अध्याय : 4 कानूनों की समझ

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कानून :- देश के सभी नागरिकों पर समान रूप से लागू होते हैं। कानून से ऊपर कोई व्यक्ति नहीं है।

 

हमारा कानून धर्म , जाति , और लिंग के आधार पर लोगों के बीच कोई भेदभाव नही करता।

प्राचीन भारत :- असंख्य स्थानीय कानून थे। अकसर एक जैसे मामले में कई तरह के स्थानीय कानून लागू होते थे।

 

औपनिवेशिक शासन :- कानून पर आधारित व्यवस्था जैसे-जैसे परिपक्व होती गई , जाति के आधार पर सजा देने में भेदभाव का यह चलन खत्म होने लगा।

 

औपनिवेशिक कानून :-भारत मे कानून के शासन की शुरुआत अंग्रेजों ने की थी।इसलिए मनमानेपन पर आधारित था।

 

1870 का संविधान अधिनियम :- अगर कोई भी व्यक्ति ब्रिटिश सरकार का विरोध या आलोचना करता था तो उसे मुकदमा चलाए बिना ही गिरफ्तार किया जा सकता था।

रॉलट एक्ट 1919 :- इस कानून के जरिए ब्रिटिश सरकार बिना मुकदमा चलाए लोगों जैल में दाल सकती थी।

 

हिंदू उत्तरधिकार संशोधन अधिनियम 2005 :– बेटे , बेटियाँ और उनकी माँ , तीनों को परिवार की संपति में बराबर हिस्सा मिल सकता हैं।

कानून किस तरह बनते हैं?

कानून बनाने में संसद की एक महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

संसद लोगों के सामने आ रही समस्याओं के प्रति संवेदनशील है।

संसद घरेलू हिंसा की रोकथाम के लिए कानून बनाती है।

 

घरेलू हिंसा :- जब परिवार का कोई पुरुष सदस्य ( आमतौर पर पति ) घर की किसी औरत ( आमतौर पर पत्नी ) के साथ मारपीट करता है, उसे चोट पँहुचाता है या मारपीट करता है। शारीरिक या भावनात्मक हो सकता है।

 

घरेलू हिंसा कानून 2005 :- महिलाओं की सुरक्षा के लिए कानून बनाया गया।

 

नागरिकों की आवाज :- टेलीविजन रिपोटों , अखबारों के संपादकीयों , रेडियो प्रसारणों और आम सभाओं के ज़रिए सुनी और व्यक्त की जा सकती है।

 

 अलोकप्रिय :- कई बार संसद एक ऐसा कानून पारित कर देती है जो बेहद अलोकप्रिय साबित होता है।

 

आलोचना :- तब लोग उस कानून को आलोचना कर सकते हैं, उसके खिलाफ जनसभाएँ कर सकते है, अखबारों में लिख सकते हैं , टी.वी. चैनलों में रिपोर्ट भेज सकते हैं।

 

दमनकारी कानून :- लोकतंत्र में आम नागरिक संसद द्वारा बनाए जाने वाले दमनकारी कानूनों के बारे में अपनी असहमति व्यक्त कर सकते हैं।
 

संशोधन :- यदि अदालत को ऐसा लगता है कि वह कानून संविधान के विरुद्ध है तो वह उसमें संशोधन कर सकती है या उसे रद्द कर सकती है।
 

नागरिकों की भूमिका :- निर्वाचित प्रतिनिधियों , अखबारों और अन्य संचार माध्यम , लोगों की भागीदारी और उत्साह से संसद को सही तरीके से कार्य करने में मदद करते हैं।

 

 

 

अध्याय : 5 न्यायपालिका 

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