मध्य प्रदेश कृषि एवं पशुपालना Agriculture and Animal Husbandry

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कृषि एवं पशुपालन

• मध्य प्रदेश एक कृषि प्रधान राज्य है। यहाँ की 79% आबादी कृषि पर आधारित है।

• राज्य के 49% भाग पर कृषि की जाती है। अनाज उत्पादन में मध्य प्रदेश का देश में 9वाँ स्थान है। देश के कुल उत्पादन का 4.65% उत्पादन मध्य प्रदेश राज्य में होता है।

• मध्य प्रदेश के आर्थिक सर्वेक्षण 2018-19 के अनुसार, वर्ष 2017-18 में राज्य की अर्थव्यवस्था (सकल मूल्य वर्धन) में फसल क्षेत्र का योगदान 25.86% रहा है।

• प्रदेश की फसल संरचना तथा उत्पादन में विविधता पाई जाती है, क्योंकि प्रदेश की धरातल, मिट्टी, जलवायु तथा सामाजिक आर्थिक परिस्थितियों में काफी विभिन्नता देखने को मिलती है।

 

 

☆ राज्य के कृषि प्रक्षेत्र व कृषि प्रदेश

 

◇ कृषि प्रक्षेत्र

फसल के आधार पर मध्य प्रदेश को निम्नलिखित सात कृषि प्रक्षेत्रों में बाँटा जाता है।
(i) ज्वार का क्षेत्र इसके अन्तर्गत गुना, शिवपुरी, श्योपुर तथा पश्चिमी मुरैना जिले आते हैं।
(ii) गेहूँ व ज्वार का क्षेत्र इसके अन्तर्गत बघेलखण्ड तथा मालवा पठार का मध्य भाग, भिण्ड, मुरैना एवं ग्वालियर जिले आते हैं।
(iii) कपास तथा गेहूँ का क्षेत्र इसके अन्तर्गत उज्जैन, मन्दसौर, शाजापुर, राजगढ़, देवाल व सीहोर जिले आते हैं।
(iv) कपास का क्षेत्र इसके अन्तर्गत पश्चिमी मध्य प्रदेश (खण्डवा, खरगौन, बड़वानी, धार, रतलाम, झाबुआ) के जिले आते हैं।
(v) चावल व कपास क्षेत्र इसके अन्तर्गत खण्डवा का क्षेत्र शामिल है।
(vi) चावल, कपास, ज्वार क्षेत्र इसके अन्तर्गत सिवनी, छिन्दवाड़ा तथा बैतूल जिले शामिल हैं।
(vii) चावल का क्षेत्र इसके अन्तर्गत मण्डला, बालाघाट, शहडोल, सिवनी, सीधी तथा जबलपुर आता है। (बघेलखण्ड क्षेत्र जिले आते है।)

 

 

◇ कृषि प्रदेश

राज्य के प्रमुख कृषि प्रदेश निम्न प्रकार हैं
• पश्चिम में काली मिट्टी का प्रदेश मन्दसौर, नीमच, रतलाम, झाबुआ, बड़वानी, हरदा, धार तथा देवास, उज्जैन।
• उत्तर में ज्वार गेहूँ का प्रदेश मुरैना, श्योपुर, भिण्ड, ग्वालियर, दतिया, शिवपुरी, गुना तथा छतरपुर, टीकमगढ़।
• मध्य में गेहूँ का प्रदेश भोपाल, सीहोर, होशंगाबाद, नरसिंहपुर, रायसेन तथा विदिशा, सागर, व दमोह।।
• चावल व गेहूँ का प्रदेश पन्ना, सतना, कटनी, उमरिया, जबलपुर तथा सिवनी।
• सम्पूर्ण पूर्वी मध्य प्रदेश (चावल का प्रदेश) रीवा, सीधी, शहडोल, अनूपपुर, डिण्डोरी, मण्डला तथा बालाघाट।

 

 

☆ फसलों का वर्गीकरण

मध्य प्रदेश की प्रमुख फसलों का वर्गीकरण निम्न है
• खाद्यान्न फसलें चावल, गेहूँ, मक्का, बाजरा
• दलहनी फसलें अरहर, चना।
• तिलहन फसलें राई-सरसों, सोयाबीन।
• वाणिज्यिक फसलें गन्ना, कपास।
• रबी फसलें गेहूँ, चना, मटर, राई, सरसों, अलसी तथा मसूर ।
• खरीफ फसलें चावल, सोयाबीन, कपास, गन्ना, मूँगफली, तिल, तुअर, ज्वार, मक्का तथा सूर्यमूखी।
• जायद फसलें खीरा, ककड़ी, तरबूज, लौकी तथा कद्दू ।

 

 

 ☆ राज्य की प्रमुख फसलें

राज्य में उत्पादन की दृष्टि से फसलों का घटता क्रम सोयाबीन, गेहूँ, चावल, मक्का, ज्वार, चना, कपास, गन्ना इत्यादि हैं।
राज्य की प्रमुख फसलों का विवरण निम्नलिखित है

 

◇ गेहूँ
• राज्य में गेहूँ, अनाजों (खाद्यान्नों) में सर्वाधिक तथा सभी फसलों में सोयाबीन के पश्चात् पैदा की जाने वाली प्रमुख फसल है। रबी की फसलों में गेहूँ सबसे प्रमुख फसल है। यह राज्य की प्रमुख सिंचित फसल भी है।
• मध्य प्रदेश में गेहूं का उत्पादन इन्दौर, उज्जैन, धार, रतलाम, गुना, कटनी, होशंगाबाद, रायसेन, भोपाल एवं विदिशा जिलों में किया जाता है।
राज्य में गेहूँ काली एवं जलोढ़ दोमट मृदा क्षेत्र में उगाया जाता है।
• गेहूँ का सबसे अधिक संकेन्द्रण मध्य नर्मदा घाटी तथा पूर्वी मालवा प्रदेश में है।
• आर्थिक सर्वेक्षण 2018-19 के अनुसार, राज्य में वर्ष 2016-17 के अन्तर्गत गेहूँ उत्पादन 21,918 हजार मीट्रिक टन था, जो वर्ष 2017-18 में घटकर 20,020 हजार मीट्रिक टन हो गया है।

《कृषि कर्मण पुरस्कार 2018》
मध्य प्रदेश राज्य ने यह पुरस्कार सर्वाधिक गेहूँ उत्पादन के सन्दर्भ में पाँचवीं बार जीता है। दिल्ली में 17 मार्च, 2018 को प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी द्वारा मध्य प्रदेश के मुख्यमन्त्री शिवराज सिंह चौहान को इस अवार्ड से सम्मानित किया गया।

 

◇ चावल
मध्य प्रदेश में चावल की खेती प्रमुख रूप से भिण्ड, शहडोल, छिन्दवाड़ा, बालाघाट, सिवनी, मण्डला तथा डिण्डोरी सीधी, रीवा, बैतूल तथा सतना, भिण्ड आदि जिलों में की जाती है।
• मध्य प्रदेश में अनाजों की दृष्टि से चावल, क्षेत्रफल एवं उत्पादन में गेहूँ के बाद द्वितीय स्थान पर है।
• चावल सर्वाधिक क्षेत्रफल पर बालाघाट जिले में उगाया जाता है।
• आर्थिक सर्वेक्षण 2018-19 के अनुसार, चावल (धान) उत्पादन में वर्ष 2016-17 की तुलना में वर्ष 2017-18 में 9.47% की कमी हुई है।

 

 

◇ मक्का
• मक्का, गेहूँ एवं चावल के बाद राज्य की तीसरी प्रमुख खाद्यान्न फसल है।
• यह फसल प्रमुख रूप से प्रदेश के उत्तर-पश्चिमी भाग में उगाई जाती है।
• मक्का की खेती झाबुआ, छिन्दवाड़ा, धार, रतलाम, मन्दसौर, शाजापुर तथा राजगढ़ जिलों में प्रमुख रूप से उत्पादित की जाती है।
• मक्का कम उपजाऊ तथा ऊबड़-खाबड़ भूमि पर पैदा की जाती है।
• आर्थिक सर्वेक्षण 2018-19 के अनुसार, मक्का के उत्पादन में वर्ष 2016-17 की तुलना में वर्ष 2017-18 में 8.81% की वृद्धि हुई है।

 

◇ चना
• देश के कुल दलहन क्षेत्रफल एवं उत्पादन में मध्य प्रदेश का सर्वप्रमुख स्थान है।
• राज्य में चने का उत्पादन पूर्वी मालवा पठार, बुन्देलखण्ड पठार तथा ऊपरी-मध्य नर्मदा घाटी के क्षेत्रों में किया जाता है।
• राज्य में सर्वाधिक चना उत्पादक जिला विदिशा है, जबकि सर्वाधिक क्षेत्रफल एवं उत्पादकता क्रमशः उज्जैन तथा हरदा जिलों में पाई जाती है।

 

◇ तुअर (अरहर दाल)
• तुअर की फसल प्रदेश के कुल कृषित क्षेत्र के लगभग 1.6% भूमि पर बोई जाती है।
• देश का लगभग 8.9% तुअर क्षेत्र मध्य प्रदेश में है।
• राज्य में तुअर चने के बाद दूसरी प्रमुख खरीफ फसल है।
• प्रदेश में तुअर प्रमुख रूप से सीधी छिन्दवाड़ा, बैतूल, नरसिंहपुर, रायसेन, खण्डवा, रीवा तथा सतना में पैदा होती है।
• राज्य के नरसिंहपुर जिले में तुअर का सर्वाधिक उत्पादन होता है।

 

◇ कपास
• राज्य में कपास कुल कृषित क्षेत्रफल के लगभग 3.1% भाग पर पैदा की जाती है।
• कपास की कृषि के लिए महत्त्वपूर्ण क्षेत्र निमाड़ का मैदान है। राज्य में कपास की कृषि खरगौन, खण्डवा, बड़वानी एवं बुरहानपुर आदि जिलों में होती है।
• खण्डवा-2, मालझरी व शंकर-4 कपास की प्रमुख किस्में हैं।
• राज्य में बी टी कॉटन की खेती वर्ष 2002-03 में प्रारम्भ की गई थी
• कपास की खेती का सर्वाधिक क्षेत्रफल, उत्पादन तथा उत्पादकता खरगौन जिले (इंदौर सम्भाग) में पाई जाती है।
• कपास मध्य प्रदेश की सबसे महत्त्वपूर्ण नकदी फसल है।

 

◇ गन्ना
• राज्य में गन्ने की उत्पादकता 5,114 किग्रा प्रति हेक्टेयर है। गन्ना पूर्णतः सिंचित फसल है, इसलिए इसकी कृषि सिंचाई सुविधा वाले क्षेत्रों में अधिक की जाती है।
• राज्य के नरसिंहपुर, छिन्दवाड़ा, ग्वालियर, दतिया, सीहोर, बैतूल, बुरहानपुर, बड़वानी एवं मण्डला जिलों में यह प्रमुख रूप से पैदा किया जाता है।
• राज्य में गन्ने का सर्वाधिक क्षेत्रफल, उत्पादन एवं उत्पादकता क्रमशः नरसिंहपुर, छिन्दवाड़ा एवं रतलाम जिलों में पाई जाती है।

 

 

◇ राई-सरसों
• राज्य में तिलहन फसलों में सोयाबीन के बाद राई-सरसों का द्वितीय स्थान है।
• इसका उत्पादन मुरैना, भिण्ड, श्योपुर, ग्वालियर एवं शिवपुरी जिलों में होता है।
• राई-सरसों का प्रदेश में सर्वाधिक क्षेत्रफल एवं उत्पादन भिण्ड जिले में पाया जाता है, जबकि उत्पादकता रतलाम जिले में सर्वाधिक पाई जाती है।

 

 

◇ सोयाबीन
• सोयाबीन राज्य के सर्वाधिक कृषि क्षेत्र में बोई जाने वाली तिलहन फसल है। यहाँ देश का लगभग 88% सोयाबीन पैदा किया जाता है। इसलिए इसे सोया राजधानी भी कहा जाता है। राज्य में लगभग 50,000 हेक्टेयर में सोयाबीन की खेती की जाती है।
अंकुर, जवाहर, दुर्गा, पंजाब-1 तथा गौरव सोयाबीन की महत्त्वपूर्ण किस्मे हैं।
• राज्य में सीहोर सोयाबीन का सबसे बड़ा उत्पादक जिला है, जबकि सर्वाधिक क्षेत्रफल एवं उत्पादकता क्रमशः उज्जैन एवं ग्वालियर जिलों में पाई जाती है।
• एशिया का सबसे बड़ा सोयाबीन कारखाना उज्जैन में स्थित है।
• आर्थिक सर्वेक्षण 2018-19 के अनुसार, वर्ष 2016-17 की अपेक्षा वर्ष 2017-18 में सोयाबीन उत्पादन में 19.97% की कमी हुई है।

 

◇ मूँगफली
• राज्य की प्रमुख फसलों में मूँगफली की भी खेती की जाती है और यह राज्य की प्रमुख नकदी है।
• इसकी खेती राज्य के बलुआ दोमट वाली मृदा में की जाती है।
• राज्य में मूँगफली की गंगापुरी, फुले कान्ति, ज्योति, टीजी-26 इत्यादि किस्मों की खेती की जाती है।
• इस फसल की बुआई जून-जुलाई में तथा खुदाई नवम्बर-दिसम्बर के महीनों में की जाती है।
• राज्य के खरगौन, खण्डवा, बड़वानी, छिन्दवाड़ा, बैतूल, दतिया, शिवपुरी इत्यादि जिलों में मूँगफली की खेती की जाती है।

 

 

◇ अफीम
• देश में सर्वाधिक अफीम की खेती मध्य प्रदेश में की जाती है। राज्य में देश के 64% अफीम की खेती की जाती है।
• इसका उपयोग औषधियों के निर्माण के लिए किया जाता है।
• राज्य में नीमच सबसे बड़ा अफीम उत्पादक जिला है तथा दूसरे स्थान पर मन्दसौर है।

 

 

◇ गाँजा
• गाँजा की खेती राज्य के खण्डवा जिले में सरकार के नियन्त्रण में की जाती है।
• इसके पौधे से निकलने वाले रस से ‘चरस’ बनाई जाती है। ‘चरस’ की बिक्री सरकारी नियन्त्रण द्वारा की जाती है, जिससे राज्य सरकार को करोड़ों रुपये की वार्षिक आय प्राप्त होती है। इससे ब्राउन शुगर तथा हैरोइन भी बनती है

 

 

परियोजनाएँ                   नदी

राणा प्रताप सागर        =  चम्बल
परियोजना
जवाहर सागर              = चम्बल
परियोजना
कोटा बैराज परियोजना = चम्बल
सरदार सरोवर             = नर्मदा एवं
परियोजना                     सहायक नदियाँ
बाणसागर परियोजना   = सोन
उर्मिल परियोजना         = उर्मिल
सिंहपुर बैराज, ग्रेटर      = केन
गंगऊ बाँध
रानी लक्ष्मीबाई             = बेतवा
(राजघाट/माताटीला)
परियोजना
पेंच परियोजना             = पेंच
बाघ परियोजना            = बाघ
काली सागर परियोजना = बाघ एवं
                                    सहायक नदी
बावनथड़ी परियोजना   = बावनथड़ी
(राजीव सागर)

 

 

 

《राज्य के प्रमुख फसल उत्पादक जिले》

फसल        प्रमुख उत्पादक जिले
सोयाबीन –  उज्जैन, शाजापुर, राजगढ़, देवास
                 ,धार हरदा
गेहूँ         –  होशंगाबाद, रायसेन, उज्जैन,
                 हरदा, सीहोर, विदिशा, सतना
                , सागर, रीवा
चावल    –  बालाघाट, मण्डला, शहडोल,
                बैतूल, रीव सीधी, कटनी, छिन्दवाड़ा
               , सिवनी
मक्का    –  धार, छिन्दवाड़ा, झाबुआ, खरगौन,
               बड़वानी
ज्वार     –  खरगौन, बड़वानी, मन्दसौर, रतलाम,
               उज्जैन
चना      –  विदिशा, नरसिंहपुर, रायसेन, गुना
               होशंगाबाद, सागर, छिन्दवाड़ा,
               राजगढ़
तुअर     – नरसिंहपुर, सिवनी, सिंगरौली,
               छिन्दवाड़ा, बैतूल, रायसेन
तिल      – सीधी, छतरपुर, टीकमगढ़, शहडोल
मूँगफली – खरगौन, खण्डवा, बड़वानी,
               छिन्दवाड़ा, सिवनी
कपास   – खरगौन, खण्डवा, बड़वानी,
               बुरहानपुर, इन्दौर
गन्ना       – नरसिंहपुर, छिन्दवाड़ा, ग्वालियर,
               दतिया, सीहोर
प्याज     – शाजापुर, आगर, इन्दौर,
               निमाड, सतना
आलू      – इन्दौर, देवास, शाजापुर,
               आगर-मालवा
गाँजा     – खण्डवा

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