अध्याय 5 : संस्थाओं का कामकाज | Functioning of Institutions

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विधायिका संसद लोकसभा राज्यसभा। कार्यपालिका राष्ट्रपति प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद तथा नौकरशाही न्यायपालिका सर्वोच्च उच्च जिला फ़ौजदारी और दीवानी

 

❍ संस्थाओं के कामकाज :-
प्रधानमंत्री और कैबिनेट ऐसी संस्थाएं हैं जो सभी महत्वपूर्ण नीतिगत फैसले करती हैं। मंत्रियों द्वारा किए गए फैसले को लागू करने के उपायों के लिए एक निकाय के रूप में नौकरशाह जिम्मेदार होते हैं। सर्वोच्च न्यायालय वह संस्था है, जहाँ नागरिक और सरकार के बीच विवाद अंततः सुलझाये जाते हैं।

• राष्ट्रपति देश का प्रमुख होता है।

• प्रधानमंत्री सरकार का प्रमुख होता है।

• प्रधानमंत्री की सिफारिश पर राष्ट्रपति मंत्रियों को नियुक्त करता है।

• मंत्रिमंडल की बैठकों में ही राजकाज से जुड़े अधिकतर निर्णय लिए जाते हैं

• प्रधानमंत्री और कैबिनेट ऐसी संस्थाएँ हैं जो सभी महत्वपूर्ण नीतिगत फ़ैसले करती हैं।

• मंत्रियों द्वारा किए गए फ़ैसले को लागू करने उपायों के लिए एक निकाय के रूप में नौकरशाह जिम्मेदार होते हैं।

• सर्वोच्च न्यायालय वह संस्था है, जहाँ नागरिक और सरकार विवाद अंततः सुलझाए जाते हैं।

 

❍ संसद :- संसद भारत का सर्वोच्‍च विधायी निकाय है।

भारतीय संसद में राष्‍ट्रपति तथा दो सदन – राज्‍य सभा (राज्‍यों की परिषद) एवं लोकसभा (लोगों का सदन) होते हैं।

 

○ संसद की आवश्यकता:-

1. किसी भी देश में कानून बनाने का सबसे बड़ा अधिकार संसद को होता है। कानून बनाने या विधि निर्माण का यह काम इतना महत्व होता है कि इन सभाओं को विधायिका का कहते हैं

2. दुनिया भर में संसद सरकार चलाने वालों को नियंत्रित करने के लिए कुछ अधिकारों का प्रयोग करती है। भारत जैसे देश में उसे सीधा और पूर्ण नियंत्रण हासिल है। संसद के पूर्ण समर्थन की स्थिति में ही सरकार चलाने और फैसले कर सकते हैं।

3. सरकार के हर पैसे पर संसद का नियंत्रण होता है। अधिकांश देशों में संसद की मंजूरी के बाद ही सार्वजनिक पैसे को खर्च किया जा सकता है।

4. सार्वजनिक मसलों और किसी देश की राष्ट्रीय नीति पर चर्चा और बहस के लिए संसद ही सर्वोत्तम संघ है। संसद किसी भी मामले में सूचना मांग सकती हैं।

5. संसद कानून बना सकती है, मौजूदा कानूनों में संशोधन कर सकती है या मौजूदा कानून को खत्म कर उसकी जगह नए कानून बना सकती हैं।

 

 

लोकसभा एवं राज्यसभा में अंतर :-

लोकसभा राज्यसभा
 1 इसके सदस्य आम जनता द्वारा वयस्क मतदान की प्रक्रिया के तहत चुने जाते हैं|1 इसके सदस्य राज्य विधान सभा के निर्वाचित सदस्यों द्वारा चुने जाते हैं|
2 लोक सभा का कार्यकाल 5 वर्षों का होता है2 यह एक स्थायी सदन है जिसके एक-तिहाई सदस्य प्रत्येक दो साल बाद रिटायर हो जाते हैं
3 इसकी अधिकतम सदस्य संख्या 552 है3 इसकी अधिकतम सदस्य संख्या 250 है
4 धन विधेयक को केवल लोकसभा में ही पेश किया जा सकता है। यह सदन देश में शासन चलाने हेतु धन आवंटित करता है4 धन विधेयक के संबंध में राज्यसभा को अधिक शक्तियां प्राप्त नहीं है
5 केन्द्रीय मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से लोकसभा के प्रति उत्तरदायी होती है5 केन्द्रीय मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से राज्यसभा के प्रति उत्तरदायी नहीं होती है
6 लोकसभा के बैठकों की अध्यक्षता लोकसभा अध्यक्ष करते हैं6 राज्यसभा की बैठकों की अध्यक्षता उप-राष्ट्रपति करते हैं 
7 इसे निचला सदन या आम जनता का सदन कहा जाता है7 इसे ऊपरी सदन या ‘राज्यों की परिषद्’ कहा जाता है
8 भारत के राष्ट्रपति इस सदन में आंग्ल-भारतीय समुदाय के 2 सदस्यों को मनोनीत कर सकते हैं8 भारत के राष्ट्रपति इस सदन में कला, शिक्षा, समाजसेवा एवं खेल जैसे क्षेत्रों से संबंधित 12 सदस्यों को मनोनीत कर सकते हैं
9 लोकसभा का सदस्य बनने के लिए न्यूनतम आयु-सीमा 25 वर्ष है9 राज्यसभा का सदस्य बनने के लिए न्यूनतम आयु-सीमा 30 वर्ष

 

 

 

❍ कार्यपालिका :- कार्यपालिका राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मंत्रीपरिषद , नौकरशाही आदि।

○ राजनैतिक कार्यपालिका सरकार का वह अंग है जो विधायिका का द्वारा बनाये गए नीतियों और कानूनों को लागू करने के लिए जिम्मेदार है।

○ स्थायी कार्यपालिका का अर्थ व्यक्तियों के उस समूह से है जो कायदे – कानूनों को संगठन में रोजाना लागू करते हैं

जो लोग सरकार की कल्याणकारी नीतिया जनता तक पहुँचने के लिए उत्तरदायी होते है उन्हें स्थायी कार्यपालिका कहते है। या वे सरकारी लोग रोज़ – रोज़ के प्रशासन के लिए उत्तरदायी होते हैं , उन्हें स्थायी कार्यपालिका कहते हैं।

सरकार के प्रधान और उनके मंत्रियों को राजनीतिक कार्यपालिका कहते हैं और वे सरकार की सभी नीतियों के लिए उत्तरदायी होते हैं।

 

 

○ मंत्रिपरिषद और मंत्रिमंडल में अंतर

 

मंत्रिपरिषदमंत्रिमंडल
1.इसमें मंत्रियों की तीन श्रेणियां– कैबिनेट मंत्री, राज्य मंत्री एवं उपमंत्री होती है।1.इसमें केवल कैबिनेट मंत्री शामिल होते हैं. अतः यह मंत्रिपरिषद का एक भाग है।
2.यह सरकारी कार्यों हेतु एक साथ बैठक नहीं करती है। इसका कोई सामूहिक कार्य नहीं है।2.यह एक निकाय की तरह है। यह सामान्यतः हफ्ते में एक बार बैठक करती है और सरकारी कार्यों के संबंध में निर्णय करती है। इसके कार्यकलाप सामूहिक होते हैं।
3.इसे सैद्धान्तिक रूप से सभी शक्तियां प्राप्त है।3.यह वास्तविक रूप में मंत्रिपरिषद की शक्तियों का प्रयोग करती है और सरकारी उसके लिए कार्य करती है।
4.इसके कार्यों का निर्धारण मंत्रिमंडल करती है।4.यह राजनैतिक निर्णय लेकर मंत्रिपरिषद को निर्देश देती है तथा ये निर्देश सभी मंत्रियों पर बाध्यकारी होते हैं।
5.यह मंत्रिमंडल के निर्णयों को लागू करती है।5.यह मंत्रिपरिषद द्वारा अपने निर्णयों के अनुपालन की देखरेख करती है।
6.यह सामूहिक रूप से संसद के निचले सदन-‘लोकसभा’ के प्रति उत्तरदायी होती है।6.यह संसद के निचले सदन-‘लोकसभा’ के प्रति मंत्रिपरिषद की सामूहिक जिम्मेदारी को लागू करती है।
7.यह एक बड़ा निकाय है जिसमें 60 से 70 मंत्री होते हैं।7.यह एक लघु निकाय है जिसमें 15 से 20 मंत्री होते हैं।
8 इसका विस्तृत विवरण संविधान के अनुच्छेद 74 तथा 75 में किया गया है। यह एक संवैधानिक निकाय है।8.इसे संविधान के अनुच्छेद 352 में 1978 के 44वें संविधान संशोधन अधिनियम द्वारा शामिल किया गया था।।” इसके कार्यों एवं शक्तियों का वर्णन संविधान में नहीं किया गया है।

 

 

 

 

○ संघ की कार्यपालिका एवं राज्य की कार्यपालिका में अंतर :-

 

संघ की कार्यपालिकाराज्य की कार्यपालिका 
1.राष्ट्रपति   1. राज्यपाल
2.उपराष्ट्रपति 2.उपराज्यपाल
3.प्रधानमंत्री  3. मुख्यमंत्री
4.मंत्रिपरिषद    4.मंत्रिपरिषद
5.महान्यायवादी  5.महान्यायवादी

 

 

 

○ राष्ट्रपति :- भारत के राष्ट्रपति, भारत गणराज्य के कार्यपालक अध्यक्ष होते हैं। संघ के सभी कार्यपालक कार्य उनके नाम से किये जाते हैं। अनुच्छेद 53 के अनुसार संघ की कार्यपालक शक्ति उनमें निहित हैं। वह भारतीय सशस्त्र सेनाओं का सर्वोच्च सेनानायक भी हैं। सभी प्रकार के आपातकाल लगाने व हटाने वाला, युद्ध/शान्ति की घोषणा करने वाला होता है। वह देश के प्रथम नागरिक हैं। भारतीय राष्ट्रपति का भारतीय नागरिक होना आवश्यक है।

• राष्ट्रपति को भारत के संसद के दोनो सदनों (लोक सभा और राज्य सभा) तथा साथ ही राज्य विधायिकाओं (विधान सभाओं) के निर्वाचित सदस्यों द्वारा पाँच वर्ष की अवधि के लिए चुना जाता है।

 

• भारत के मुख्य न्यायाधीश , सर्वोच्च न्यायालय और राज्य के उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों , राज्यपालों, चुनाव आयुक्तों और दूसरे देशों में राजदूत आदि को नियुक्ति करता है।

• सभी अंतरराष्ट्रीय संधियाँ और समझौते राष्ट्रपति के नाम से होते हैं।भारत के रक्षा बलों का सुप्रीम कमांडर राष्ट्रपति होता है।

• राष्ट्रपति अधिकारों का इस्तेमाल मंत्रिपरिषद की सलाह पर ही करता है। राष्ट्रपति मंत्रिपरिषद को अपनी सलाह पर पुनर्विचार करने के लिए कह सकता है।

• लोकसभा में बहुमत वाली पार्टी या गठबंधन के नेता को प्रधानमंत्री नियुक्त करता है।

 

○ प्रधानमंत्री :-प्रधानमंत्री एक राजनैतिक पद होता है, जिसके पदाधिकारी पर सरकार की कार्यकारिणी का संचालन करने का भार होता है। सामान्यतः, प्रधानमंत्री अपने देश की संसद का सदस्य भी होता है।

• मंत्री नियुक्त करने हेतु अपने दल के सदस्यों के नाम राष्ट्रपति को सुझाता है।

• वह मंत्री परिषद् की बैठक की अध्यक्षता भी करता है और अपनी मर्जी के हिसाब से निर्णय बदल भी सकता है।

• वह सभी मंत्रियों की गतिविधियों को नियंत्रित और निर्देशित भी करता है।

 

○ न्यायपालिका :- भारत की स्वतंत्र न्यायपालिका का शीर्ष सर्वोच्च न्यायालय है, जिसका प्रधान प्रधान न्यायाधीश होता है। सर्वोच्च न्यायालय को अपने नये मामलों तथा उच्च न्यायालयों के विवादों, दोनो को देखने का अधिकार है। भारत में 25 उच्च न्यायालय हैं। जिला या अधीनस्थ न्यायालय।

 

 न्यायपालिका के प्रकार

1. सर्वोच्च न्यायालय

2.उच्च न्यायालय

3.अधीनस्थ न्यायालय या निचली अदालतें या लोक अदालत

 

न्यायपालिका की प्रमुख भूमिका यह है कि वह ‘कानून के शासन’ की रक्षा और कानून की सर्वोच्चता को सुनिश्चित करे। न्यायपालिका व्यक्ति के अधिकारों की रक्षा करती है,विवादों को कानून के अनुसार हल करती है और यह सुनिश्चित करती है कि लोकतंत्र की जगह किसी एक व्यक्ति या समूह की तानाशाही न ले ।

 

• फौजदारी कानून :-मामले आपराधिक कानून के अंतर्गत उठाए गए कानूनी मामले होते हैं। दंडनीय अपराध; चोट, जख्म, हत्या जैसे मामले एक पार्टी द्वारा दूसरी पार्टी से किया गया अपराध हैं, परंतु इन्हें सार्वजनिक अपराध माना जाता है। सार्वजनिक अधिकारों और कर्तव्यों का उल्लंघन सार्वजनिक गलती होती है, जो पूरे समुदाय को प्रभावित करती है।

 

• दीवानी कानून :- मामला वो है जिसमें संपत्ति सम्बन्धी या पद सम्बन्धी अधिकार विवादित हो, चाहे ऐसा विवादित अधिकार धार्मिक कृत्यों या कर्मों सम्बन्धी प्रश्नों पर अवलम्बित क्यों न हो. ऐसा वाद दीवानी वाद या मुकदमा कहलाता है. धारा जो अंग्रेजी में ‘सेक्शन’ कहलाती है. धारा अधिनियम का महत्वपूर्ण हिस्सा है.

 

 

 

अध्याय 6 : लोकतांत्रिक अधिकार 

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