अध्याय 16 : प्रकाश | Light

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प्रकाश क्या है। प्रकाश के प्रकार । प्रकाश परावर्तन के नियम । सूर्य का प्रकाश श्वेत या रंगीन। मानव नेत्र। ब्रेल प्रद्धति क्या है।

❍ प्रकाश :- प्रकाश एक प्रकार की ऊर्जा है, जिसकी सहायता से हमें वस्तुएँ दिखाई देती हैं। अर्थात् जो विकिरण हमारी आँख को संवदित करती हो, प्रकाश कहलाती है।

○ प्रकाश तीन प्रकार का होता है। 1.पराबैंगनी( UV) 2.अवरक्त(IR) 3. दृश्य(v)

 

○ परावर्तन के नियम :- दर्पण से टकराने के पश्चात , प्रकाश-किरण दूसरी दिशा में परावर्तित हो जाती है।

1.आपतित किरण :- किसी पृष्ठ पर पड़ने वाली प्रकाश-किरण को आपतित किरण कहते हैं।

2. परावर्तित किरण :- पृष्ठ से परावर्तन के पश्चात वापस आने वाली प्रकाश -किरण को परावर्तित किरण कहते हैं।

• आपतन कोण सदैव परावर्तन कोण के बराबर होता है।

आपतित किरण , आपतन बिंदु पर अभिलंब तथा परावर्तित किरण-ये सभी एक तल में होते हैं।

 

○ पाशर्व-परिवर्तन :- दर्पण द्वारा बने प्रतिबिंब में वस्तु का बायाँ भाग दाईं ओर तथा दायाँ भाग बाईँ ओर दिखाई पड़ता है।

○ विसरित परावर्तन :- जब सभी समान्तर किरणें किसी खुरदुरे या अनियमित पृष्ठ से परावर्तित होने के पश्चात समान्तर नही होती , तो ऐसे परावर्तन को विसरित परावर्तन कहते हैं।

 

○ नियमित परावर्तन :- दर्पण चिकने पृष्ठ से होने वाले परावर्तन को नियमित परावर्तन कहते हैं।

 

○ परिवर्तित प्रकाश :- प्रकाश को पुनः परावर्तित किया जा सकता है।

• पनडुब्बियों , टैंकों तथा बंकरो में छिपे सैनिकों द्वारा बाहर की वस्तुओं को देखने के लिए किया जाता है।

• बाल कटने के बाद पीछे के बाल कैसे कटे है उसे देखने के लिए परिदर्शी में दो समतल दर्पण का उपयोग किए जाते है।

 

○ सूर्य का प्रकाश :- सूर्य का प्रकाश को श्वेत प्रकाश कहलाता है , सात रंगों से मिलकर बना होता है।

मानव नेत्र :- हम वस्तुओं को केवल तभी देख पाते हैं जब उनसे आने वाला प्रकाश हमारे नेत्रों में प्रवेश करता है।

• नेत्र हमारी सबसे महत्वपूर्ण ज्ञानेन्द्रियों में से एक है।

• हमारे नेत्र की आकृति लगभग गोलाकार है। नेत्र का बाहरी आवरण सफेद होता है।

• इसके पारदर्शी अग्र भाग को कॉर्निया कहते हैं।

• कॉर्निया के पीछे हम गहरे रंग की पेशियों की संरचना को परितारिका कहते हैं।

• परितारिका में एक छोटा सा द्वार होता है जिसे पुतली कहते हैं।

• लेंस प्रकाश को आँख के पीछे एक परत पर फोकसित करता है जिसे रेटिना कहते है।

• पुतली के पीछे एक लेंस है जो केंद्र पर मोटा है।

सामान्य नेत्र द्वारा पढ़ने के लिए सर्वाधिक सुविधाजनक दूरी लगभग 25 Cm होती है।

 

○ नेत्रों की देखभाल :- सामान्य नेत्र समीप तथा दूर की वस्तुओं को स्पष्ट देख सकते हैं।

• यदि परामर्श दिया गया है तो उचित चश्मे का उपयोग कीजिए।

• सूर्य या किसी शक्तिशाली प्रकाश स्त्रोत को कभी भी सीधा मत देखिए।

• पठन सामग्री को सदैव दृष्टि की सामान्य दूरी पर रखकर पढ़िए।

• अपने नेत्रों को कभी मत रगड़िए।

• नेत्रों को स्वच्छ जल से धोइए।

 

○ ब्रैल पद्धति :- चक्षुषविकृति युक्त व्यक्तियों के लिए सर्वाधिक लोकप्रिय साधन ब्रैल कहलाता है।

• लुई ब्रैल जो स्वयं एक चक्षुषविकृति युक्त व्यक्ति थे। जिसने 1821 चक्षुषविकृति युक्त व्यक्तियों के लिए एक पद्धति विकसित किया।

• वर्तमान पद्धति 1832 में अपनाई गई। सामान्य भाषाओं गणित तथा वैज्ञानिक विचारों के लिए ब्रैल कोड है।

• ब्रैल पद्धति का उपयोग करके अनेक भारतीय भाषाओं को पढ़ा जा सकता है।

ब्रैल पद्धति में 63 बिंदुकित पैटर्न हैं। प्रत्येक छाप एक अक्षर , अक्षरों के समुच्चय , सामान्य शब्द अथवा व्याकरणिक चिन्ह को प्रदर्शित करती है।

 

 

 

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