कृषि सिंचाई | Agricultural Irrigation UP GK

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कृषि सिंचाई एवं विभिन्न योजनाएं:-

उत्तर प्रदेश में कृषि गन्ना उत्पादन, कॉलोनाइजेशन ,कृषि अनुसंधान कृषि शिक्षा, उद्यान एवं फलोपयोग तथा कृषि विषणन के कार्यों के लिए ‘कृषि विभाग’ की स्थापना 1 मई 1920 को की गई थी | इसके पश्चात 1974 में कृषि विभाग में से गन्ना उत्पादन, कोलोनाइजेशन ,कृषि अनुसंधान एवं कृषि विश्वविद्यालय ,कानपुर को कृषि विभाग से अलग कर दिया गया

 

अप्रैल 1974 से उद्यान एवं आयोग को एक अलग विभाग का रूप दे दिया गया और इस प्रकार कृषि विभाग से उद्यान एवं फल उपयोग विभाग भी अलग विभाग भी अलग कर दिया गया | इसके पश्चात 1976 में ‘कृषि विपणन विभाग ‘एवं ‘ मंडी परिषद’ को भी प्रदेश में स्वतंत्र विभाग के रूप में कार्य करने के लिए स्थापित किया गया |

 

वर्तमान में कृषि विभाग के अतिरिक्त प्रदेश में कृषि से संबंधित कार्य के लिए उत्तर प्रदेश तराई बीज विकास निगम, कृषि औद्योगिक निगम ,भूमि सुधार निगम तथा राज्य बीज प्रमाणीकरण संस्था कार्यरत है, जो प्रदेश में विभिन्न कृषि निवेशो के उत्पादन तथा वितरण ए कृषि से संबंधित अन्य कार्यों में संलग्न है तथा कृषि विभाग अन्य संस्थाओं के माध्यम से प्रदेश में कृषि उत्पादन बढ़ाने में योगदान दे रही हैं |

 

उत्तर प्रदेश में प्रति वर्ष प्रमुख रूप से तीन फसलें पैदा की जाती हैं जो इस प्रकार हैं :

(1). रबी की फसल :- इतने प्रमुख रूप से गेहूं ,जौ ,मटर ,चना, तंबाकू ,सरसों आलू ,लाही आदि फसलें आती हैं |

(2). खरीफ की फसल :- इसमें प्रमुख रूप से मक्का, ज्वार -बाजरा ,चावल , कपास, गन्ना, सनई, दलहन आदि फसलें आती हैं |

(3). जायद की फसल :- इसमें तंबाकू, ककड़ी ,तरबूज, खरबूजा, प्याज ,काशीफल ,आलू आदि फसलें आती हैं |

 

 

प्रमुख फसलें

1. गेहूं :- उत्तर प्रदेश में गेहूं साधारणतः नवंबर -दिसंबर में बोया जाता है तथा अप्रैल मई के महीने में पछुआ हवाओं के कारण तापमान में होने वाली अचानक वृद्धि के कारण पक जाता है इसके पश्चात गेहूं की कटाई कर ली जाती है प्रदेश के उत्तरी पर्वतीय और दक्षिण के पहाड़ी व पठारी क्षेत्र में सबसे अधिक गेहूं का उत्पादन किया जाता है

उत्तर प्रदेश में मेरठ, बुलंदशहर ,सहारनपुर ,अलीगढ़ आगरा, मुरादाबाद,मुजफ्फरनगर इटावा, कानपुर ,फतेहपुर ,फर्रुखाबाद, आदि जिलों का लगभग एक -तिहाई कृषि क्षेत्र गेहूं उत्पादन करता है | यहां सिंचाई का प्रबंध गंगा, यमुना, तथा शारदा नदियों से निकलने वाली नहरों से होता है

प्रदेश के पूर्वी और उत्तर- पूर्वी जिलों में वर्षा की अधिकता के कारण गेहूं का उत्पादन कम होता है | हरदोई ,बहराइच, गोंडा, बस्ती ,खीरी आदि जिलों में भी गेहूं पैदा किया जाता है प्रदेश का गेहूं उत्पादन में देश में प्रथम स्थान है |

 

2. चावल :- चावल उत्पादन की दृष्टि से उत्तर प्रदेश संपूर्ण भारत का महत्वपूर्ण प्रदेश है | यहां संपूर्ण देश का 12.77 चावल पैदा होता है | पीलीभीत, सहारनपुर ,बहराइच, देवरिया ,गोंडा ,गोरखपुर ,बस्ती, वाराणसी ,लखनऊ, बलिया और रायबरेली आदि उत्तर प्रदेश के चावल उत्पादक जिले हैं |

प्रदेश में चावल का उत्पादन प्रमुख रूप से हरित क्रांति के बाद तेज गति से बड़ा है, जब अनेक नई किस्म के विकसित बीजों का उपयोग किया गया | प्रदेश के पूर्वी भागों में तराई वाले क्षेत्रों में वर्षा ऋतु में जल भराव की समस्या चावल की दृष्टि के लिए वरदान सिद्ध हुई है |

इस समय यह प्रदेश चावल उत्पादक राज्यों से अधिक मात्रा में चावल का उत्पादन कर रहा है | धान की रोपाई जून-जुलाई में और कटाई अक्टूबर-नवंबर में की जाती है |

 

3. जौ :- उत्तर प्रदेश जौ के उत्पादन में भारत अग्रणी है | प्रदेश में जौ कि कृषि प्रमुख शुष्क और कांप मिट्टी वाले क्षेत्रों में की जाती है |क्योंकि इसकी कृषि के लिए अधिक श्रम की आवश्यकता नहीं है ,इस कारण प्रदेश के अधिक भूभाग में इसकी कृषि की जाती है गोरखपुर, इलाहाबाद ,प्रतापगढ़, बलिया, गाजीपुर ,आजमगढ़, जौनपुर ,वाराणसी ,आदि जिलों में जौ कि कृषि की जाती है |

 

4. बाजरा :- उत्तर प्रदेश में बाजरे की कृषि प्रमुख रूप से उन क्षेत्रों में होती है जिनकी जलवायु शुष्क होती है और जहां सामान्यतः 50 सेंटीमीटर से कम वर्षा होती है |थोड़ी वर्षा और सिंचाई से भी इसको पैदा कर लिया जाता है | इसकी बुवाई मई से जुलाई के बीच होती है तथा कटाई सितंबर से दिसंबर तक होती है | आगरा ,बदायूं ,मथुरा, अलीगढ़ ,मुरादाबाद, शाहजहांपुर, कानपुर ,गाजीपुर, फर्रुखाबाद ,एटा, मैनपुरी, प्रतापगढ़, शाहजहांपुर, आदि जिलों में बाजरे की पैदावार की जाती है

 

5. चना :- उत्तर प्रदेश में चने का उत्पादन कम मात्रा में होता है |झांसी, ललितपुर ,कानपुर ,जालौन , बांदा, हमीरपुर, फतेहपुर ,सीतापुर, आगरा, इलाहाबाद, तथा बाराबंकी आदि जिलों में चना पैदा किया जाता है | इसकी कृषि के लिए हल्की दोमट तथा शुष्क मिट्टी की आवश्यकता होती है |

 

6. मक्का :- उत्तर प्रदेश में मक्के की कृषि वर्षा पर आधारित है | इसकी बुवाई मई-जून में होती है और अगस्त सितंबर में इसे काटा जाता है | मक्का का उपयोग अब खाने के अतिरिक्त
स्टऻर्च, शरबत और ग्लूकोज आदि बनाने में भी किया जाता है | मक्का का उत्पादन उत्तर प्रदेश में मेरठ ,बुलंदशहर बहराइच ,गोंडा ,फर्रुखाबाद ,जौनपुर, एटा ,मैनपुरी, जिलों में किया जाता है |

 

7. अरहर :- उत्तर प्रदेश में झांसी इलाहाबाद ,ललितपुर, वाराणसी, लखनऊ आदि अरहर के प्रमुख उत्पादक जिले हैं | प्रदेश में अरहर की कृषि प्रमुख रूप से ज्वार बाजरा आदि फसलों के साथ की जाती है |

 

8. गन्ना :- गन्ना उत्पादन की दृष्टि से उत्तर प्रदेश भारत का प्रथम राज्य है | देश का लगभग 45 प्रतिशत गन्ना इसी देश में पैदा किया जाता है | गन्ना उत्पादन के उत्तर प्रदेश में दो प्रमुख क्षेत्र हैं- पहला तराई क्षेत्र और दूसरा गंगा यमुना का दोआब क्षेत्र |

रामपुर, पीलीभीत ,बरेली, सीतापुर ,खीरी, लखीमपुर, आजमगढ़ ,फैजाबाद ,गोंडा, जौनपुर बलिया ,बस्ती, गोरखपुर और देवरिया आदि जिले तराई क्षेत्र के अंतर्गत आते हैं |

मेरठ ,मुजफ्फरनगर, बुलंदशहर, सहारनपुर, अलीगढ़ ,और मुरादाबाद आदि जिले दोआब क्षेत्र के अंतर्गत आते हैं | बांदा ,जालौन और हमीरपुर जिलों में भी कुछ मात्रा में गन्ने का उत्पादन किया जाता है |

 

9. सरसों :- उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर, कानपुर ,सीतापुर ,गोंडा ,बहराइच ,एटा, मेरठ ,फैजाबाद ,सहारनपुर, इटावा, अलीगढ़, बुलंदशहर ,और मथुरा आदि जिलों में सरसों का उत्पादन किया जाता है | सरसों उत्पादन में राज्य का देश भर में महत्वपूर्ण स्थान है यह गेहूं और चना और मटर के साथ उगाई जाती है और अलग से भी इसकी खेती की जाती है|


10. मूंगफली :-
उत्तर प्रदेश के सीतापुर, हरदोई, बदायूं, एटा और मुरादाबाद आदि जिलों में मूंगफली की पैदावार की जाती है यह जून-जुलाई में बोई जाती है और नवंबर दिसंबर तक इसकी खुदाई की जाती है शुष्क भूमि की फसल होने के कारण इसकी फसल प्राप्त करने में ज्यादा समय लगता है |

 

11. कपास :– रूहेलखंड और बुंदेलखंड मंडलों में तथा गंगा यमुना दोआब आदि उत्तर प्रदेश के जिलों में सिंचाई के सहारे कपास की कृषि की जाती है | प्रदेश में लंबे रेशे के कपास कम मात्रा में और छोटे रेशे के कपास अधिक मात्रा में उगाई जाती है | मेरठ, मुजफ्फरनगर ,बुलंदशहर ,अलीगढ़, आगरा ,कानपुर, इटावा, बरेली, रामपुर, मथुरा, मुरादाबाद ,मैनपुरी,फर्रुखाबाद और सहारनपुर आधी उत्तर प्रदेश के जिलों में कपास उगाई जाती है |

यहां यू.पी देशी ,धौलेरा, बंगाल कि कपास और अमेरिकन किस्म की कपास उगाई जाती है प्रदेश में मूंग, बरसीम, टोरिया, क्लोवर और मेथी आदि के साथ कपास की कृषि की जाती है |

इसे जून-जुलाई में बोया जाता है और अक्टूबर-नवंबर तक पौधों से कपास की चुनाई कर ली जाती है |

 

12. जूट :- उत्तर प्रदेश के अधिकांश भागों में देसी किस्म की जूट की कृषि होती है |प्रदेश के तराई, क्षेत्र सरयू और घाघरा नदियों के दोआब में जूट पैदा की जाती है | सीतापुर, लखीमपुर, खीरी ,बहराइच, गोंडा और देवरिया आदि जिलों में जूट का उत्पादन किया जाता है प्रदेश में अप्रैल-मई में जूट की बुआई की जाती है और अगस्त सितंबर में इसकी कटाई कर ली जाती हैं |

 

13. तंबाकू :- उत्तर प्रदेश में तंबाकू की कृषि मुख्यतः खाने और हुक्के में डालकर पीने के लिए की जाती हैं | अलग-अलग क्षेत्रों में इसका उत्पादन किस्म,मिट्टी, जलवायु और खाद की उपलब्धता पर आधारित है | मेरठ, बुलंदशहर ,सहारनपुर, वाराणसी, मैनपुरी और फर्रुखाबाद आदि जिलों में तंबाकू की कृषि की जाती है |

 

14. अलसी :- अलसी का उपयोग रंग रोगन बनाने के लिए किया जाता है | इसका उत्पादन प्रमुख रूप से तेल बनाने में किया जाता है हमीरपुर, मिर्जापुर, गोंडा ,बहराइच, इलाहाबाद, आदि जिलों में अलसी का उत्पादन किया जाता है |

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