अध्याय 6 : जनसंख्या

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किसी भी देश के लिए मानव एक महत्वपूर्ण संसाधन होते हैं क्योंकि यह अन्य सभी प्रकार के संसाधनों का दोहन करते हैं मानव पृथ्वी के संसाधनों का उत्पादन एवं उपयोग करते हैं जनसंख्या का आकार एवं वितरण लोगों की जनसंख्या कितनी है तथा वह कहां निवास करते हैं

 

जनसंख्या वृद्धि तथा जनसंख्या परिवर्तन की प्रक्रिया समय के साथ जनसंख्या में वृद्धि एवं इसमें परिवर्तन कैसे हुआ जनसंख्या में गुण या विशेषताएं उनकी उम्र लिंगानुपात साक्षरता स्तर व्यावसायिक संरचना तथा स्वास्थ्य की अवस्था

 

जनसंख्या का आकार एवं वितरण

भारत की जनसंख्या का आकार एवं संख्या के आधार पर वितरण मार्च 2001 तक भारत की जनसंख्या 10280 लाख थी जो कि विश्व की कुल जनसंख्या का 16.7% है यह 10.2 करोड लोग भारत के 32.8 लाख वर्ग किलोमीटर के विशाल क्षेत्र में और समान रूप से वितरित हैं

2001 की जनगणना के अनुसार देश की सबसे अधिक जनसंख्या वाला राज्य उत्तर प्रदेश है जहां की कुल आबादी 1660 लाख है यहां इस राज्य में देश की 16% जनसंख्या निवास करती है

इसके विपरीत हिमालय क्षेत्र के राज्य सिक्किम की आबादी केवल 5 लाख ही है तथा लक्षदीप में केवल 60 हजार लोग निवास करते हैं

भारत की लगभग आधी आबादी केवल पांच राज्यों में निवास करती है उत्तर प्रदेश महाराष्ट्र बिहार पश्चिम बंगाल एवं आंध्र प्रदेशक्षेत्रफल की दृष्टि से सबसे बड़ा राज्य राजस्थान है जिसकी आबादी भारत की कुल जनसंख्या का केवल 5.5% है

 

 

घनत्व के आधार पर भारत में जनसंख्या वितरण

 

प्रति इकाई क्षेत्रफल में रहने वाले लोगों की संख्या को जनसंख्या घनत्व कहते हैं भारत विश्व के घनी आबादी वाले देशों में से एक है

2001 में भारत की जनसंख्या घनत्व 324 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर थी जहां पश्चिम बंगाल का जनसंख्या घनत्व 904 व्यक्ति प्रति किलोमीटर है वही अरुणाचल प्रदेश में 13 व्यक्ति प्रति किलोमीटर है

 

कम जनसंख्या घनत्व वाले राज्यों का मुख्य कारण है पर्वतीय क्षेत्र तथा प्रतिकूल जलवायु

असम एवं अधिकतर प्रायद्वीपीय राज्य का जनसंख्या घनत्व मध्यम है पहाड़ी कटे छठे एवं पथरीले भूभाग मध्य से कम वर्षा कम उपजाऊ मिट्टी इसका मुख्य कारण है

 

 

जनसंख्या वृद्धि एवं जनसंख्या परिवर्तन की प्रक्रिया

जनसंख्या एक परिवर्तनशील प्रक्रिया है आबादी की जनसंख्या वितरण एवं सघनता में लगातार परिवर्तन होता है यह परिवर्तन तीन प्रक्रियाओं जन्म मृत्यु एवं प्रवास के आपसी संयोजन के प्रभाव के कारण होता है

 

जनसंख्या वृद्धि

जनसंख्या वृद्धि का अर्थ होता है किसी विशेष समय अंतराल में किसी देश या राज्य के निवासियों की संख्या में परिवर्तन इस प्रकार के परिवर्तन को दो प्रकार से व्यक्त किया जा सकता है पहला सापेक्ष वृद्धि दूसरा प्रति वर्ष होने वाले प्रतिशत परिवर्तन के द्वारा

 

निरपेक्ष वृद्धि

प्रत्येक वर्ष या एक दशक में बढ़ती जनसंख्या कुल संख्या में वृद्धि का परिमाण है पहले की जनसंख्या को बाद की जनसंख्या से घटाकर इसे प्राप्त किया जाता है इसे निरपेक्ष वृद्धि कहते हैं

 

वार्षिक वृद्धि दर

जनसंख्या की वृद्धि का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू है इसका अध्ययन प्रति वर्ष प्रतिशत में किया जाता है जैसे प्रति वर्ष 2% वृद्धि की दर का अर्थ है कि दिए हुए किसी वर्ष की मूल जनसंख्या में प्रत्येक 100 व्यक्तियों पर दो व्यक्तियों की वृद्धि इसे वार्षिक वृद्धि दर कहा जाता है

 

भारत की आबादी 1991 में 3610 लाख से बढ़ कर 2001 में 10280 लाख हो गई

 

भारत की आबादी बहुत अधिक है जब विशाल जनसंख्या में कम वार्षिक दर लगाया जाता है तब इसमें सापेक्ष वृद्धि बहुत अधिक होती है भारत की वर्तमान जनसंख्या में वार्षिक वृद्धि 155 लाख है जो कि संसाधन एवं पर्यावरण के संरक्षण को निष्क्रिय करने के लिए पर्याप्त है वृद्धि दर में कमी जन्म दर नियंत्रण के लिए किए जा रहे प्रयासों की सफलता को प्रदर्शित करता है इसके बावजूद भारत की जनसंख्या की वृद्धि जारी है और 2045 तक भारत चीन को पीछे करके विश्व में सबसे अधिक जनसंख्या वाला देश बन जाएगा

 

 

जनसंख्या वृद्धि/परिवर्तन की प्रक्रिया

जन्म दर

1 वर्ष में प्रति हजार व्यक्तियों में जितने जीवित बच्चों का जन्म होता है उसे जन्म दर कहते हैं यह वृद्धि का एक प्रमुख घटक है क्योंकि भारत में हमेशा जन्म दर मृत्यु दर से अधिक रही है

 

मृत्यु दर

1 वर्ष में प्रति हजार व्यक्तियों में मरने वालों की संख्या को मृत्यु दर कहा जाता है मृत्यु दर में तेज गिरावट भारत की जनसंख्या में वृद्धि की दर का मुख्य कारण है

 

प्राकृतिक वृद्धि

जन्म दर एवं मृत्यु दर के बीच का अंतर जनसंख्या की प्राकृतिक वृद्धि है

 

प्रवास

जनसंख्या वृद्धि का तीसरा घटक है प्रवास लोगों का एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में चले जाने को प्रभास कहते हैं प्रभास आंतरिक या अंतरराष्ट्रीय हो सकता है

आंतरिक प्रवास जनसंख्या में कोई परिवर्तन नहीं लाता लेकिन यह एक देश के भीतर जनसंख्या के वितरण को प्रभावित करता है

 

भारत में अधिकतर प्रवास ग्राम से शहर क्षेत्र की और होता है क्योंकि ग्रामीण क्षेत्र में आकर्षण कारक प्रभावी होते हैं यह ग्रामीण क्षेत्र में गरीबी एवं बेरोजगारी की प्रतिकूल अवस्थाएं हैं तथा नगर का अभिकर्षक प्रभाव रोजगार में वृद्धि एवं अच्छे जीवन स्तर को दर्शाता है

 

प्रभास जनसंख्या परिवर्तन का एक महत्वपूर्ण घटा क्या यह केवल जनसंख्या के आकार को ही प्रभावित नहीं करता बल्कि उम्र एवं लिंग की दृष्टिकोण से नगरीय एवं ग्रामीण जनसंख्या की संरचना को भी परिवर्तित करता है

 

 

आयु संरचना

 

देश में जनसंख्या की आयु संरचना वहां के विभिन्न आयु समूह के लोगों की संख्या को बताता है यह जनसंख्या की मूल विशेषताओं में से एक है एक व्यक्ति की आयु उसकी इच्छा खरीदारी तथा काम करने की क्षमता को पर्याप्त रूप से प्रभावित करती है परिणाम स्वरूप बच्चे व्यस्त एवं वृद्ध की संख्या एवं प्रतिशत किसी भी क्षेत्र की आबादी को सामाजिक एवं आर्थिक दृष्टि से निर्धारित होती है

 

किसी भी राष्ट्र की आबादी को सामान्यतः तीन वर्गों में बांटा जाता है

 

बच्चे (15 वर्ष से कम)

यह आर्थिक रूप से उत्पादनशील नहीं होते हैं तथा इनको भोजन वस्त्र एवं स्वास्थ्य संबंधित सुविधाएं उपलब्ध कराने की आवश्यकता होती है

 

व्यस्त (15 से 59 वर्ष)

यह आर्थिक रूप से उत्पादनशील तथा जैविक रूप से प्रभाव शेर होते हैं यह जनसंख्या का कार्यशील वर्ग है

 

वृद्ध (59 वर्ष से अधिक)

यह आर्थिक रूप से उत्पादनशील अवकाश प्राप्त हो सकते हैं यह स्वैच्छिक रूप से कार्य कर सकते हैं लेकिन भर्ती प्रक्रिया के द्वारा इनकी नियुक्ति नहीं होती

 

 

लिंग अनुपात

प्रति 1000 पुरुषों पर महिलाओं की संख्या को लिंग अनुपात कहा जाता है यह जानकारी किसी दिए गए समाज में समाज में पुरुषों एवं महिलाओं के बीच समानता की सीमा मापने के लिए एक महत्वपूर्ण सामाजिक सूचक है

 

साक्षरता दर

साक्षरता किसी जनसंख्या का बहुत ही महत्वपूर्ण गुण है स्पष्टतः केवल एक शिक्षित और जागरूक नागरिक ही बुद्धिमतापूर्ण निर्णय ले सकता है तथा शोध एवं विकास के कार्य कर सकता है साक्षरता स्तर में कमी आर्थिक मैं एक गंभीर बाधा है

 

2001 की जनगणना के अनुसार एक व्यक्ति जिसकी आयु 7 वर्ष या उससे अधिक है जो किसी भी भाषा में लिख या पड़ सकता है उसे साक्षरता की श्रेणी में रखा गया है

2001 की जनगणना के अनुसार देश की साक्षरता दर 64.84% है जिसमें पुरुषों की साक्षरता दर 75.26% है महिलाओं की 53.67% है

 

 

व्यावसायिक संरचना

आर्थिक रूप से क्रियाशील जनसंख्या का प्रतिशत विकास का एक महत्वपूर्ण सूचक होता है विभिन्न प्रकार के व्यवसाय के अनुसार किए गए जनसंख्या के वितरण को व्यावसायिक संरचना कहा जाता है

 

व्यवसाय को सामान्य रूप से प्राथमिक द्वितीय एवं तृतीयक श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है

 

प्राथमिक इसमें कृषि पशुपालन वृक्षारोपण एवं मछली पकड़ना तथा खनन आदि क्रिया शामिल है

द्वितीयक क्रियाकलापों में उत्पादन करने वाले उद्योग भवन एवं निर्माण कार्य आते हैं

तृतीय क्रियाकलापों में परिवहन संचार वाणिज्य प्रशासन तथा सेवाएं शामिल है

 

विकसित देशों में द्वितीय एवं तृतीय क्रियाकलापों में कार्य करने वाले लोगों की संख्या का अनुपात अधिक होता है विकासशील देशों में प्राथमिक क्रियाकलापों में कार्यरत लोगों का अनुपात अधिक होता है भारत में कुल जनसंख्या का 64% भाग केवल कृषि कार्य करता है द्वितीय एवं तृतीय क्षेत्र को में कार्यरत लोगों की संख्या का अनुपात क्रमशः 13 तथा 20% है वर्तमान समय में बढ़ते हुए औद्योगीकरण एवं शहरीकरण में वृद्धि होने के कारण द्वितीय एवं तृतीय क्षेत्र में व्यवसायिक परिवर्तन हुआ है

 

 

स्वास्थ्य

स्वास्थ्य जनसंख्या की संरचना का एक महत्वपूर्ण घटक है जो कि विकास की प्रक्रिया को प्रभावित करता है सरकारी कार्यक्रमों के निरंतर प्रयास के द्वारा भारत की जनसंख्या में स्वास्थ्य स्तर में महत्वपूर्ण सुधार हुआ है औसत आयु जो कि 1951 में 36.7 वर्ष थी बढ़कर 2001 में 64.6 वर्ष हो गई है

महत्वपूर्ण सुधार बहुत से कार्य को जैसे जन स्वास्थ्य संक्रामक बीमारियों से बचाव एवं रोगों के इलाज में आधुनिक तकनीकों के प्रयोग के परिणाम स्वरूप हुआ है महत्वपूर्ण उपलब्धियों के बावजूद भारत के लिए स्वास्थ्य का स्तर एक बहुत बड़ा चिंता का विषय है

 

 

किशोर जनसंख्या

भारत की जनसंख्या का सबसे महत्वपूर्ण लक्षण इसकी किशोर जनसंख्या का आकार है यह भारत की कुल जनसंख्या का पांचवा भाग है किशोर प्राय 10 से 19 वर्ष की आयु वर्ग के होते हैं यह भविष्य में सबसे महत्वपूर्ण मानव संसाधन है

 

किशोरों के लिए पोषक तत्व की आवश्यकता बच्चों तथा व्यस्को से अधिक होती है कुपोषण से इनका स्वास्थ्य खराब तथा विकास अवरोधित हो सकता है परंतु भारत में किशोर को प्राप्त भोजन में पोषक तत्व पर्याप्त होते हैं इसलिए इस क्षेत्र में सरकार को अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है तथा इनके लिए शिक्षा एक महत्वपूर्ण आवश्यकता है

 

 

राष्ट्रीय जनसंख्या नीति

परिवारों के आकार को सीमित रख कर एक व्यक्ति के स्वास्थ्य एवं कल्याण को सुधारा जा सकता है इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार ने 1952 में एक व्यापक परिवार नियोजन कार्यक्रम को प्रारंभ किया

राष्ट्रीय जनसंख्या नीति 2000 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों को निशुल्क शिक्षा प्रदान करने शिशु मृत्यु दर को प्रति 1000 में 30 से कम करने व्यापक स्तर पर टीका रोधी बीमारियों से बच्चों को छुटकारा दिलाने लड़कियों की शादी की उम्र को बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित कर दे तथा परिवार नियोजन को एक जन केंद्रित कार्यक्रम बनाने के लिए नीतिगत ढांचा प्रदान करती है

 

 

राष्ट्रीय जनसंख्या नीति 2000 और किशोर

राष्ट्रीय जनसंख्या नीति 2000 में किशोर की पहचान जनसंख्या के उस वर्ग के रूप में की जिस पर बहुत ज्यादा ध्यान देने की आवश्यकता है

इस नीति में किशोरों के लिए शिक्षा स्वास्थ्य यौन जागरूकता मुद्दे बाल विवाह कानून जैसे मुद्दों पर ध्यान दिया गया किसी भी राष्ट्र के लिए वहां के लोग बहुमूल्य संसाधन होते हैं एक शिक्षित एवं स्वास्थ्य जनसंख्या ही कार्य श्रम शक्ति प्रदान करती है

 

 

 

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