1857 ई. की क्रान्ति | राष्ट्रीय आन्दोलन | Revolution And National Movement MP

Spread the love

☆ 1857 ई. की क्रान्ति एवं मध्य प्रदेश
• 1818 ई. में मध्य प्रदेश के महाकौशल क्षेत्र में सर्वप्रथम अंग्रेजों के विरुद्ध विद्रोह हुआ था, जिसका नेतृत्व नागपुर के शासक अप्पाजी भोंसले ने किया था।
• 1833 ई. में रामगढ़ नरेश जुझारु सिंह के पुत्र देवनाथ सिंह ने अंग्रेजों के विरुद्ध विद्रोह किया था।
• 1842 ई. में नरसिंहपुर के जमींदार दिल्हन शाह तथा हीरापुर के किरेनशाह ने अंग्रेजों के विरुद्ध विद्रोह किया।

 

मध्य प्रदेश में 1857 ई. की क्रान्ति के मुख्य बिन्दु

• 1857 के प्रथम स्वतन्त्रता संग्राम के समय मध्य प्रदेश में सबसे पहले विद्रोह नीमच छावनी में 3 जून, 1857 में हुआ।
• कर्नल सोबर्स ने राजपूत सैनिकों की सहायता से इस विद्रोह को दबा दिया।
• तात्या टोपे एवं नाना साहेब के प्रयासों से सैनिकों, किसानों व ग्रामीणों के मध्य क्रान्ति सन्देश कमल एवं रोटी के माध्यम से पहुँचाया गया।

 

• 1857 ई. की क्रान्ति में सिन्धिया तथा भोपाल के नवाब ने अंग्रेजों का साथ दिया, जबकि होल्कर महाराजा ने गुप्त रूप से क्रान्तिकारियों को सहायता दी।
• 14 जून, 1857 को ग्वालियर के निकट मुरार छावनी में सैनिक विद्रोह हुआ। सैनिकों ने विद्रोह कर संचार व्यवस्था भंग कर दी।
• रानी दुर्गावती के वंशज शंकर शाह और उनके पुत्र ने गढ़ा मण्डला में स्वतन्त्रता के लिए विद्रोह किया।
• 20 जून, 1857 को शिवपुरी में विद्रोह हुआ। इसी समय महू छावनी में शहादत खान के नेतृत्व में विद्रोह हुआ एवं अंग्रेजी सेना को हार का सामना करना पड़ा।

 

• प्रथम स्वतन्त्रता संग्राम के समय मुगल शासक बहादुर शाह जफर के शहजादे हुमायूँ ने मन्दसौर में बलायती, देवती एवं सिन्धिया के कुछ सैनिकों की सहायता से एक स्वतन्त्र राज्य की स्थापना की तथा फिरोजशाह के नाम से मन्दसौर पर शासन किया।
• अंग्रेजों की हड़प नीति से नाराज मण्डला जिले की रामगढ़ रियासत की रानी अवन्तिबाई ने विद्रोह कर दिया।

• 20 मार्च, 1858 को अंग्रेज सेनापति वार्डन के साथ युद्ध में पराजय होता देख रानी अवन्तिबाई ने अपने प्राणों की आहूति दे दी।
• रानी अवन्तिबाई को रामगढ़ की झाँसी की रानी के नाम से भी जाना जाता है।
• तात्या टोपे को सिन्धिया के सामन्त मानसिंह ने धोखे से पकड़वा दिया, जिसके पश्चात् इन्हें शिवपुरी में फाँसी दी गई।

 

1857 ई. की क्रान्ति के प्रमुख विद्रोही

विद्रोही                   सम्बन्धित स्थल
शेख रमजान         – सागर
टेण्टया भील         – खरगौन
शंकरशाह             – गढ़ा मण्डला
राजा ठाकुर प्रसाद – राघवगढ़
नारायण सिंह        – रायपुर
शहादत खान        – महू (इन्दौर)
रानी लक्ष्मीबाई     – झाँसी-काल्पी
तात्याँ टोपे           – कानपुर-झाँसी-ग्वालियर
भीमा नावक        – मण्डलेश्वर (उज्जैन)
रानी अवन्तिबाई   – रामगढ़
झलकारीबाई       – झाँसी (लक्ष्मीबाई की
अंगरक्षिका)
गिरधारीबाई        – रामगढ़ (अवन्तीबाई की
अंगरक्षिका)

 

☆ प्रमुख राष्ट्रीय आन्दोलन एवं मध्य प्रदेश

◇ जबलपुर झण्डा सत्याग्रह
• जबलपुर में कांग्रेस ने अजमल खाँ तथा अन्य कांग्रेसियों के सम्मान में झण्डा फहराने की रणनीति बनाई, जिसका अंग्रेज पुलिस कमिश्नर ने अपमान किया। इस अपमान के विरोध में प. सुन्दरलाल, सुभद्राकुमारी चौहान, लक्ष्मण सिंह चौहान आदि ने जुलूस निकाला।
• राष्ट्रीय ध्वज फहराने पर पं. सुन्दरलाल को 6 माह के लिए कारावास की सजा सुनाई गई। 13 अप्रैल, 1923 को नागपुर में शुरू हुए इस सत्याग्रह के साथ जबलपुर में पुनः झण्डा सत्याग्रह का आयोजन हुआ था।
• इस सत्याग्रह का निर्देशन देवदास गाँधी, रामगोपालाचार्य एवं डॉ. राजेन्द्र प्रसाद ने किया था।
• सरोजनी नायडू तथा मौलाना आजाद की जबलपुर में उपस्थिति के दौरान कन्छोड़ी लाल, बंशालाल एवं काशीप्रसाद ने टाउनहॉल पर फिर से तिरंगा लहरा दिया था।

 

◇ असहयोग आन्दोलन
• असहयोग आन्दोलन में प्रदेश की जनता ने बढ़-चढ़ कर भाग लिया।
• प्रभाकर डुण्डीराज ने मध्य प्रदेश में असहयोग आन्दोलन का नेतृत्व किया था।
• असहयोग आन्दोलन के दौरान वर्ष 1922 में भोपाल रियासत की सीहोर कोतवाली के सामने विदेशी वस्त्रों की होली जलाई गई।

 

◇ नमक सत्याग्रह
• जबलपुर में सेठ गोविन्द दास तथा प. द्वारिका प्रसाद मिश्र के नेतृत्व में 6 अप्रैल, 1930 में नमक सत्याग्रह की शुरुआत की गई।
• सिवनी जिले के दुर्गाशंकर मेहता ने गाँधी चौक पर नमक बनाकर सत्याग्रह की शुरुआत की।

◇ जंगल सत्याग्रह
• वर्ष 1930 में सिवनी, टुरिया तथा घोडा-डोंगरी (बैतूल) के आदिवासियों ने जंगल सत्याग्रह किया।
• घोडा-डोगरी में गंजनसिंह कोरकू एवं बंजारीसिह कोरकू के नेतृत्व में यह सत्याग्रह हुआ।

◇ चरणपादुका नरसंहा
• वर्ष 1931 में छतरपुर क्षेत्र में चरणपादुका ग्राम में स्वतन्त्रता सेनानियों की शान्तिपूर्ण बैठक पर पुलिस ने अन्धाधुन्ध गोलियां चलाईं, जिसमें छः सेनानी शहीद हो गए थे।
• इसे मध्य प्रदेश का जलियाँ वाला बाग हत्याकाण्ड के नाम से भी जाना जाता है। यहाँ गोली चलाने का आदेश कर्नल फिशर ने दिया था।

 

☆ स्वतन्त्रता के बाद मध्य प्रदेश
• 15 अगस्त, 1947 को स्वतन्त्रता के पश्चात् सभी रियासतों को भारतीय संघ में मिला दिया गया, परन्तु वर्ष 1948-49 के राजनीतिक आन्दोलन के पश्चात् भोपाल के नवाब ने भोपाल रियासत को भारतीय संघ में सम्मिलित करने की घोषणा की।
• 1 जून, 1949 को भोपाल राज्य भारतीय संघ में शामिल किया गया।
• भोपाल के नवाब हमीदुल्ला खाँ मेम्बर ऑफ प्रिन्सेप’ के दो बार अध्यक्ष बनाए गए थे।
• 1 नवम्बर, 1956 को मध्य प्रदेश राज्य का गठन करके भोपाल को राजधानी बनाया गया। दोस्त मोहम्मद को वर्तमान भोपाल का संस्थापक माना जाता है।

• 1 नवम्बर, 2000 में मध्य प्रदेश का विभाजन कर नए राज्य छत्तीसगढ़ की स्थापना की गई।

Leave a Reply

Your email address will not be published.