अध्याय 2 :लोकतंत्र क्या? लोकतंत्र क्यों? |What is democracy? Why Democracy?

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लोकतंत्र क्या है।लोकतंत्र के प्रकार। लोकतंत्र की विशेषताएं।लोकतंत्र क्यों जरूरी है।भारत में किस प्रकार का लोकतंत्र है।

 

❍ लोकतंत्र क्यों जरूरी है :-

कुछ देशों में, राजनीतिक अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, बोलने की स्वतंत्रता, प्रेस की स्वतंत्रता और इंटरनेट लोकतंत्र को यह सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है कि मतदाताओं को अच्छी तरह से सूचित किया जाता है, जिससे वे अपने हितों के अनुसार मतदान कर सकें।

 

❍ भारत में किस प्रकार का लोकतंत्र हैं :-

भारत सरकार के संसदीय स्वरूप के साथ एक संप्रभु समाजवादी धर्मनिरपेक्ष लोकतांत्रिक गणराज्य है जो एकात्मक विशेषताओं के साथ संरचना में संघीय है। राष्ट्रपति को सलाह देने के लिए प्रधान मंत्री के साथ एक मंत्रिपरिषद होती है जो देश का संवैधानिक प्रमुख होता है।

 

❍ लोकतंत्र की विशेषताएं :-

लोकतंत्र की आधारशिलाओं में सभा, संघ और भाषण, समावेश और समानता, नागरिकता, शासितों की सहमति, मतदान अधिकार, जीवन और स्वतंत्रता के अधिकार के अनुचित सरकारी वंचन से स्वतंत्रता, और अल्पसंख्यक अधिकारों की स्वतंत्रता शामिल है।

 

❍ लोकतंत्र के प्रकार :-

1.विशुद्ध या प्रत्यक्ष लोकतंत्र तथा
2.प्रतिनिधि सत्तात्मक या अप्रत्यक्ष लोकतंत्र

 

❍ लोकतंत्र क्या है?

लोकतंत्र शासन का एक ऐसा रूप है जिसमें शासकों का चुनाव लोग करते हैं।

 

❍ लोकतंत्र की विशेषताएँ :-

• इसमें शासक लोगों द्वारा चुने जाते हैं।

• नागरिकों के अधिकारों और स्वतंत्रताओं की सुरक्षा

• लोकतंत्र में हर व्यस्क नागरिक का एक वोट होना चाहिए और हर वोट का एक समान महत्व होना चाहिए।

• लोकतंत्र निष्पक्ष एवं स्वतंत्र चुनावों पर आधरित होना चाहिए ताकि सत्ता में बैठे लोग के लिए जीत-हार समान अवसर हो चाहिए।

• लोकतंत्र में अंतिम निर्णय लेने की शक्ति लोगों द्वारा चुने हुए प्रतिनिधयों के पास होना चाहिए।

 

❍ लोकतंत्र ही क्यो :-

○ लोकतंत्र के खिलाफ तर्क

• लोकतंत्र में नेता बदलते रहते है। इससे अस्थिरता पैदा होती हैं।

• लोकतंत्र का मतलब सिर्फ राजनैतिक लड़ाई और सत्ता का खेल है। यहाँ नैतिकता की कोई जगह नही होती।

• लोकतांत्रिक व्यवस्था में इतने सारे लोगों से बहस और चर्चा करनी पड़ती है कि हर फ़ैसले में देरी होती है।

• चुने हुए नेताओं को लोगों के हितों का पता ही नही होता। इसके चलते खराब फ़ैसले होते है।

• लोकतंत्र में चुनावी लड़ाई महत्वपूर्ण और खर्चीली होती है, इसीलिए इसमें भ्र्ष्टाचार होता है।

• सामान्य लोगों को पता नही होता कि उनके लिए क्या चीज़ अच्छी है और क्या चीज बुरी ; इसलिए उन्हें किसी चीज का फ़ैसला नही करना चाहिए।

 

❍ लोकतंत्र के पक्ष में तर्क

• लोकतांत्रिक शासन पद्धति दूसरों से बेहतर है क्योंकि यह शासन का अधिक जवाबदेही वाला स्वरूप है।

• लोकतंत्र में बेहतर निर्णय लेने की संभावना बढ़ाता है।

• लोकतंत्र में मतभेदों और टकरावों को संभालने का तरीका उपलब्ध कराता है।

• लोकतंत्र नागरिकों का सम्मान बढ़ाता है। लोकतंत्र में धर्म , जाती , वर्ग , लिंग , अमीर-गरीब में कोई भेदभाव नही करता।

• लोकतांत्रिक व्यवस्था दूसरों से बेहतर है क्योंकि इसमें हमें अपनी गलती ठीक करने का अवसर भी मिलता है।

 

 

❍ लोकतंत्र का वृहतर अर्थ

• हमारे समय में लोकतंत्र का सबसे आम रूप है प्रतिनिधि वाला लोकतंत्र , जिसमें सभी लोगों की तरफ से बहुमत को फ़ैसले लेने का अधिकार होता है।

• बहुमत का शासन भी चुने हूए प्रतिनिधियों के माध्यम से होता है।

• लोकतांत्रिक फैसले का मतलब होता है सभी लोगों के साथ विचार-विमर्श के बाद उनकी स्वीकृति से फैसला लेना।

• लोकतंत्र एक ऐसा सिद्धांत है जिसका प्रयोग सरकार , राष्ट्र- राज्य , परिवार-समाज अन्य संगठन पर लागू होता है।

• लोकतांत्रिक व्यवस्था सभी नागरिकों की सक्रिय भागीदारी पर निर्भर करती है।

 

☆लोकतंत्र के स्तंभ

लोकतंत्र के चार स्तंभों-

1.विधायिका
2.कार्यपालिका
3.न्यायपालिका
4.मीडिया

 

लोकतंत्र के चार स्तंभ

1). पहला स्तंभ (विधायिका): लोकतंत्र का पहला स्तंभ विधायिका है जो कि कानून बनाने का काम करती है लोगों द्वारा चुने गए महत्वपूर्ण व्यक्ति विधायिका के रूप में कानूनों का निर्माण करते हैं तथा पूरी जिम्मेवारी लेते हैं कि जो कानून वे बना रहे हैं वह हर तरह से जनता के हित में हो तथा किसी भी समुदाय का शोषण करने वाला न हो। यह कानून शासक व प्रजा दोनों के लिए मान्य होता हैं।

2.) दूसरा स्तंभ (कार्यपालिका): विधायिका द्वारा बनाए गए कानून को लोगों तक पहुँचाना व कानून को बरकरार रखना कार्यपालिका का काम होता है।

3). तीसरा स्तंभ (न्यायपालिका): बनाए गए कानूनों की व्याख्या करना व कानून का उल्लंघन होने पर सज़ा का प्रावधान करना न्यायपालिका का कार्य होता है। इससे कोई भी व्यक्ति शक्ति के आधार पर कानून का उल्लंघन करने में असमर्थ हो जाता है।

4). चौथा स्तंभ (पत्रकारिता): पत्रकारिता जिसे मीडिया भी कहा जाता है को लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के रूप में दर्जा मिला है। मीडिया जो कि लिखित, मौखिक या दृश्य किसी भी रूप में हो सकती है जनता को जानकारी देती है कि किस जगह कानूनों का उल्लंघन हो रहा है तथा तीनों स्तम्भ अपनी जिम्मेवारी तथा निष्ठा से कार्य कर रहे हैं या नही।

 

☆ सरकार के अंग :-

1.विधायिका (संसद) :- संघीय (केन्द्रीय) सरकार के तीन अंग हैं।

2.कार्यपालिका :- (राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मंत्री परिषद) और

3.न्यायपालिका (सर्वोच्च न्यायालय)।

 

 

 

अध्याय 3 : संविधान निर्माण

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