अध्याय 8: कोशिका संरचना एवं प्रकार्य | Cell Structure and Function

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कोशिका किसे कहते है | सिद्धांत । संरचना |प्रकार |भाग | खोज ? आप पहले ही पढ़ चुके हैं कि हमारे आस-पास की वस्तुएँ या तो सजीव है या निर्जीव। सभी सजीव कुछ मूलभूत कार्य संपादित करते हैं।

 

 ❍ कोशिका :- रॉबर्ट हुक ने 1665 में बोतल की कार्क की एक पतली परत के अध्ययन के आधार पर मधुमक्खी के छत्ते जैसे कोष्ठ देखे और इन्हें कोशा नाम दिया। यह तथ्य उनकी पुस्तक माइक्रोग्राफ़िया में छपा। राबर्ट हुक ने कोशा-भित्तियों के आधार पर कोशा शब्द प्रयोग किया।1831 में रॉबर्ट ब्राउन ने कोशिका में ‘केंद्रक एवं केंद्रिका’ का पता लगाया।कोई भी संरचना फिर वह सजीव है या निर्जीव उसे बनाने में सूक्ष्म संरचनाओं का योगदान होता है।

 सजीवों के शरीर की रचनात्मक और क्रियात्मक इकाई है और प्राय: स्वत: जनन की सामर्थ्य रखती है। यह विभिन्न पदार्थों का वह छोटे-से-छोटा संगठित रूप है जिसमें वे सभी क्रियाएँ होती हैं जिन्हें सामूहिक रूप से हम जीवन कहतें हैं।

• भवन निर्माण के लिए ईट एवं सजीवों में कोशिका , दोनों ही मूलभूत संरचनात्मक इकाई है।
• भवन निर्माण में एकसमान ईंटों का प्रयोग होता है परंतु उनकी आकृति , डिजाइन एवं साइज अलग-अलग होते हैं।

• इसी प्रकार सजीव जगत के जीव एक-दूसरे से भिन्न होते हुए भी कोशिकाओं के बने होते हैं।
• ईंट की अपेक्षा सजीवों की कोशिकाओं की संरचना अधिक जटिल होती हैं।

 

 ○ सजीवों में विभिन्नता :- पृथ्वी पर लाखों जीव जिनके अंगों की आकृति , साइज़ एवं कोशिकाओं की संख्या में भी भिन्नता होती हैं।

 

○ कोशिकाओं की संख्या

• एक कोशिका जीव :- ये जीव सिर्फ एक कोशिका से बने होते हैं।

जैसे – अमीबा , जीवाणु आदि। अमीबा भोजन का अंतर्ग्रहण करता तथा पचता है और श्वसन , उत्सर्जन , वृद्धि एवं प्रजनन भी करता है।

 

 ○ बहुकोशिका जीव :- ये जीव जिनका शरीर एक से अधिक कोशिकाओं से बना होता है ।

जैसे – कवक , जानवर आदि। बहुकोशिका जीव भी भोजन , श्वसन , उत्सर्जन , वृद्धि एवं प्रजनन कोशिकाओं का समूह द्वारा संपादित किए जाते है।

 

○ कोशिका की आकृति 

• अमीबा एक पूर्ण विकसित जीव है जिसका स्वतंत्र अस्तित्व है। यह आकृति बदलता रहता है।

• मनुष्य के रक्त में पाई जाने वाली श्वेत रक्त कोशिकाएँ (WBC) भी एक -कोशिकीय संरचना जो अपनी आकृति बदल सकती हैं।

 

○ कोशिका सामान्यत:
1. गोलाकार रक्त कोशिकाएँ
2. तर्करूपी पेशी कोशिका
3. लम्बी शाखान्वित तंत्रिका कोशिका।

 

○ कोशिका का साइज़ :-

• सजीवों में कोशिका का साइज़ 1 मीटर का 10 लाखवें भाग ( माइक्रोमीटर अथवा माइक्रोन) के बराबर छोटा हो सकता है अथवा कुछ सेंटीमीटर लंबा हो सकता है।

• अधिकतर कोशकाएँ अति सूक्ष्मदर्शिय होती हैं एवं नग्न आँखों से दिखाई नही देती।

 • जीवाणु कोशिका की सबसे छोटी कोशिका का साइज़ 0.1 से 0.5 माइक्रोमीटर है ।

• शुतुरमुर्ग का अंडा सबसे बडी कोशिका जिसका साइज़ 170 mm × 130 mm होता है।

 

○ कोशिका संरचना एवं प्रकार्य :- किसी तंत्र में प्रत्येक अंग अलग-अलग प्रकार्य करता है।

जैसे- पाचन , स्वांगीकरण तथा अवशोषण

• पादप अंग भी विशिष्ट या विशेष प्रकार्य करते हैं।
जैसे- जड़ , जल एवं खनिजों के अवशोषण में सहायता करती हैं।

• प्रत्येक अंग पुनः छोटे भागों से बना होता है जिसे ऊतक कहते हैं।

• ऊतक एकसमान कोशिकाओं का वह समूह है जो एक विशिष्ट प्रकार्य करता है।

• अंग ऊतक के बने होते हैं और ऊतक कोशिकाओं से बने होते हैं। सजीव की संरचनात्मक इकाई कोशिका है।

 

 ○ कोशिका के भाग :- कोशिका के मूल घटक हैं –

• कोशिका झिल्ली :- विभिन्न पदार्थों के कोशिका में आवागमन का नियमन करती हैं।
प्याज की कोशिका की सीमा।

 

• कोशिका द्रव्य :- केन्द्रक एवं कोशिका झिल्ली के मध्य एक जेली के समान पदार्थ होता है जिसे कोशिका द्रव्य कहते हैं।

• कोशिका भित्ति :- पौधों में कोशिका झिल्ली के अतिरिक्त एक बाहरी मोती परत होती है, जिसे कोशिका भित्ति कहते है।

• कोशिका द्रव्य में माइटोकांड्रीया , गाल्जिकाय , राइबोसोम इत्यादि।

• केन्द्रक झिल्ली में एक छोटी सघन संरचना दिखाई देती है जिसे न्यूक्लिओलस कहते है।

• इसके अतिरिक्त केन्द्रक में धागे के समान संरचनाएँ होती है जिसे क्रोमोसोम अथवा गुणसूत्र कहलाते है।

 

○ प्रोकैरियोटिक कोशिका :- ऐसी कोशकाएँ जिनमें केन्द्रक झिल्ली के बिना होता है।

उदाहरण – जीवाणु और नीले-हरे शैवाल।

 

○ यूकैरियोटिक कोशिका :- ऐसी कोशकाएँ जिसमें कोशिकाओं में झिल्ली युक्त सुसंगठित केन्द्रक पाया जाता है।

उदाहरण – सभी जन्तु कोशिका , जीवजंतु , प्रोटोजोआ

 

○ प्लैस्टिड :- रंगीन संरचनाएँ जिन्हें प्लैस्टिड कहते है। ये केवल पादप कोशिका में पाई जाती हैं।

• हरे रंग के प्लैस्टिड्स जिनमें क्लोरोफिल पाया जाता है , जिसे क्लोरोप्लास्ट कहते है।

 

• रिक्तिका :- पादप कोशिका में एक बड़ी केन्द्रीय रिक्तिका होती हैं।

 

★ जीन:-
जीनों को पैत्रिक गुणों का वाहक माना जाता है। क्रोमोसोम या पितृसूत्रों का निर्माण हिस्टोन प्रोटीन तथा डिऑक्सीराइबोन्यूक्लिक ऐसिड DNA तथा राइबोन्यूक्लिक ऐसिड RNA से मिलकर हुआ होता है। जीन का निर्माण इन्हीं में से एक, डी॰ एन॰ ए॰ द्वारा होता है। कोशिका विभाजनों के फलस्वरूप जब नए जीव के जीवन का सूत्रपात होता है, तो यही जीन पैतृक एवं शरीरिक गुणों के साथ माता पिता से निकलकर संततियों में चले जाते हैं। यह आदान प्रदान माता के डिंब (ovum) तथा पिता के शुक्राणु (sperms) में स्थित जीनों के द्वारा संपन्न होता है।

 

 

 

अध्याय 9 जंतुओं में जनन | Reproduction in Animals

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