आधुनिक इतिहास मध्य प्रदेश | (MODERN HISTORY OF MP )

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मध्य प्रदेश के इतिहास में आधुनिक युग का प्रारम्भ मराठों के उत्कर्ष एवं ईस्ट इण्डिया कम्पनी के आगमन के साथ हुआ। कालान्तर में सिन्धिया तथा होल्कर वंश ने इसमें महत्त्वपूर्ण योगदान दिया।

 

◇ मराठा वंश
• मध्य प्रदेश के खानदेश एवं गोण्डवाना क्षेत्र में मराठा शासकों ने आधिपत्य किया था। 1722 ई. में पेशवा बाजीराव प्रथम ने मालवा पर प्रथम बार आक्रमण किया था। 1724 ई. में इस भू-भाग पर चौथ वसूली को लेकर युद्ध किया था।
• 1737-38 ई. में पेशवा बाजीराव प्रथम व निजाम को एक सन्धि करनी पड़ी, जिसे दुरई की सन्धि कहते हैं।
• पानीपत के तृतीय युद्ध के बाद 1731 ई. में सिन्धिया व होल्कर वंश स्वतन्त्र हो गए।

 

 

◇ होल्कर वंश
• इस वंश का संस्थापक मल्हार राव होल्कर थे, जिसने 1732 ई. में इन्दौर (मालवा क्षेत्र) को राजधानी बनाया था।
• 1766 ई. में मल्हार राव की मृत्यु के पश्चात् मालेराव होल्कर शासक बना। 1767 से 1797 ई. तक अहिल्याबाई ने पेशवा की अनुमति से इन्दौर राज्य का प्रशासन सम्भाला।
• तुकोजी तृतीय के समय राज्य का भारत संघ में विलय कर दिया गया।

1732 ई. में मालवा में स्थापित हुए पाँच राज्य
राज्य                     वंश
ग्वालियर              –  सिन्धिया राजवंश
इन्दौर                  – होल्कर राजवंश
धार                     – आनन्द रांव पँवार वंश
देवास, बड़ी पान्ती – तुकोजी वंश
देवास, छोटी पान्ती- जीवाजी वंश

 

 

◇ सिन्धिया वंश

• ग्वालियर में सिन्धिया वंश के संस्थापक राणोजी सिन्धिया थे।
• इस वंश के सबसे प्रतापी शासक महादजी सिन्धिया ने तृतीय मराठा युद्ध में भाग लिया था। उन्होंने 1765 ई. में गोहद के जाट राणा लोकेन्द्र सिंह से ग्वालियर किला जीत लिया था।

• महादजी सिन्धिया ने दिल्ली पर कब्जा करके मुगल सम्राट शाह आलम को गुलाम कादिर के नियन्त्रण से मुक्त कराया, इसके बदले में सम्राट ने महादजी को अपना प्रधानमन्त्री नियुक्त कर सभी प्रशासनिक अधिकार दे दिए।
• 1794 ई. में दौलतराव सिन्धिया महादजी के उत्तराधिकारी बने ।

• 1810 ई. में ही दौलतराव सिन्धिया ने ग्वालियर को अपनी राजधानी बनाया। इससे पूर्व सिन्धिया वंश की राजधानी उज्जैन थी।
• इसके बाद जाकोजी (1827-43 ई.), जयाजीराव (1843-86 ई.), माधवराव (1886-1925 ई.) तथा जीवाजी राव शासक हुए।
• सिन्धिया वंश के राजा जीवाजी राव ने वर्ष 1948 में राज्य का भारत संघ में विलय किया तथा वे संयुक्त संघ पहले के राज प्रमुख बनाए गए।
• जीवाजी राव सिन्धिया का निवास स्थल जयविलास पैलेस वर्तमान में एक संग्रहालय के रूप में ग्वालियर में स्थित है।

 

☆ 1857 ई. की क्रान्ति एवं मध्य प्रदेश

• 1818 ई. में मध्य प्रदेश के महाकौशल क्षेत्र में सर्वप्रथम अंग्रेजों के विरुद्ध विद्रोह हुआ था, जिसका नेतृत्व नागपुर के शासक अप्पाजी भोंसले ने किया था।
• 1833 ई. में रामगढ़ नरेश जुझारु सिंह के पुत्र देवनाथ सिंह ने अंग्रेजों के विरुद्ध विद्रोह किया था।
• 1842 ई. में नरसिंहपुर के जमींदार दिल्हन शाह तथा हीरापुर के किरेनशाह ने अंग्रेजों के विरुद्ध विद्रोह किया।

 

मध्य प्रदेश में 1857 ई. की क्रान्ति के मुख्य बिन्दु

 

• 1857 के प्रथम स्वतन्त्रता संग्राम के समय मध्य प्रदेश में सबसे पहले विद्रोह नीमच छावनी में 3 जून, 1857 में हुआ।
कर्नल सोबर्स ने राजपूत सैनिकों की सहायता से इस विद्रोह को दबा दिया।
• तात्या टोपे एवं नाना साहेब के प्रयासों से सैनिकों, किसानों व ग्रामीणों के मध्य क्रान्ति सन्देश कमल एवं रोटी के माध्यम से पहुँचाया गया।
1857 ई. की क्रान्ति में सिन्धिया तथा भोपाल के नवाब ने अंग्रेजों का साथ दिया, जबकि होल्कर महाराजा ने गुप्त रूप से क्रान्तिकारियों को सहायता दी।

14 जून, 1857 को ग्वालियर के निकट मुरार छावनी में सैनिक विद्रोह हुआ। सैनिकों ने विद्रोह कर संचार व्यवस्था भंग कर दी।
• रानी दुर्गावती के वंशज शंकर शाह और उनके पुत्र ने गढ़ा मण्डला में स्वतन्त्रता के लिए विद्रोह किया।

• 20 जून, 1857 को शिवपुरी में विद्रोह हुआ। इसी समय महू छावनी में शहादत खान के नेतृत्व में विद्रोह हुआ एवं अंग्रेजी सेना को हार का सामना करना पड़ा।
• प्रथम स्वतन्त्रता संग्राम के समय मुगल शासक बहादुर शाह जफर के शहजादे हुमायूँ ने मन्दसौर में बलायती, देवती एवं सिन्धिया के कुछ सैनिकों की सहायता से एक स्वतन्त्र राज्य की स्थापना की तथा फिरोजशाह के नाम से मन्दसौर पर शासन किया।

• अंग्रेजों की हड़प नीति से नाराज मण्डला जिले की रामगढ़ रियासत की रानी अवन्तिबाई ने विद्रोह कर दिया।
20 मार्च, 1858 को अंग्रेज सेनापति वार्डन के साथ युद्ध में पराजय होता देख रानी अवन्तिबाई ने अपने प्राणों की आहूति दे दी।
रानी अवन्तिबाई को रामगढ़ की झाँसी की रानी के नाम से भी जाना जाता है।
• तात्या टोपे को सिन्धिया के सामन्त मानसिंह ने धोखे से पकड़वा दिया, जिसके पश्चात् इन्हें शिवपुरी में फाँसी दी गई।

 

1857 ई. की क्रान्ति के प्रमुख विद्रोही

विद्रोही                   सम्बन्धित स्थल
शेख रमजान         – सागर
टेण्टया भील         – खरगौन
शंकरशाह             – गढ़ा मण्डला
राजा ठाकुर प्रसाद – राघवगढ़
नारायण सिंह        – रायपुर
शहादत खान        – महू (इन्दौर)
रानी लक्ष्मीबाई     – झाँसी-काल्पी
तात्याँ टोपे           – कानपुर-झाँसी-ग्वालियर
भीमा नावक        – मण्डलेश्वर (उज्जैन)
रानी अवन्तिबाई   – रामगढ़
झलकारीबाई       – झाँसी (लक्ष्मीबाई की
अंगरक्षिका)
गिरधारीबाई        – रामगढ़ (अवन्तीबाई की
अंगरक्षिका)

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