अध्याय 5 : पदार्थों का पृथक्करण

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❍ मिश्रण:- दो या दो से अधिक तत्व या यौगिक उनके मिलने से बनता है मिश्रण कहलाता है।

हवा एक मिश्रण है इसमें कई गैस मिले हुए है जैसे ऑक्सीजन, नाइट्रोजन, हाइट्रोजनआदि

 

पृथक्करण की विधियाँ :-

हस्त चयन :- किसी मिश्रण से हानिकारक तथा अन उपयोगी पदार्थों का हाथ से चुनकर अलग करना हस्त चयन पृथक्करण कहलाता है।

जैसे:- गेहूँ , चावल तथा दाल से पत्थर तथा भूसे को पृथक करना।

 

 थ्रेशिंग :- सूखे पौधों की डंडियों अनाज को पृथक करने को थ्रेशिंग कहते हैं।

जैसे :– बैलों की सहायता और मशीनों का उपयोग किया जाता हैं।

 

 निष्पावन :- पवन अथवा वायु के झोंकों द्वारा किसी मिश्रण के अवयव को पृथक करने की विधि निष्पावन कहलाती है।

जैसे :- किसान भूसे से अनाज इसी विधि से अलग करते हैं।

❍ चालन :– चालन द्वारा आटे से अशुद्धियों को पृथक करना चालन कहते हैं।

जैसे :- रेत से कंकड़ तथा पत्थर से पृथक करना।

❍ अवसादन :- किसी तरल मिश्रण में भारी ठोस पदार्थों के नीचे बैठने की प्रक्रिया को अवसादन कहते हैं।

जैसे :- जल की तली में भारी कण नीचे बैठ जाते हैं।

❍ निस्तारण :- रेत और जल के मिश्रण में , रेत के भारी कण तली में बैठ जाते हैं निस्तारण विधी द्वारा जल को पृथक किया जाता हैं।

जैसे :- जल में महीन कण को अलग करना ।

निस्यंदन :- मिश्रण पदार्थ में ठोस या द्रव्य को अलग करने की विधि को निस्यंदन कहते हैं।

जैसे :- रेतीले जल से स्वचछ जल को प्राप्त करना।

 

❍ वाष्पन :- जल को उसके वाष्प में परिवर्तन करने की प्रक्रिया को वाष्पन कहते हैं।

जैसे :-सूर्य के प्रकाश से जल गर्म होकर वाष्पन द्वारा धीरे-धीरे वाष्प में बदलने लगता है।

 

❍ नमक :- सूर्य के प्रकाश से जल गर्म होकर वाष्पन द्वारा धीरे-धीरे वाष्प में बदलने लगता है। कुछ समय बाद जल वाष्पित हो जाता है

तथा ठोस लवण नीचे बच जाते हैं जिसमें लवणों के मिश्रण का शोधन करके साधारण नमक प्राप्त किया जाता हैं।

 

❍ संतृप्त विलयन :- जिस विलयन में कोई पदार्थ और अधिक न घुल सके वह उस पदार्थ का संतृप्त विलयन होता है।

❍ विलेय :- कुछ पदार्थ जल में घुल जाते है।

जैसे :- पानी और नमक ।

 किसी पदार्थ के विलयन को गर्म करने पर उसमें और अधिक पदार्थ घोल जा सकता है।

 

 

 

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