बुद्धि सिद्धात एवं बहुआयामी बुद्धि | Multiple Intelligences Theory

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 ❍ बुद्धि ( Intelligence ) शब्द का प्रयोग सामान्यतः प्रज्ञा , प्रतिभा , ज्ञान एवं समझ इत्यादि के अर्थों में किया जाता है। यह वह शक्ति है , जो हमें समस्याओं का समाधान करने एवं उद्देश्यों को प्राप्त करने में सक्षम बनाती है।

 

❍ बुद्धि अंग्रेजी शब्द Intelligence का हिन्दी वर्जन है। Intelligence लैटिन भाषा का शब्द है जो कि लैटिन भाषा के दो शब्दों Inter एवं Legere से मिलकर बना है।बुद्धि के अर्थ के बारे में मनोवैज्ञानिकों के बीच मतभेद है, जिससे बुद्धि के किसी एक अर्थ में सहमति नहीं है।

 

❍ शिक्षा मनोविज्ञान (Education psychology) में बुद्धि के ऊपर सर्वाधिक कार्य किया गया है।

○ अमूर्त विचारों के बारे में चिंतन।

○बुद्धि जन्मजात शक्ति व योग्यता है।

○ तर्क , विर्तक , चिंतन , कल्पना की योग्यता।

○ बुद्धि पर वंशानुक्रम व वातावरण दोनों का प्रभाव पड़ता है।

 

 

○ 17 वी शताब्दी में , बुद्धि की परिभाषाएँ :-

○ बकिंघम के अनुसार – सीखने की शक्ति ही बुद्धि है।

○ वुडवर्थ के अनुसार – बुद्धि कार्य करने की एक विधि है।

○ टरमन के अनुसार – बुद्धि, अमूर्त विचारों के बारे में सोचने की योग्यता है।

○ विने के अनुसार – बुद्धि इन चार शब्दों में निहित है,- ज्ञान, अविष्कार, निर्देश और आलोचना।

 

○ 17वीं शताब्दी से ही दर्शन के साथ मनोविज्ञान के अध्ययन पर बुद्धि के स्वरूप संरचना प्रकार व सैद्धांतिक आधार की चर्चा प्रारंभ हो गई थी।

❍ बुद्धि के मुख्य तीन पक्ष :-
1. कार्यात्मक
2. संरचनात्मक
3. क्रियात्मक

 

❍ बुद्धि के प्रकार :- थॉर्नडाइक के अनुसार

○ मूर्त बुद्धि :- इस बुद्धि का सम्बन्ध यंत्रो व मशीनों से होता है।

○ अमूर्त बुद्धि :इस बुद्धि का सम्बन्ध पुस्तकीय ज्ञान से होता है।

○ सामाजिक बुद्धि :- सामाजिक अनुकूलनशीलता से होता है।

 

 

 

 

 

○बुद्धि के प्रकार :-

थॉर्नडाइक एवं गैरेट ने बुद्धि को तीन प्रकार में बाँटा है जो कि निम्नलिखित हैं–

1. अमूर्त बुद्धि : अमूर्त बुद्धि व्यक्ति की ऐसी बौद्धिक योग्यता जिसकी मदद से गणित, शाब्दिक, या सांकेतिक समस्याओं का समाधान किया जाता है।

अमूर्त बुद्धि का प्रयोग करके हम पढ़ने, लिखने एवं तार्किक प्रश्नों में करते हैं। कवि, साहित्यकार, चित्रकार आदि लोग अमूर्त बुद्धि से ही अपनी कला का प्रदर्शन करते हैं।

2. मूर्त या स्थूल बुद्धि:मूर्त या स्थूल बुद्धि के द्वारा व्यक्ति विभिन मूर्त या स्थूल बुद्धि के द्वारा व्यक्ति विभिन्न प्रकार की वस्तुओं का व्यावहारिक एवं उत्तम प्रयोग करने की क्षमता अर्जित करता है।

मूर्त बुद्धि को व्यावहारिक यान्त्रिक बुद्धि भी कहा जाता है। हम अपने दैनिक जीवन के ज्यादातर कार्य मूर्त बुद्धि की ही सहायता से करते हैं।

3. सामाजिक बुद्धि:–सामाजिक बुद्धि से तात्पर्य उन बौद्धिक योग्यताओं से जिसका उपयोग कर व्यक्ति सामाजिक परिवेश के साथ समायोजन स्थापित करने में करता है।

 

 

 

 

बुद्धि के सिद्धान्त :-
आज के समय में बुद्धि के अनेक सिद्धान्त प्रचलित हैं। बुद्धि के इस समय प्रचलित सिद्धान्तों में से प्रमुख सिद्धान्तों को नीचे दिया गया है जो कि निम्नलिखित हैं–

1.बुद्धि का एक-तत्त्व सिद्धान्त
2.बुद्धि का द्वि-तत्त्व सिद्धान्त
3.बुद्धि का बहु-तत्त्व सिद्धान्त
4.बुद्धि का समूह-तत्त्व सिद्धान्त
5.बुद्धि का प्रतिदर्श सिद्धान्त
6.बुद्धि का क्रमिक महत्त्व सिद्धान्त
7.बुद्धि का त्रि-आयाम सिद्धान्त

 

 

❍ बुद्धि के सिद्धांत :- कुछ मनोवैज्ञानिकों ने बुद्धि के स्वरूप से सम्बन्धित विभिन्न सिद्धान्तों का प्रतिपादन किया है।

 

❍ एकतत्व सिद्धांत :- एकतत्व सिद्धांत का प्रतिपादन अल्फ्रेड बीने ने 1911 में किया था। आगे बढ़ने का श्रेय टर्मन , स्टर्न को जाता है।

 

❍ द्वितत्व का सिद्धांत :- इस सिद्धांत के प्रतिपादन ‘ स्पियरमैन ‘ ने किया । दो प्रकार के मानसिक योग्यता
1. सामान्य तत्व :- जन्मजात
2. विशिष्ट तत्व :- अर्जित
 

❍ बहुतत्व सिद्धांत :- इस सिद्धांत के मुख्य समर्थक ‘ थॉर्नडाइक ‘ थे।

 

❍ थॉर्नडाइक :- व्यक्ति जितनी भी मानसिक क्रियाएँ करता है उतने तत्व बुद्धि के अन्तर्गत पाये जाते है।

❍ समूह तत्व सिद्धांत :- थर्स्टन (USA ) 1938 में समूह तत्व सिद्धांत का प्रतिपादित किया।

पुस्तक :- प्राथमिक मानसिक योग्यताएँ

 

❍ प्रतिदर्श सिद्धांत :- इस सिद्धांत का प्रतिपादन थॉमसन (USA) 1955 में किया था।

 

❍ गिल्फोर्ड का सिद्धांत :- 1967 गिल्फोर्ड (रूस ) ने पदानुक्रमिक सिद्धांत ( त्रि-आयामी ) भी कहा जाता हैं।

1. सक्रिय / प्रक्रिया :- समस्या समाधान के लिए व्यक्ति जिस मानसिक से गुजरता है।

2. विषय वस्तु / अंर्तवस्तु :- समस्या समाधान के लिए जिस सामग्री की आवश्यकता होती है।

3. उत्पादन / परिणाम :- समस्या समाधान के लिए जिस रूप में सूचनाएं प्राप्त होती है।

 

गिल्फोर्ड :- 1967 में डिब्बे के आकार का एक मॉडल प्रस्तुत किया जिसे बुद्धि संरचना मॉडल कहते हैं।

 ❍ हावर्ड गार्डनर का बहु-बुद्धि सिद्धांत : हावर्ड गार्डनर महोदय ने 1983 ई. में बुद्धि का एक नवीन सिद्धांत प्रतिपादित किया, जिसे गार्डनर का बहु-बुद्धि सिद्धांत के नाम से जाना जाता हैं।

1. भाषाई बुद्धि :- इस प्रकार की बुद्धि से भाषा सम्बन्धी का विकास होता है।

2. तार्किक गणितीय बुद्धि :- बुद्धि का यह अंग तार्किक योग्यता एवं गणितीय कार्यों से सम्बद्ध है।

3. स्थानिक बुद्धि :- इस तरह की बुद्धि का उपयोग अंतरिक्ष यात्रा के दौरान , मानसिक कल्पनाओं को चित्र का स्वरूप देने में किया जाता है।

4. शारीरिक गतिक बुद्धि :– इस प्रकार की बुद्धि का प्रयोग सूक्ष्म एवं परिष्कृत समन्वय के साथ शारीरिक गति से सम्बन्धित कार्यों में होता है- नृत्य , सर्कस , व्यायाम ।

5. संगीतिक बुद्धि :- इस प्रकार के ज्ञान का उपयोग संगीत के क्षेत्र में होता है।

6. अन्त: पारस्परिक बुद्धि :- इस प्रकार के ज्ञान का उपयोग सामाजिक व्यवहारों में प्रायः होता है।

7. अन्त: वैयक्तिक बुद्धि :- इस प्रकार की बुद्धि का प्रयोग आत्मबोध , पहचान तथा स्वयं की भावनाओं एवं कौशल क्षमता को जानना है।

8. प्राकृतिक बुद्धि :- इस प्रकार के ज्ञान का सम्बन्ध वनस्पति जगत , पेड़-पौधे , जीव-जन्तु या प्राणी समूह या प्राकृतिक सौन्दर्य को परखने इत्यादि में होता है।

 

❍ बहुआयामी बुद्धि :- एक ही व्यक्ति के अन्दर विभिन्न प्रकार के कौशलों का विकास अर्थात उसमें सामाजिक समझ , राजनैतिक समझ , समस्या समाधान से सम्बन्धित समझ तथा नेतृत्व का गुण इत्यादि का होना।

❍ केली के अनुसार :- बुद्धि का निर्माण इन योग्यताओं से होता है वाचिक योग्यता , गामक योग्यता , सांख्यिक योग्यता , यान्त्रिक सामाजिक योग्यता , संगीतात्मक योग्यता , स्थानिक सम्बन्धों के साथ उचित ढंग से व्यवहार करने की योग्यता , रुचि और शारीरिक योग्यता।

❍ थर्स्टन के अनुसार :- बुद्धि प्राथमिक मानसिक योग्यताओं का समूह होता है प्रत्यक्षीकरण सम्बन्धी योग्यता , तार्किक योग्यता , सांख्यिकी योग्यता , समस्या समाधान की योग्यता , स्मृति सम्बन्धी योग्यता ।

 

❍ मानसिक आयु एवं बुद्धि परीक्षण :- बुद्धि-परीक्षण के द्वारा व्यक्ति की विशेषताओं का पता लगाया जाता है।

 

○ सर्वप्रथम जर्मन मनोवैज्ञानिक ‘ वूंट ‘ का नाम आता है, जिसने वर्ष 1879 में बुद्धि के मापन के लिए मनोवैज्ञानिक प्रयोगशाला की स्थापना की।

○ फ्रांसीसी मनोवैज्ञानिक अल्फ्रेड बीने एवं उनके साथी साइमन ने बुद्धि के मापन का आधार बच्चों के निर्णय , स्मृति , तर्क एवं आंकिक जैसे मानसिक कार्यों को माना।

○1912 में सर्वप्रथमविलियम स्टर्न ‘ ने बुद्धि के मापन के लिए बुद्धि-लब्धि के प्रयोग का सुझाव दिया।

1916 में बुद्धि लब्धि का ज्ञात करने करने की विधी  बताई।

 

                           मानसिक आयु
          बुद्धि लब्धि = —————–100
                            वास्तविक आयु

 

 ○ मानसिक आयु : किसी व्यक्ति का बौद्धिक विकास अपने समान आयु वर्ग की तुलना में कितना हुआ है , इस मापन की विधि को मानसिक आयु कहते हैं।

उदाहरण :- यदि कोई 6 वर्ष का बालक 15 वर्ष के व्यक्ति के अनुसार दिमाग रखता है या सोचता है तो 15 वर्ष उस बालक की मानसिक आयु होगी ।

                      मानसिक आयु
बुद्धि-लब्धि =——————–100
                    वास्तविक आयु

 

 

 

○ वास्तविक आयु :- यह किसी भी मनुष्य की वास्तविक आयु होती है अर्थात वह कितने वर्ष का हो गया है।

 

○ उदाहरण :- यदि किसी बालक की मानसिक आयु 12 वर्ष और वास्तविक आयु 10 वर्ष है , तो उसकी बुद्धि -लब्धि की गणना निम्न प्रकार होगी ।

बुद्धि-लब्धि =               मानसिक आयु
            बुद्धि-लब्धि =  —————–100
                               वास्तविक आयु

 

 बुद्धि-लब्धि बुद्धि वर्ग

140 से अधिक  प्रतिभाशाली

90 से 109      सामान्य बुद्धि

70 से 79        कमजोर

70 से कम       मूर्ख ,

60 से कम       मूढ़

25 से कम       जड़

❍ बौद्धिक वृद्धि और विकास :- मस्तिष्क की परिपक्वता बौद्धिक वृद्धि को सवार्धिक प्रभावित करती हैं।

वेश्लर :– बौद्धिक वृद्धि कम-से-कम बीस वर्ष की आयु तक रहती है।

 

आधुनिक शोधों से यह पता चला है कि साठ वर्ष की आयु तक बुद्धि-लब्धि वृद्धि होती रहती है।

 

❍ संवेगात्मक बुद्धि :- अपनी तथा दूसरों की भावनाओं को जानने , समझने , तथा उनका उचित प्रबन्धन करने से है।

❍ संवेगात्मक बुद्धि की विशेषताएं :-

•संवेग क्षणिक होते है।

•संवेगों में तीव्रता होती है।

• संवेग अचानक उत्पन्न होते है।

•संवेग से मानसिक एवं शारीरिक परिवर्तन आते है।

•संवेगात्मक बुद्धि हमें बताते हैं कि कोई व्यक्ति जीवन में कितना सफल होगा।

 

❍ संवेगात्मक बुद्धि के तत्व
डैनियल गोलमैन (Daniel Goleman) में भावनात्मक बुद्धि के पांच तत्व बताये है जो निम्न है।

1. स्व-जागरूकता (Self-Awareness)
2. सामजिक जागरूकता (Social Awareness)
3. स्व नियमन (Self-Regulation)
4.आत्म अभिप्रेरण (Self-Motivation)
5.सहानुभूति या समवेदना (Empathy)

 

बुद्धि की विशेषताएँ एवं तथ्य

यहाँ पर बुद्धि की प्रमुख विशेषताओं के बारे में बताया गया है, जो कि निम्नलिखित हैं–

• बुद्धि मनुष्य की कई विशेषताओं और क्षमताओं को दर्शाता है।

• बुद्धि के सहारे ही व्यक्ति किसी समस्या के समाधान तक पहुँचता या पहुँचने का प्रयास करता है।

• बुद्धि व्यक्ति को वातावरण के समायोजन करने में मदद करती है।

• बुद्धि के सहारे ही व्यक्ति अपने उद्देश्य को पूरा करने के लिए उसके अनुरूप कार्य करता है, और निर्णय लेता है।

 

❍ शिक्षा में बुद्धि परीक्षण की भूमिका संपादित करें

शिक्षा के क्षेत्र में इन परीक्षणों की भूमिका असंदिग्ध है, जिसे निम्न रूप में देखा जा सकता है-

1.व्यक्तिगत विभिन्नताओं की जानकारी हेतु,
2.मंदबुद्धि बालकों की जानकारी हेतु,
3.बालकों के वर्गीकरण हेतु,
4 शैक्षिक मार्गदर्शन हेतु,
5.व्यवसायिक मार्गदर्शन हेतु,
6.व्यक्तित्व की जानकारी हेतु,
7.प्रतिभाशाली बालकों की पहचान हेतु,
8.अधिगम क्रिया के मार्गदर्शन के लिए,

 

बुद्धि लब्धि प्रतिशतता बुद्धि वर्ग
140 से ऊपर      1% प्रतिभाशाली
120 से 140       5% प्रखर/उत्कृष्ट
110 से 120      14% श्रेष्ठ
90 से 110        60% सामान्य/औसत
80 से 90        14% मन्द बुद्धि
70 से 80        5% क्षीण बुद्धि
50 से 70       1% मूर्ख
25 से 50       1% मूढ़
0 से 25        1% जड़ बुद्धि

 

प्रश्न- यदि राजू की मानसिक आयु 12 और वास्तविक आयु 10 है तो उसकी बुद्धि लब्धि कितनी होगी?

उत्तर– 120

 

 हल- बुद्धि लब्धि = (मानसिक आयु / वास्तविक आयु) × 100
बुद्धि लब्धि= (12/10)×100=12×10=120

प्रश्न- 0 से 25 वर्ग बुद्धि लब्धि वाले किस बुद्धि के कहलाएंगे?

उत्तर- जड़ बुद्धि

 

❍ बिने के बुद्धि-लब्धि परीक्षा प्रश्न
(Intelligence Test Questions of Binet)

❍ 3 वर्ष की आयु के लिये प्रश्न
1.तुम्हारी नाक, आँख और मुँह कहाँ है?
2.अंकों से बनी संख्या को दोहराना।
3.6 शब्दों से बने वाक्य को दोहराना।
4.अपना अन्तिम नाम बताइये।

❍ 4 वर्ष की आयु के लिये प्रश्न
1.तुम लड़की हो या लड़का।
2.तीन अंकों की संख्याओं को दोहरायें।
3 कुन्जी, चाकू और सिक्का दिखाकर, ये क्या है?

❍ 5 वर्ष की आयु के लिये प्रश्न
1.विभिन्न भार के बक्सों की तुलना करना।
2.वर्ग को दिखाकर उसे खिंचवाना।
3.धैर्य से खेल-खेलने को कहना।
4 .चार सिक्कों को गिनवाना।
5. 11 शब्द-खण्डों वाले वाक्य को दोहराना।

❍8 वर्ष की आयु के लिये प्रश्न
1.20 से 0 तक पीछे की ओर
2.गिनने को कहना।
3.दिन और तारीखों के नाम पूछना।
4.5 अंकों की बनी संख्या को दोहराना।
5.9 सिक्कों को गिनवाना।
6. 4 रंगों के नाम बताना।
7.किसी गद्य-खण्ड को पढ़वाना और दो बातों को याद रखने को कहना।

❍11 वर्ष की आयु के लिये प्रश्न
निरर्थक कथनों की आलोचना करवाना।
1.किसी वाक्य में तीन शब्द प्रयुक्त करवाना।
2. 3 मिनट में 60 शब्द कहलवाना।
3.अमूर्त वस्तुओं की परिभाषा करवाना।
4.किसी वाक्य के अव्यवस्थित 5.शब्दों को व्यवस्थित करवाना।

❍15 वर्ष की आयु के लिये प्रश्न
7 अंकों को दोहराना ।
1.एक मिनट में दिये हुए शब्द से 2. 3 प्रकार की लय निकलवाना !
3. 26 शब्दों से बने वाक्य को दोहराना।

 

❍ आईक्यू लेवल कैसे चेक करें (How to Check IQ Level In Hindi)

1. 2 Formula IQ Check करने का (intelligent quotient = mental age ÷ Physical age × 100) होता है।

2. 3 Example अगर आपकी real age (Chronological age) 15 साल है और आपकी mental age 20 साल है तो आपका आईक्यू intelligent quotient = 15 ÷ 20 × 100 = 75 होगा।

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