दरा का निर्माण किया है।

• बड़वाह में नर्मदा नदी पर मन्धार और दर्दी दो जल प्रपात हैं।

• नर्मदा नदी अखरानी की पहाड़ियों में मुकरता नामक गॉर्ज का निर्माण करती है।

• इस क्षेत्र में चूने का पत्थर, संगमरमर, कोयला, टंगस्टन आदि पाए जाते हैं।

• यह प्रदेश का सर्वाधिक जायद फसल वाला क्षेत्र है। प्रसिद्ध प्रागैतिहासिक स्थल .नवदाटोली इसी क्षेत्र में स्थित है।

 

 

2. सतपुड़ा-मैकाल की श्रेणियाँ

सतपुड़ा की श्रेणियाँ मध्य प्रदेश के सबसे ऊंचे क्षेत्र हैं। ये श्रेणियाँ नर्मदा तथा ताप्ती नदियों के मध्य स्थित हैं।
सतपुड़ा- हा-मैकाल श्रेणी को मुख्यतः तीन भागों में बाँटा जाता है

• प्रथम भाग पश्चिमी भाग है, जिसे सतपुड़ा अथवा राजपीपला की पहाड़ियाँ कहा जाता है।

• पश्चिमी सतपुड़ा श्रेणी टेड़ी-मेढ़ी, सँकरी, प्रतापी ढलान वाली श्रेणी है, जो गुजरात तथा मध्य प्रदेश की पश्चिमी सीमा से बुरहानपुर दरें तक आती है। बुरहानपुर दर्रे के पूर्व में सतपुड़ा की श्रेणी पर्याप्त रूप से चौड़ी हो जाती है, जिसे पूर्वी सतपुड़ा की श्रेणी कहा जाता है।

• इसका दूसरा भाग मध्य श्रेणी है, जो राजपीपला के पूर्व में एक चौड़ी श्रेणी है। इस श्रेणी के मुख्य भाग ग्वालीगढ़ श्रेणी, महादेव श्रेणी आदि हैं। महादेव श्रेणी में राज्य की सर्वोच्च चोटी धूपगढ़ (1350 मी) स्थित है।

• इस श्रेणी का तीसरा भाग मैकाल श्रेणी है। मैकाल श्रेणी की पूर्वी सीमा अर्द्धचन्द्रकार है, जो उत्तर से दक्षिण की ओर फैली है।

 

 

3. पूर्वी या बघेलखण्ड का पठार

• मध्य प्रदेश के पूर्व में फैला हुआ पहाड़ी क्षेत्र बघेलखण्ड पठार के नाम से जाना जाता है।

• यह प्रदेश का सबसे बड़ा पठार है। इस पठार का क्षेत्रफल लगभग 25,000 वर्ग किमी है।

• बघेलखण्ड का पठार प्राचीन गोण्डवाना शैल समूह से निर्मित भू-खण्ड है।

• इसका प्रसार शहडोल, सीधी, सिंगरौली, उमरिया तथा डिण्डोरी आदि जिलों में है।

• सोन, नर्मदा एवं जोहिला नदियाँ यहाँ प्रवाहित होने वाली प्रमुख नदियाँ हैं।

• बघेलखण्ड के पठारी क्षेत्रों में लाल-पीली मिट्टी पाई जाती है।

• इस पठार से बॉक्साइट, चूने का पत्थर और कोयला मुख्य रूप से पाया जाता है। सिंगरौली बघेलखण्ड के पठार में स्थित है।

• इस पठार से कर्क रेखा गुजरती है।

 

☆ मध्य प्रदेश के प्रमुख पर्वत एवं श्रेणियाँ

मध्य प्रदेश में निम्नलिखित पर्वत एवं श्रेणियाँ पाई जाती हैं

◇ अरावली पर्वत

• यह पृथ्वी की सबसे पुरानी पर्वत श्रृंखला मानी जाती है।

• अरावली की सबसे ऊँची चोटी आबू पर्वत (राजस्थान) है, इसकी ऊँचाई 1,158 मी है।

• इसका विस्तार दिल्ली से अहमदाबाद (800 किमी) तक है।

 

◇ विन्ध्याचल पर्वत

• इसका विस्तार नर्मदा नदी के उत्तर में पूर्व से पश्चिम की ओर है।

• इस पर्वत की औसत ऊंचाई 457 से 610 मी तक है। इस पर्वत की सर्वाधिक ऊँची चोटी अमरकण्टक (1,057 मी) है।

• इस पर्वत से नर्मदा, सोन एवं बेतवा नदियों का उद्भव हुआ है। इसका निर्माण क्वार्ट्ज और बालू-पत्थरों से हुआ है।

 

◇ सतपुड़ा पर्वत

• मध्य प्रदेश में सतपुड़ा पर्वत का विस्तार नर्मदा नदी के दक्षिण में विन्ध्यांचल के समानान्तर है।

• इसका निर्माण ग्रेनाइट और बेसाल्ट चट्टानों से हुआ है।

• इस पर्वत के दक्षिण में ग्वालिगढ़ की श्रेणियाँ उत्तर में महादेव पर्वत की श्रेणी तथा पूर्व में छिन्दवाड़ा एवं बैतूल के पठार स्थित हैं।

 

◇ मैकाल- अमरकण्टक श्रेणी

• यह श्रेणी सतपुड़ा पर्वत का दक्षिण-पूर्वी विस्तार है।

• यह श्रेणी छोटा नागपुर (झारखण्ड) तक विस्तृत है।

• मैकाल-अमरकण्टक श्रेणी का निर्माण बलुआ पत्थर, क्वार्ट्ज और अवसादी चट्टानों से हुआ है।

• यहाँ पर लेटेराइट मृदा मुख्य रूप से पाई जाती है।

• यह श्रेणी प्रदेश के शहडोल, मण्डला और डिण्डोरी जिलों में विस्तृत है।

• यहाँ से नर्मदा, सोन, जोहिला तथा रिहन्द नदियों का उद्भव हुआ है।

 

◇ महादेव श्रेणी

• यह सतपुड़ा श्रेणी का पूर्वी विस्तार है। इसका विस्तार प्रदेश के छिन्दवाड़ा, नरसिंहपुर, सिवनी और होशंगाबाद जिलों में है।

• महादेव श्रेणी का निर्माण बलुआ पत्थर और क्वार्ट्ज चट्टानों से हुआ है।

• मध्य प्रदेश का एकमात्र हिल स्टेशन पंचमढ़ी इसी पर्वत श्रेणी में स्थित है।

 

◇ कैमूर-भाण्डेर श्रेणी

• यह श्रेणी विन्ध्याचल पर्वत का पूर्वी विस्तार है। इसका निर्माण लाल बलुआ पत्थर और क्वार्ट्ज चट्टानों से हुआ है। यह श्रेणी यमुना और सोन नदी की जलद्विभाजक है।

• सीधी, सतना, रीवा, पन्ना, छतरपुर आदि जिलों में इस पर्वत श्रेणी का विस्तार हुआ है।

 

◇ विन्ध्याचल श्रेणी

• यह श्रेणी विन्ध्याचल, भाण्डेर, कैमूर तथा पारसनाथ पहाड़ियों के समूह के रूप में पाई जाती है। यह श्रेणी गंगा और नर्मदा नदी बेसिन की जलद्विभाजक है।

• इस श्रेणी से चम्बल, बेतवा एवं केन नदियाँ . निकलती हैं।

• विन्ध्याचल श्रेणी में चूना पत्थर सतना से, हीरा पन्ना से और कोरण्डम रीवा जिले से प्राप्त किया जाता है।

 

 

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