अध्याय 1: समकालीन विश्व में लोकतंत्र | Democracy in the Contemporary World

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 उपनिवेशवाद किसे कहते हैं। सैनिक शासन , प्रजातंत्र , राजतंत्र , राजशाही , तानाशाही , गणतंत्र , लोकतंत्र के तीन नक्शे

 

विश्व की विभिन्न प्रकार की शासन प्रणाली :-

❍ राजशाही :- यह प्राचीन शासन प्रणाली है सऊदी अरब ब्रूनेई और यूएई में अभी यूएई में अभी भी राजतंत्र हैं यूरोपीय देशों में औपचारिक रूप से राजतंत्र को बनाए रखा है परंतु इसकी शक्तियों को सीमित कर दिया गया है इन देशों में लोकतांत्रिक सरकारी अस्तित्व में है जैसे ब्रिटेन पुर्तगाल स्पेन डेनमार्क स्वीडन

 

❍ गणतंत्र :- राष्ट्रपति का चुनाव किया जाता है गणपत करके लाता है यूएसए आधुनिक युग का पहला गण तंत्र है भारत और यूएसए गणतंत्र पर क्रॉउन वंशवाद है

 

❍ तानाशाही :- इस प्रकार की शासन प्रणाली में समस्त शक्तियां एक ही व्यक्ति के हाथ में होती है अफ्रीकी देशों में यही प्रणाली प्रचलित हैं दक्षिण अफ्रीका को छोड़कर

 

❍ साम्यवाद :- शासन प्रणाली हिंदी सोंग मैं समझ सकती है साम्यवादी के हाथों में लोकतांत्रिक चुनाव नहीं होते
कम्युनिस्ट पार्टी की सर्वे सर्वा होती हैं जनता को मात्र स्थानीय स्तर पर ही मतदान का अधिकार दिया जाता है वर्तमान में चीन वियतनाम और क्यूबा में यह शासन प्रणाली व्याप्त हैं।

 

❍ प्रजातन्त्र :- जनता का शासन है। जिस देश में जनता को शासन के कार्यों में भाग लेने का अधिकार होता है और स्वयं शासन का संचालन करती है, उस देश में प्रजातन्त्र की व्यवस्था मानी जाती है।

 

❍ सैनिक शासन :- जनतन्त्र के असफ़ल होने पर सामाजिक व्यवस्थाओं को सुचारु रूप से चलाने के लिये सैनिक शासन का प्रयोग किया जाता है। जो असामाजिक ताकतें सैनिक शासन के दौरान बल पूर्वक दबा दिया जाता है।

 

❍ लोकतंत्र :- शासन का ऐसा रूप है जिसमें शासकों का चुनाव लोग करते हैं। इसमें शासक लोगों द्वारा चुने जाते हैं।

 

○ लोकतंत्र के लिए संधर्ष :- लोकतंत्र का फैलाव बहुत सरलता से और एक जैसे रूप में नहीं हुआ है। विभिन्न देशों में इसने काफी सारे उतार-चढ़ाव देखें हैं। आज भी लोकतंत्र की स्थिरता और उसके टिकाऊपन को लेकर संदेह बना रहता है।

○ चीले दक्षिण अमेरिका महाद्वीप के एक प्रमुख देश है

• सल्वाडोर आयते चले कि सोशलिस्ट पार्टी के संस्थापक थे जिन्होंने 1970 के राष्ट्रपति चुनाव में जीत हासिल की

•राष्ट्रपति बनने के बाद उन्होंने गरीबों और मजदूरों के फायदे वाले अन्य कार्यक्रम शुरू करवाएं जिसमें जिनमें से कुछ निम्न थे

1.शिक्षा प्रणाली में सुधार
2.बच्चों को मुफ्त दूध बांटना और भूमिहीन किसानों के बीच जमीन का पूरा विवरण
3.विदेशी कंपनियों द्वारा देश से तांबा जैसी प्राकृतिक संपदा को बाहर ले जाने का विरोध।

 

•लेकिन उनकी नीतियों को मुल्क में चर्च जमीदार वर्ग और अमीर लोग तथा अन्य राजनीतिक पार्टियां पसंद नहीं करते थे।

•11 सितंबर 1973 को फौज में उनकी सरकार का तख्तापलट कर दिया

 

○ 1973 का सैनिक तख्तापलट

11 सितंबर 1973 कि सुबह नौसेना के एक समूह ने बंदरगाह पर कब्जा कर लिया और रक्षा मंत्री को तब गिरफ्तार कर लिया जब वे अपने कार्यालय पहुंचे

• सेना के अधिकारियों ने राष्ट्रपति आयते से पद छोड़ने को कहा लेकिन उन्होंने इस्तीफा देने या देश से बाहर चले जाने से इनकार कर दिया

• उसके बाद फौज ने राष्ट्रपति निवास को घेर लिया और उस पर बम बरसाने और अभी इस फौजी हमले में राष्ट्रपति आयेदे कि मौत हो गई.

• इस सैनिक तख्तापलट अगुवाई जनरल ऑग्सतो पिनोशे कर रहे थे ।

• अमेरिका की सरकार आयेंदे के शासन से खुश नही थी। उसने तख्तापलट करने वालों की गतिविधियों में मदद की , उनके लिए पैसे उपलब्ध कराए।

• इस तख्तापलट के बाद पिनोशे मुल्क के राष्ट्रपति बन बैठे और उन्होंने अगले 17 वर्षों तक राज किया।

• एक लोकतांत्रिक सरकार से चिले में सैन्य तानाशाही की स्थापना हुई।

• पिनोशे की सरकार ने आयेंदे के समर्थकों और लोकतंत्र की माँग करने वालों का दमन किया , उनकी हत्या कराई।

 

○ लोकतंत्र की वापसी:-

• पिनोशे का सैनिक शासन 1988 में तब समाप्त हुआ जब उन्होंने जनमत संग्रह कराने का फ़ैसला किया। उन्हें भरोसा था कि लोग उनके शासन को जारी रखने के पक्ष में मतदान करेंगे।

• लेकिन चिले के लोगों ने अपनी लोकतांत्रिक परंपरा को भुलाया नही था। उन्होंने भारी बहुमत से पिनोशे की सत्ता को ठुकरा दिया।

• इस प्रकार चिले में राजनीति स्वतंत्रता बहाल हुई।

• धीरे-धीरे शासन में सेना की भूमिका खत्म होती गई।

• बाद में आई सरकारों ने पिनोशे के राज में हुई गड़बड़ियों की जाँच के आदेश दिए हैं। इन जाँचो से पता चलता है कि पिनोशे सरकार सिर्फ क्रूर ही नही थी उसने भारी भ्र्ष्टाचार भी किया था।

• जनवरी 2006 में राष्ट्रपति आयेंदे की बेटी मिशेल बैशेले चिले के राष्ट्रपति बनी।

 

○ पोलैंड में लोकतंत्र

• 1980 में पोलैंड पर जारुजेलस्की के नेतृव में पोलिश यूनाइटेड वर्कर्स पार्टी का शासन था।

• इस देश में किसी अन्य राजनीतिक दल को राजनीति में भाग लेने की अनुमति नहीं थी।

• लोग साम्यवादी शासन या दल के पदाधिकारियों का चुनाव अपनी इच्छा से नही कर सकते थे । नेताओं या पार्टी या सरकार के खिलाफ आवाज उठाने वालों को जेल ने डाल

• पोलैंड की सरकार को एक बड़े साम्यवादी देश, सोवियत संघ का समर्थन हासिल था और वही इस पर नियंत्रण भी करता था।

 

○ लोकतंत्र की वापसी

• 1988 में सोलिडेरिटी ने फिर से हड़ताल करवाई और लेक वालेशा ने इसकी अगुवाई की।

• इस समय पोलैंड की सरकार पहले से कमजोर थी, सोवियत संघ से मदद की भी पहले जैसा भरोसा न था और अर्थव्यवस्था में तेजी से गिरावट आ रही थी

• अप्रैल 1889 में लेक वालेशा के साथ समझौता-वार्ता का एक और दौर चला था स्वतंत्र चुनाव कराने की मांग मान ली गई।

• सोलिडेरिटी ने सीनेट के सभी 100 सीटों के लिए चुनाव लड़ा और उसे 99 सीटों पर सफलता मिली।

• अक्टूबर 1990 में पोलैंड में राष्ट्रपति पद के लिए पहली बार चुनाव हुए जिसमें एक से ज्यादा दल हिस्सा ले सकते थे। लेक वालेशा को पोलैंड का राष्ट्रपति चुना गया।

 

○ लोकतंत्र की दो विशेषताएँ

• लोकतंत्र सरकार व रूप है जिसमें लोग अपनी मर्जी से सरकार चुनते हैं।

लोकतंत्र की दो विशेषताएं

1. सिर्फ लोगों द्वारा चुने गए नेताओं को ही देश पर शासन करना चाहिए।
2. लोगों को अभिव्यक्ति की आजादी, संगठन बनाने और विरोध करने की आजादी जरूर है।

 

○ लोकतंत्र के तीन नक्शे

• 1900 तक विश्व में कुछ ही लोकतांत्रिक शासन वाले थे जैसे, अमेरिका, फ्रांस, इंग्लैंड, आदि।

•1950 तक दुनिया के अधिकांश उपनिवेशों को राजनैतिक आजादी मिल गई थी जैसे भारत , श्रीलंका , पाकिस्तान , म्यांमार आदि।

• 1975 तक अधिकांश देशों में लोकतांत्रिक व्यवस्था कायम हो चुकी थी। जबकि अधिकांश देशों में लोकतांत्रिक सरकार का तानाशाहों द्वारा उखाड़ फेंका गया।

• सन 2000 आते-आते अधिक देश लोकतंत्र का अनुसरण करने लगे। सोवियत संघ के विघटन तथा अन्य लोकतांत्रिक देशों का समर्थन में लोकतंत्र के लिए मार्ग प्रशस्त किया।

 

○ लोकतंत्र विस्तार के विभिन्न चरण

• 1779 की फ्रांसीसी क्रांति ने फ्रांस में टिकाऊ और पक्के लोकतंत्र की स्थापना नहीं की थी लेकिन फ्रांसीसी क्रांति ने पूरे यूरोप में जगह-जगह पर लोकतंत्र के लिए संघर्षों की प्रेरणा दी।

• 18वीं और 19वीं सदी में राजनीतिक घटनाक्रमों ने राजशाही और सामंत वर्ग की शक्ति में कमी कर दी थी।

• 1776 में उत्तर अमरीका में स्थित ब्रिटिश उपनिवेशों ने खुद को आजाद घोषित करा दिया तथा एक साथ मिलकर संयुक्त राज्य अमेरिका अर्थात आधुनिक अमरीका का गठन किया।

• 1787 में उन्होंने एक लोकतांत्रिक संविधान को मंजूर किया लेकिन इस व्यवस्था में भी मतदान का अधिकार पुरुषों को सीमित था।

• लोकतंत्र के लिए संघर्ष करने वाले सभी व्यस्कों- औरत या मर्द, अमीर या गरीब,श्वेत या अश्वेत को मतदान देने का अधिकार देने की मांग कर रहे थे। इसे ‘ सार्वभौमिक व्यस्क मताधिकार’ या ‘ सार्वभौम अधिकार’ कहा जाता है।

• यूरोप, उत्तरी और दक्षणी अमरीका के देशों में सबसे पहले आधुनिक लोकतंत्र की स्थापना हुई।

 

 

○ लोकतंत्र विस्तार के विभिन्न चरण

• 1779 की फ्रांसीसी क्रांति ने फ्रांस में टिकाऊ और पक्के लोकतंत्र की स्थापना नहीं की थी लेकिन फ्रांसीसी क्रांति ने पूरे यूरोप में जगह-जगह पर लोकतंत्र के लिए संघर्षों की प्रेरणा दी।

• 18वीं और 19वीं सदी में राजनीतिक घटनाक्रमों ने राजशाही और सामंत वर्ग की शक्ति में कमी कर दी थी।

• 1776 में उत्तर अमरीका में स्थित ब्रिटिश उपनिवेशों ने खुद को आजाद घोषित करा दिया तथा एक साथ मिलकर संयुक्त राज्य अमेरिका अर्थात आधुनिक अमरीका का गठन किया।

• 1787 में उन्होंने एक लोकतांत्रिक संविधान को मंजूर किया लेकिन इस व्यवस्था में भी मतदान का अधिकार पुरुषों को सीमित था।

• लोकतंत्र के लिए संघर्ष करने वाले सभी व्यस्कों- औरत या मर्द, अमीर या गरीब,श्वेत या अश्वेत को मतदान देने का अधिकार देने की मांग कर रहे थे। इसे ‘ सार्वभौमिक व्यस्क मताधिकार’ या ‘ सार्वभौम अधिकार’ कहा जाता है।

• यूरोप, उत्तरी और दक्षणी अमरीका के देशों में सबसे पहले आधुनिक लोकतंत्र की स्थापना हुई।

 

○ उपनिवेशवाद का अंत

• 1945 में द्वितीय विश्व युद्ध के तत्काल बाद अनेक देशों ने लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था अपना ली।

• जबकि अधिकांश देशों में लोकतांत्रिक समय तक कायम नहीं रह सकी।

• पश्चिमी अफ्रीका का घाना देश ब्रिटिश उपनिवेश था तथा इसका नाम गोल्ड कोस्ट था।

1957 में यह देश आजाद हुआ यह आफ्रीका का सबसे पहले आजादी पाने वाले देश में से एक था और इससे अनेक अफ्रीकी देश को आजादी के लिए संघर्ष करने की प्रेरणा मिली।

•आजादी के बाद एनाक्रूमा जिन्होंने घाना की आजादी की लड़ाई में सक्रिय भूमिका निभाई थी। घाना के पहले प्रधानमंत्री और फिर राष्ट्रपति बने।

•उन्होंने अपने को आजीवन राष्ट्रपति के रूप में चुनवा लिया था लेकिन थोड़े समय बाद ही 1966 में सेना ने उनका तख्तापलट कर दिया। घाना की तरह अधिकांश अफ्रीकी देशों का रिकॉर्ड कमो-बेश इसी तरह रहा।

 

○ हाल का दौर

• लोकतंत्र की दिशा में ज्यादा तेजी से कदम उठाने का सिलसिला 1980 के बाद शुरू हुआ। सोवियत संघ के बिखराव के साथ यह प्रक्रिया और तेजी हुई। सोवियत संघ में कुल 15 गणराज्य थे जो स्वतंत्र देशों के रूप में सामने आए और जिनमें से अधिकांश ने लोकतांत्रिक व्यवस्था ही अपनाई।

• लैटिन अमेरिका के अनेक देशों में लोकतांत्रिक व्यवस्था की बहाली हुई।
1990 के दशक में पाकिस्तान और बांग्लादेश में सैनिक शासन के जगह लोकतंत्र का आगमन हुआ।
लेकिन यह बदलाव स्थाई नहीं थे और 1999 में जनरल मुशर्रफ ने पाकिस्तान में फिर से सैनिक शासन कायम कर लिया।

○ नेपाल में राजा ने अपने अनेक अधिकार चुने हुए प्रतिनिधियों की सरकार को सौंपे और खुद संवैधानिक प्रमुख बने रहे।
2005 में नेपाल के नए राजा ने चुनी हुई सरकार को बर्खास्त कर दिया और पिछले दशक में लोगों को दी गई राजनीति आजादी को समाप्त कर दिया।

○ 1947 में भारत 1948 में श्रीलंका में और पड़ोसी देश म्यांमार औपनिवेशिक शासन से आजाद हुआ और इसने लोकतंत्र को अपनाया।
लेकिन 1962 में सैनिक तख्तापलट से लोकतंत्र का अंत हो गया।

○ 1990 में आंग सान सू ची की अगुवाई वाली नेशनल लीग फॉर डेमोक्रेसी ने चुनाव जीते।
परन्तु म्यामांर के फौजी शासकों ने सत्ता छोड़ने से इंकार कर दिया और चुनाव परिणामों का मान्यता नहीं दी बल्कि उन्होंने सू ची समेत चुने हुए लोकतंत्र समर्थक नेताओं को गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया या उनके घर में नजरबंद कर दिया ।

• नजरबंदी की सजा झेलने के बावजूद सू ची ने लोकतंत्र के लिए अपना अभियान जारी रखा। उनके संघर्ष को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिली। उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार मिला।

सन 2005 तक करीब 140 देशों में बहुदलीय प्रणाली के तहत चुनाव कराए जाते हैं थे। यह संख्या पहले कभी इतनी अधिक नही रही।

 

○ अंतरराष्ट्रीय संगठन

• दुनिया की ऐसी कोई सरकार नहीं जिसके द्वारा बनाए गए कानून दुनिया भर के लोगों पर लागू होते हों।

• पर दुनिया में ऐसी कई संस्थाएं जो और आंशिक रूप से ऐसी सरकार के कुछ काम करती है।

• यह संगठन विभिन्न देशों और लोगों पर उस तरह नियंत्रण नहीं रख सकती है। जैसा कोई सरकार रखती है।

• लेकिन यह नियम बनाते हैं जो सरकारों के कामकाज की सीमा तय करते हैं उनके- लिए दिशा- निर्देश देते हैं।

 

○ संयुक्त राष्ट्र संघ :- यह दुनिया भर के देशों का एक वैश्विक संगठन है जो अंतराष्ट्रीय कानून, सुरक्षा, आर्थिक निकाय और सामाजिक समता के मामले में परस्पर सहयोग स्थापित करने में मदद करता है। संयुक्त राष्ट्र के महासचिव उसके मुख्य प्रशासनिक अधिकारी है।

• संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद- यह संयुक्त राष्ट्र संघ कि ही एक संस्था है जिसकी विभिन्न देशों के बीच सुरक्षा शांति बनाए रखने की जिम्मेदारी है। यह एक अंतरराष्ट्रीय शांति दस्ता बानकर गलती करने वालों के खिलाफ कार्रवाई कर सकती है।

○ IMF राष्ट्रीय मुद्रा कोष – जब सरकार को पैसे की जरूरत होती है तब अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष और विश्व बैंक सरकारों को ऋण देते है। उधार देने से पहले यह संस्थाएं संबद्ध सरकार से अपना हिसाब किताब दिखाने को कहती है और उनकी आर्थिक नीतियों के बदलाव का निर्देश देती है।

 

○ क्या ये निर्णय लोकतांत्रिक है?

विश्व स्तर पर अनेक ऐसी संस्थाएं हैं जो विश्व सरकार का काम करती है लेकिन ये लोकतांत्रिक निर्णय नहीं लेती सभी समान सदस्य देशों को स्वतंत्रता और बराबरी की भागीदारी नहीं मिलती।

 

○ संयुक्त राष्ट्र का मामला

• संयुक्त राष्ट्र के सभी 193 सदस्य देश को संयुक्त राष्ट्र महासभा में एक-एक वोट मिला हुआ है।

• महासभा का स्वरूप काफी कुछ संसद की तरह है जिसमें सभी तरह की चर्चाएं होती है।

• इसकी बैठक सदस्य देशों के प्रतिनिधि द्वारा चुने गए अध्यक्ष की अगुवाई में हर साल चलती है।

• लेकिन विभिन्न देशों के बीच टकराव की स्थिति में महासभा कोई कार्रवाई नहीं कर सकती।

•संयुक्त राष्ट्र संघ परिषद के 20 सदस्य महत्वपूर्ण फैसले लेते हैं।

परिषद के पाँच स्थायी सदस्य हैं- अमेरिका, रूस, फ्रांस, ब्रिटेन, चीन।

• बाकी 15 सदस्यों का चुनाव आम सभा 2 वर्ष के लिए ही करती है।
• परंतु असली ताकत पाँच स्थायी सदस्यों के हाथ में ही होता है।

• इन स्थायी सदस्यों को वीटो का अधिकार मिला है अगर कोई स्थायी सदस्य देश इस अधिकार का प्रयोग करता है तो सुरक्षा परिषद उसकी मर्जी के ख…

 

○ अंतरराष्ट्रीय मुद्दा संगठन का मामला

• अंतरराष्ट्रीय संगठन दुनिया के किसी भी देश को उधार और ऋण देने वाली सबसे बड़ी संस्था है।
• इसके सभी 188 सदस्य देशों को समान मत अधिकार प्राप्त नहीं है।
• हर देश इस कोष में जितने धन का योगदान करता है उसी के अनुपात में उसे वोट का वजन भी तय होता है।
• मुद्रा कोष में 52% से अधिक वोटों पर सिर्फ दस देशों ( अमेरिका, जापान, जर्मनी, फ्रांस,ब्रिटेन,चीन, इटली, सऊदी अरब, कनाडा रूस) का अधिकार है।
• बाकी 178 देश इस संगठन के फैसले को प्रभावित करने की स्थिति में नहीं है।

 

○ विश्व बैंक का मामला

• विश्व बैंक में भी वोटिंग की ऐसी ही प्रणाली हैं

•विश्व बैंक का अध्यक्ष हमेशा कोई अमेरिकी नागरिक ही रहा है जिसका मनोनयन अमेरिका वित्तमंत्री करते हैं।

 

○ भारी समर्थन का सवाल

• इराक पश्चिमी एशिया का एक देश है जो 1932 में ब्रिटिश गुलामी से आजाद हुआ।

•बाथ पार्टी के नेता सद्दाम हुसैन ने 1968 में तख्तापलट में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी और उसी से यह पार्टी सत्ता में आई थी।
• इस सरकार ने पारंपरिक इस्लामी कानून को हटाया और औरतों को अनेक ऐसे अधिकार जो अन्य पश्चिमी देशों में कहीं नहीं दिए गए थे।

• 1979 में राष्ट्रपति बनने के बाद से सद्दाम हुसैन ने अपनी तानाशाही चलाई और शासन का विरोध करने वालों का सख्ती से दमन किया।

• अमेरिका और ब्रिटेन आदि उसके सहयोगी देशों ने आरोप लगाया कि इराक के पास गुप्त परमाणु हथियार है और जनसंहार के हथियार हैं और इनसे दुनिया को बहुत खतरा है।
• लेकिन जब संयुक्त राष्ट्र ने यह जांचने के लिए अपनी विशेषज्ञ टीम इराक भेजी तो उस टीम को ऐसेकोई हथियार नहीं मिले।

•फिर भी अमेरिका और उसके साथी देशों ने हमला किया और उस पर कब्जा कर लिया और सद्दाम हुसैन को सत्ता से हटा दिया ।
अमेरिका ने अपनी पसंद की अंतरिम सरकार बना ली।
और तर्क दिया जाता है कि देश में तानाशाही समाप्त करने के लिए लोकतांत्रिक सरकार की स्थापना के लिए यह महत्वपूर्ण था।

• इराक के खिलाफ युद्ध को सुरक्षा परिषद ने भी मंजूरी नही दी। संयुक्त राष्ट्र के महासचिव कॉफ़ी अन्नान ने भी कहा कि इराक के खिलाफ अमेरिकी युद्ध गैरकानूनी है।

 

 

 

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