अध्याय : 6 मानव संसाधन

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लोग ही एक राष्ट्र के सबसे बड़े संसाधन होते हैं। प्रकृति की देन केवल उस समय महत्वपूर्ण होती है जब वह लोगों के लिए उयोगी होती है। लोग अपनी आवश्यकताओं और योग्यताओं से उसे संसाधन में परिवर्तित कर देते हैं। इस प्रकार मानव संसाधन ही अंतिम संसाधन है।

जनसंख्या का वितरण :- भूपृष्ठ जिस प्रकार लोग फैले हैं, उसे जनसंख्या वितरण का प्रतिरूप कहते हैं। विश्व की जनसंख्या का 90 प्रतिशत से अधिक भाग भूपृष्ठ के लगभग 30 प्रतिशत भाग पर निवास करता है। जनसंख्या का वितरण अत्यंत आसमान है। कुछ क्षेत्र बहुत घने बसे हैं और कुछ विरल बसे क्षेते हैं।

 

विश्व के घनी आबादी वाले देश :-
1. चीन
2. भारत
3. यू.एस.ए.
4. इंडोनेशिया
5. ब्राजील
6. पाकिस्तान
7. बांग्लादेश
8. नाइजीरिया
9. रूस
10. जापान

 

विश्व की वर्तमान जनसंख्या 7.7 अरब है।

 क्षेत्रफल के अनुसार विश्व के 10 सबसे बड़े देश

1. रूस

क्षेत्रफल: 17,075,400 वर्ग कि.मी

2. कनाडा

क्षेत्रफल: 9,984,670 वर्ग कि.मी

3. संयुक्त राज्य अमरीका

क्षेत्रफल: 9,826,675 वर्ग कि.मी

4. चीन

क्षेत्रफल: 9,598,094 वर्ग कि.मी

5. ब्राज़ील

क्षेत्रफल: 8,514,877 वर्ग कि.मी

6. ऑस्ट्रेलिया

क्षेत्रफल: 7,617,930 वर्ग कि.मी

7. भारत

क्षेत्रफल: 3,287,263 वर्ग कि.मी

 

विश्व की कुल जनसंख्या के लगभग तीन-चौथाई लोग दो महाद्विपों एशिया और अफ्रीका में रहते हैं।
विश्व के 60 प्रतिशत लोग केवल दस देशों में रहते हैं। इन सभी देशों में 10 करोड़ से अधिक लोग रहते हैं।

 उच्च अक्षांशीय क्षेत्रों , उष्णकटिबन्धीय मरुस्थलों , उच्च पर्वतों , विषुवतीय वनों के क्षेत्रों में बहुत कम लोग रहते हैं। और दक्षिण और दक्षिण-पूर्वी एशिया , यूरोप और उत्तर-पूर्वी उत्तर अमेरिका घने बसे क्षेत्र है।

भारत मे जनसंख्या का औसत घनत्व 324 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर है।

 

जनसंख्या का घनत्व :- पृथ्वी पृष्ठ के एक इकाई क्षेत्र में रहने वाले लोगों की संख्या को जनसंख्या का घनत्व कहते हैं। सामान्य रूप से यह प्रतिवर्ग किलोमीटर में व्यक्त किया जाता है।संपूर्ण विश्व का औसत जनसंख्या घनत्व 45 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर है। सबसे अधिक जनसंख्या घनत्व दक्षिण मध्य एशिया में है , इसके पश्चात क्रमशः पूर्वी एशिया एवं दक्षिण पूर्वी एशिया में है

 

 जनसंख्या वितरण को प्रभावित करने वाले कारक

भौगोलिक कारक :-
स्थलाकृति :- लोग मैदानी भागों में ही रहना पसंद करते हैं क्योंकि ये क्षेत्र खेती , विनिर्माण और सेवा क्रियाओं के लिए उपयुक्त होते हैं।

जलवायु :- लोग सामान्य जलवायु में रहना ज्यादा पसंद करते है।

मृदा :- उपजाऊ मृदाएँ कृषि के लिए उपयुक्त भूमि प्रदान करती हैं। भारत – गंगा मैदान ।

जल :- लोग उन क्षेत्रों में रहने को प्राथमिकता देते हैं जहाँ अलवणीय जल आसानी से उपलब्ध होता है।

खनिज :- खनिज निक्षेपों वाले क्षेत्र अधिक बसे हुए हैं। अफ्रीका में हीरे की खानें ।

 

सामाजिक , संस्कृतिक और आर्थिक कारक

सामाजिक कारक :- अच्छे आवास , शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं के क्षेत्र अत्यधिक घने बसे हैं , उदहारण के लिए पुणे ।

संस्कृतिक कारक :- धर्म और सांस्कृतिक महत्ता वाले स्थान लोगों को आकर्षित करते हैं। उदाहरण के लिए वाराणसी ।

आर्थिक कारक :- औद्योगिक क्षेत्र रोजगार के अवसर प्रदान करते हैं। लोग बड़ी संख्या में इन क्षेत्रों की ओर आकर्षित होते हैं। उदाहरण के लिए मुबंई ।

 

 जीवन प्रत्याशा :- यह उन वर्षों की संख्या है जिसमें औसत व्यक्ति के जीवित रहने की आशा की जा सकती है।

जनसंख्या परिवर्तन :- जनसंख्या परिवर्तन से तात्पर्य एक निश्चित अवधि के दौरान लोगों की संख्या में परिवर्तन से है।
जन्म और मृत्यु की संख्या में परिवर्तन के कारण है। 1800 में विश्व की जनसंख्या एक अरब हो गयी थी। 150 वर्षों बाद 1950 के प्रारंभ में विश्व की जनसंख्या 3 अरब पहुंच गई । इसे प्रायः जनसंख्या विस्फोट कहते हैं। 1999 में , 50 वर्ष में कई अवधि से कम में जनसंख्या दुगुनी 6 अरब ही गई। इसका मुख्य कारण खाद्य आपूर्ति एवं औषधियों के कारण मृत्यु दर कम होना है। जबकि जन्म दर अभी भी बहुत अधिक रही।

 जन्मदर :- प्रति 1000 व्यक्तियों पर जीवित जन्मों की संख्या में मापा जाता है।

मृत्युदर :- प्रति 1000 व्यक्तियों पर मृतकों की संख्या में मापा जाता है।

प्रवास :- किसी क्षेत्र विशेष में लोगों के आने-जाने को प्रवास कहते हैं।

 

प्राकृतिक वृद्धि :- जन्म और मृत्यु जनसंख्या परिवर्तन के प्राकृतिक कारण हैं।

उत्प्रवासी :– वे लोग होते हैं जो देश को छोड़ते हैं।

आप्रवासी :- वे लोग होते हैं जो देश मे आते हैं।

 

प्रवास के कारण :-  रोजगार , शिक्षा , स्वास्थ्य , सुविधा

जनसंख्या परिवर्तन के प्रतिरूप :- जनसंख्या वृद्धि की दर विश्व मे अलग-अलग है। केन्या में जनसंख्या वृद्धि दर ऊँची है। उन देशों में जन्म दर और मृत्यु दर दोनों ही उच्च हैं।  यूनाइटेड किंगडम में निम्न जन्मदर और मृत्यु दर के कारण जनसंख्या वृद्धि की दर मंद है।

 

जनसंख्या संघटन :- एक संसाधन के रूप में लोगों की भूमिका को समझने के लिए हमें उनके गुणों के बारे में जानने की आवश्यकता होती है। लोग अपनी आयु , लिंग , साक्षरता स्तर , स्वास्थ्य दशाओं , व्यवसाय और आय के स्तर पर एक-दूसरे से भिन्न होते हैं। लोगों की इन विशेषताओं के बारे में जानना आवश्यक है। जनसंख्या संघटन की संरचना को दर्शाता है।

 जनसंख्या संघटन हमारी यह जानने में सहायता करता है कि कितने पुरूष हैं और कितनी स्त्रियाँ हैं , वे किस आयु वर्ग के हैं, कितने शिक्षित हैं और वे किस प्रकार के व्यवसाय में लगे हैं, उनकी आय का क्या स्तर है और स्वास्थ्य दशाएँ कैसी हैं।

 

 जनसंख्या पिरामिड :– एक देश जनसंख्या संघटन का अध्ययन करने की एक रुचिकर विधि ‘ जनसंख्या पिरामिड ‘ है जिसे आयु लिंग पिरामिड भी कहते हैं। एक जनसंख्या पिरामिड दर्शाता है
– कुल जनसंख्या विभिन्न आयु वर्गों में विभाजित है , उदाहरणार्थ 5 से 9 वर्ष , 10 से 14 वर्ष
– कुल जनसंख्या का प्रतिशत इन वर्गों में से प्रत्येक वर्ग में पुरुष और स्त्रियाँ उपविभाजित हैं।

1. 15 से कम आयु के युवा आश्रित है।
2. 65 वर्ष से अधिक आयु के लोग वृद्ध आश्रित है।
3. 15-65 आयु वर्ग कार्यरत है जो सक्रिय वर्ग में है।

 

 एक देश की जनसंख्या पिरामिड जिसमें जन्म दर और मृत्यु दर दोनों ही ऊँचे हैं, आधार पर चौड़ा है और ऊपर तीव्रता से सँकरा हो जाता है । ऐसा इसलिए है कि बच्चे जन्म लेते हैं उनमें से अधिकतर की मृत्यु शैशव काल मे ही हो जाती है कुछ ही बड़े हो पाते है।

 जिन देशों में मृत्यु दर ( विशेष रूप से बहुत छोटे बच्चों में ) कम हो रहा है युवा आयु वर्ग का पिरामिड चौड़ा है क्योंकि शिशु प्रौढ़ावस्था तक जीवित रहते हैं। यह भारत के पिरामिड में दृषिटगोचर होता है ।

इस प्रकार की जनसंख्या में युवा सापेक्षत: अधिक हैं इसका अर्थ मज़बूत और वर्धमान बढ़ती हुई श्रम शक्ति है।

 कुशल , उत्साही , आशावादी और सकारात्मक दृष्टि जैसे युवा जन किसी राष्ट्र के भविष्य होते हैं। हम भारतवासी भाग्यशाली हैं कि हमारे पास एक ऐसा संसाधन है। उन्हें योग्य एवं उत्पादक बनाने के लिए कुशल बनाने और अवसर प्रदान करने के लिए अवश्य ही शिक्षित किया जाना चाहिए।

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