अध्याय : 8 हाशियाकरण से निपटना

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हम यह समझने की कोशिश करेंगे की विभिन्न समूहों और व्यक्तियों ने असमानता से निपटने के लिए क्या-क्या तरीके अपनाए हैं।

 

आज हमारे देश के आदिवासी , दलित , मुसलमान , औरतें एवं अन्य हाशियाई समूह यह दलील दी रहे हैं कि

एक लोकतांत्रिक देश का नागरिक होने के नाते उन्हें भी बराबर के अधिकार मिलना चाहिए और

उनके अधिकारों की रक्षा होनी चाहिए।

 

मौलिक अधिकारों का उपयोग :- यह हमारे संविधान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। ये अधिकार सभी को भारतीयों को

समान रूप से उपलब्ध होते हैं।

 

 हाशियाई तबकों के अधिकार :-

पहला :- अपने मौलिक अधिकारों पर ज़ोर देकर उन्होंने सरकार को अपने साथ हुए अन्याय पर ध्यान देने के लिए मजबूर किया है।

दूसरा :- उन्होंने इस बात के लिए दबाव डाला है कि सरकार इन कानूनों को लागू करें।

तीसरा :-कई बार हाशियाई तबकों के संघर्ष की वजह से ही सरकार को मौलिक अधिकारों की भावना के अनुरूप नए कानून बनाने पड़े हैं।

 

संविधान में 

अनुच्छेद 17 – अस्पृश्यता या छुआछूत का उन्मूलन किया जा चुका है।

अनुच्छेद 15 – किसी भी नागरिक के साथ धर्म , नस्ल , जाति , लिंग या जन्मस्थान के आधार पर भेदभाव नही किया जाएगा।

 

अल्पसंख्यक ने भी संविधान में दिए गए मौलिक अधिकारों का सहारा लिया है।

हाशियाई तबकों के लिए कानून :- हमारे देश मे हाशियाई तबकों के लिए खास कानून और नीतियाँ बनाई गई हैं।

सामाजिक न्याय को प्रोत्साहन :- संविधान को लागू करने के लिए राज्य और केंद्र सरकारें जनजातीय आबादी वाले या

भारी दलित आबादी वाले इलाकों में विशेष प्रकार की योजनाएँ लागू करती हैं।

 जैसे :- मुक्त छात्रावास , मुक्त शिक्षा आदि

 

आरक्षण :- शिक्षा संस्थानों और सरकारी नौकरियों में दलितों व आदिवासियों के लिए सीटों का

आरक्षण का कानून एक महत्वपूर्ण तर्क पर आधारित है।
 

आरक्षण नीति :- अनुसूचित जाति ( या दलितों ) अनुसूचित जनजाति और पिछड़ी व अतिपिछड़ी

जातियों की अपनी अपनी सूचियाँ हैं। कॉलेज , नौकरी , संस्थानों में आरक्षण मिलता है।

 

हाशियाई तबकों के अधिकारों की रक्षा :- दलितों और आदिवासी समुदाय को भेदभाव और शोषण बसे बचाने

के लिए नीतियों के अलावा हमारे देश में कई कानून भी बनाए गए हैं।
:

अधिनियम 1989 :- अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के साथ हो रहे अत्याचार , दुव्र्यवहार और अपमान पर रोक लगाने के लिए ठोस करवाई करे।

 पहला : शारीरिक रूप से खौफ़नाक और नैतिक रूप से निंदनीय अपमान के स्वरूपों की सूची दी गई है।

दूसरा :- इसमें ऐसे कृत्यों की सूची भी है जिसके जरिए दलितों और आदिवासियों को उनके संसाधनों से वंचित नही किया जायेगा।

तीसरा : अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति की किसी भी महिला का अपमान या शोषण नही कर सकते हैं।

 

हाशियाई तबकों की माँगे :- 1989 का अधिनियम एक और वज़ह से महत्वपूर्ण है।

1.जमीन पर कब्जा करने पर कानून का सहारा ले सकते हैं।

2.विस्थापन करने पर मुआवजा दिया गया।

3.विस्थापितों को पुनर्वास और खर्चा दिया गया।

4.संवैधानिक रूप से आदिवासियों की जमीन को किसी गैर-आदिवासी व्यक्ति को नही बेचा जा सकता।

5.आदिवासीयों के संवैधानिक कानूनों का उल्लंघन करने वालों में विभिन्न प्रदेशों की सरकारें भी पीछे नहीं है।

 

 

अध्याय-9 जनसुविधाए

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