अध्याय :- 6 हमारी आपराधिक न्याय प्रणाली

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आरोपी :- जब किसी व्यक्ति को गिरफ्तार किया जाता है तो अदालत ही तय करती है कि आरोपी वाकई दोषी है या नहीं।

 

संविधान के अनुसार , अगर किसी भी व्यक्ति पर कोई आरोप लगाया जाता है तो उसे निष्पक्ष सुनवाई के अधिकार होता है।

 

F I R एफ.आई.आर :– सबसे पहले प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कराई जाती है।

 

न्याय व्यवस्था :- पुलिस , सरकारी वकील , बचाव पक्ष का वकील और न्यायधीश , ये चार अधिकारी आपराधिक न्याय व्यवस्था में मुख्य लोग होते हैं।

अपराध की जाँच करने में पुलिस की क्या भूमिका होती है ?

पुलिस का एक महत्वपूर्ण काम होता है किसी अपराध के बारे में मिली शिकायत की जाँच करना।

जाँच के लिए गवाहों के बयान दर्ज किए जाते हैं और सबूत इकट्ठा किए जाते हैं।

सबूतों से आरोपी का दोष साबित दिखाई दे रहा है तो पुलिस अदालत में आरोपपत्र / चार्जशीट दाखिल कर देती है।

 

पुलिस हमेशा कानून के मुताबिक और मानवाधिकारों का सम्मान करते हुए जाँच करनी चाहिए। पुलिस को जाँच के दौरान किसी को भी सताने , पीटने या गोली मारने का अधिकार नहीं है।

आरोपी के आधिकार :- अनुच्छेद 22

1. गिरफ़्तारी के समय उसे यह जानने का अधिकार है कि गिरफ़्तारी किस कारण से की जा रही है।

2. गिरफ़्तारी के 24 घण्टो के भीतर मजिस्ट्रेट के सामने पेश होने का अधिकार।

3. गिरफ़्तारी के दौरान या हिरासत में किसी भी तरह के दुर्व्यवहार या यातना से बचने का अधिकार ।

4. 15 साल से कम उम्र के बालक और किसी भी महिला को केवल सवाल पूछने के लिए नहीं बुलाया जा सकता।

5. पुलिस हिरासत में दिए गए इकबालिया बयान को आरोपी के खिलाफ सबूत के तौर पर इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।

 

सरकारी वकील की क्या भूमिका होती है?

सरकारी वकील :- वह निष्पक्ष रूप से अपना काम करे और अदालत के सामने सारे ठोस तथ्य गवाह और सबूत पेश करे।

 

न्यायाधीश की भूमिका :- वे निष्पक्ष भाव से और खुली अदालत में मुकदमे का संचालन करते हैं। न्यायाधीश सारे गवाहों के बयान सुनते हैं और अभियोजन पक्ष तथा बचाव पक्ष की तरफ से पेश किए गए सबूतों की जाँच करते हैं। मौजूद बयानों व सबूतों के आधार पर अपना फैसला सुनाते हैं।

 

निष्पक्ष सुनवाई :- किसी भी व्यक्ति के जीवन या स्वतंत्रता को तर्कसंगत और न्यायपूर्ण कानूनी प्रक्रिया द्वारा निष्पक्ष सुनवाई सुनिश्चित की जाए।

 

प्रत्येक नागरिक चाहे वह किसी भी वर्ग , जाति , धर्म , और वैचारिक मान्यताओं के हो , उन्हें संविधान के माध्यम से निष्पक्ष सुनवाई के अधिकार दिया जाए।

 

 

 

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