अध्याय 4 : कृषि

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कृषि एक प्राथमिक चिड़िया है जो हमारे लिए अधिकांश खाद्यान्न उत्पन्न करती है खाद्यान्नों के अतिरिक्त यह विभिन्न उद्योगों के लिए कच्चा माल भी पैदा करती है इसके अतिरिक्त कुछ उत्पादों जैसे चाय कॉफी मसाले इत्यादि का भी निर्यात किया जाता है

 

कृषि के प्रकार

1 प्रारंभिक जीविका निर्वाह कृषि

 

प्रारंभिक जीविका निर्वाह कृषि भूमि के छोटे टुकड़े पर आदिम कृषि औजारों जैसे लकड़ी के हाल और खुदाई करने वाली छड़ी तथा परिवार अथवा समुदाय श्रम की मदद से की जाती है इस प्रकार की कृषि प्राय मानसून मिर्जा की प्रकृति उर्वरता और फसल उगाने के लिए अन्य पर्यावरणीय परिस्थितियों की उपयोगिता पर निर्भर करती है यह कर्तन दहन प्रणाली कृषि है

किसी जमीन के टुकड़े साफ करके उन पर अपने परिवार के भरण-पोषण के लिए अनाज व अन्य खाद्य फसलें उगाते हैं जब मृदा की उर्वरता कम हो जाती है तो किसान उस भूमि के टुकड़े से स्थानांतरित हो जाते हैं और कृषि के लिए भूमि का दूसरा टुकड़ा साफ करते हैं

भारत के उत्तर पूर्वी राज्यों असम मेघालय मिजोरम और नगालैंड में इसे झूम कहा जाता है मणिपुर में पामलू और छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले और अंडमान निकोबार दीप समूह में से दीपा कहा जाता है

 

 

 2 गहन जीविका कृषि

इस प्रकार के कृषि उन क्षेत्रों में की जाती है जहां भूमि पर जनसंख्या का दबाव अधिक होता है यह श्रम गहन खेती है जहां अधिक उत्पादन के लिए अधिक मात्रा में जैव रासायनिक निवेशकों और सिंचाई का प्रयोग किया जाता है

 

 

3 वाणिज्य कृषि

इस प्रकार की कृषि के मुख्य लक्षण आधुनिक निवेशकों जैसे अधिक पैदावार देने वाले बीजों रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के प्रयोग से उच्च पैदावार प्राप्त करना है

कृषि के वाणिज्य करण का स्तर विभिन्न प्रदेशों में अलग-अलग है उदाहरण के लिए हरियाणा और पंजाब में चावल वाणिज्यिक की एक फसल है परंतु ओडिशा में यह जीविका फसल है

 

4 रोपण कृषि

रोपण कृषि भी एक प्रकार की वाणी की खेती है किस प्रकार की खेती में लंबे चौड़े क्षेत्र में एकल फसल बोई जाती है रोपण कृषि उद्योग और कृषि के बीच एक अंतर संबंध है रोपण कृषि व्यापक क्षेत्र में की जाती है जो अधिक पूंजी और श्रम की सहायता से होती है इससे प्राप्त सारा उत्पादन उद्योग के कच्चे माल के रूप में प्रयोग होता है भारत में चाय कॉफी रबड़ गन्ना केला इत्यादि महत्वपूर्ण रोपण कृषि है

 

 

शस्य प्रारूप

भारत की भौतिक विविधता और संस्कृति की बहुलता के संबंध में आप जानते हैं यह देश में कृषि पद्धति और शस्य प्रारूप में प्रतिबिंबित होता है देश में बोई जाने वाली फसलों में अनेक प्रकार के खाद्य और रेशे वाली फसलें सब्जियां फल मसाले इत्यादि शामिल हैं भारत में 3 शस्य ऋतुएँ जो इस प्रकार हैं खरीद, रबी, जायद

 

 रबी फसलें

यह फसलें मुख्य रूप से शीत ऋतु में अक्टूबर से दिसंबर के मध्य बोई जाती हैं और ग्रीष्म ऋतु में अप्रैल से जून के मध्य काटी जाती हैं

मुख्य रबी फसले गेहूं जौ मटर चना सरसों

उत्तर और उत्तर पश्चिम राज्य जैसे पंजाब हरियाणा हिमाचल प्रदेश जम्मू कश्मीर उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश गेहूं और अन्य रबी फसलों के उत्पादन के लिए महत्वपूर्ण राज्य हैं

 

 

खरीफ फसलें

यह फसलें मुख्य रूप से मानसून के आगमन के साथ बोई जाती हैं और सितंबर अक्टूबर में काट ली जाती है

इस ऋतु में बोई जाने वाली मुख्य फसलें हैं चावल मक्का ज्वार बाजरा अरहर मूंग उड़द कपास जूट मूंगफली और सोयाबीन
चावल की खेती मुख्य रूप से असम पश्चिम बंगाल ओडिशा आंध्र प्रदेश तेलंगाना तमिलनाडु केरल और महाराष्ट्र के तटवर्ती क्षेत्रों में होती है

 

 

जायद फसलें

रवि और खरीफ फसल नेताओं के बीच ग्रीष्म ऋतु में बोई जाने वाली फसल को जायद कहा जाता है जायद ऋतु में मुख्य रूप से तरबूज खीरा खरबूजे सब्जियां और चारे की फसलें बोई जाती हैं

 

मुख्य फसलें :

मिट्टी जलवायु और कृषि पद्धति में अंतर के कारण देश के विभिन्न क्षेत्रों में अनेक प्रकार की खाद और खान फसलें उगाई जाती हैं भारत में उगाई जाने वाली मुख्य फसलें चावल मोटे अनाज डालें चाय कॉफी गन्ना तिलहन कपास और जूट इत्यादि है

 

चावल

भारत में अधिकांश गो का खाद्यान्न चावल है हमारा देश चीन के बाद दूसरा सबसे बड़ा चावल उत्पादक देश है यह एक खरीफ की फसल है जिसे उगाने के लिए उच्च तापमान और अधिक आद्रता की आवश्यकता होती है कम वर्षा वाले क्षेत्रों में इसे सिंचाई करके उगाया जाता है

चावल उत्तर और उत्तर पूर्वी मैदानों तटीय क्षेत्रों और डेल्टा प्रदेशों में उगाया जाता है

 

 

गेहूँ

गेहूँ भारत की दूसरी सबसे महत्वपूर्ण खाद्यान्न फसल है जो देश के उत्तर और उत्तर पश्चिमी भागों में पैदा की जाती है रवि की फसल को उगाने के लिए शीत ऋतु और पकने के समय खिली धूप की आवश्यकता होती है इसे उगाने के लिए समान रूप से वितरित 50 से 75 से मी वार्षिक वर्षा की आवश्यकता होती है देश में गेहूं गाने वाले दो मुख्य क्षेत्र उत्तर प्रदेश में गंगा सतलुज का मैदान और दक्कन का काली मिट्टी वाला प्रदेश। पंजाब हरियाणा उत्तर प्रदेश बिहार राजस्थान मध्य प्रदेश

 

 

मोटे अनाज

ज्वार बाजरा और राज्य भारत में गाए जाने वाले मुख्य मोटे अनाज हैं यद्यपि उन्हें मोटा अनाज कहा जाता है क्षेत्रफल और उत्पादन की दृष्टि से ज्वार देश की तीसरी महत्वपूर्ण खाद्यान्न फसल है यह फसल वर्षा पर निर्भर होती है अधिकतर आद्र क्षेत्रों में उगाए जाने के कारण इसके लिए ऊंचाई की आवश्यकता नहीं होती है इसके प्रमुख उत्पादक राज्य महाराष्ट्र कर्नाटक आंध्र प्रदेश और मध्य प्रदेश
[1:41 PM, 3/31/2022] I Am: बाजरा

 

यह है बलवा और पिछली काली मिट्टी पर गाया जाता है राजस्थान उत्तर प्रदेश महाराष्ट्र गुजरात और हरियाणा के मुख्य उत्पादक राज्य है रोगी शुष्क प्रदेशों की फसल है और यह लाल काली बलुआ और उथली काली मिट्टी पर अच्छी तरह उगाई जाती है राखी के प्रमुख उत्पादक राज्य कर्नाटक हिमाचल प्रदेश उत्तराखंड सिक्किम झारखंड और अरुणाचल प्रदेश है

 

 

मक्का

एक खरीफ फसल है जो 21 सेल्सियस तापमान में और पुरानी जलोढ़ मिट्टी अच्छी प्रकार से उगाई जाती है बिहार जैसे कुछ राज्यों में मक्का रवि की ऋतु में उगाई जाती है कर्नाटक उत्तर प्रदेश बिहार आंध्र प्रदेश और मध्य प्रदेश मक्का के मुख्य उत्पादक राज्य हैं

 

 

दालें

भारत विश्व में दालों का सबसे बड़ा उत्पादक तथा उपभोक्ता देश है तुर उड़द मूंग मसूर मटर और चना भारत की मुख्य दलहनी फसल है दालों को कम नमी की आवश्यकता होती है और इन्हें शुष्क परिस्थितियों में भी उगाया जा सकता है फलीदार पतले होने के नाते अरहर को छोड़कर अन्य सभी डालें वायु से नाइट्रोजन लेकर भूमि की सुंदरता को बनाए रखती है भारत में मध्य प्रदेश उत्तर प्रदेश राजस्थान महाराष्ट्र और कर्नाटक दल के मुख्य उत्पादक राज्य हैं

 

 

खाद्यान्नों के अलावा अन्य फसलें

 

 

गन्ना

गाना एक और उसने कटिबंधीय फसल है यह फसल 21 सेल्सियस से 27 सेल्सियस आप मान और 75 से मी से 100 सेमी वार्षिक वर्षा वाली और जलवायु में बोल जाती है कम वर्षा वाले प्रदेशों में सिंचाई की आवश्यकता होती है ब्राजील के बाद भारत गन्ने का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक देश है यह मिनी गुड खांडसारी और हीरा बनाने के काम आता है उत्तर प्रदेश महाराष्ट्र कर्नाटक तमिल नाडु आंध्र प्रदेश तेलंगाना बिहार पंजाब और हरियाणा गन्ने के मुख्य उत्पादक राज्य है

 

 

तिलहन

2014 मैं भारत विश्व में चीन के बाद दूसरा बड़ा तिलहन उत्पादन देश था देश में कुल बॉय गए क्षेत्र के 12% भाग पर कई तिलहन की फसलें उगाई जाती है मूंगफली सरसों नारियल तेल सोयाबीन अरंडी बिनोला अलसी और सूरजमुखी भारत में गाय जाने वाली मुख्य तिलहन फसलें हैं परंतु इनमें कुछ तेल के भेजो को साबुन प्रसाधन और उदल उद्योग में कच्चे माल के रूप में भी प्रयोग किया जाता है मूंगफली खरीद की फसल है तथा देश में मुख्य के लोगों के कुल उत्पादन का आधा भाग इसी फसल से प्राप्त होता है गुजरात राजस्थान तमिल नाडु महाराष्ट्र मूंगफली के मुख्य उत्पादक राज्य हैं हल्दी और सरसों रवि की फसलें है

 

 

चाय

चाय की खेती रोपण कृषि का एक उदाहरण है यह एक महत्वपूर्ण से पदार्थ की फसल है जिसे शुरुआत में अंग्रेज भारत में लाए थे चाय का पौधा और उपोष्ण कटिबंधीय जलवायु हुआ मस्त और विवान संयुक्त गहरी मिट्टी तथा सुगम जल निकास वाले क्षेत्रों में भली-भांति पाया जाता है चाय की झाड़ियों को उगाने के लिए वर्ष भर कोष्ण नम और पालारहित जलवायु की आवश्यकता होती है चाय एक श्रम सघन उद्योग है इसके लिए प्रचुर मात्रा में सस्ता और कुशल श्रम चाहिए चाय के मुख्य उत्पादक क्षेत्रों में असम पश्चिमी बंगाल में दार्जिलिंग और जलपाईगुड़ी जिलों की पहाड़ियां तमिलनाडु और केरल है सन 2014 में भारत विश्व में चीन के बाद दूसरा बड़ा चाय उत्पादक देश था

 

 

कॉफी

सन 2014 में भारत में विश्व की लगभग 3.5 प्रतिशत कॉफी का उत्पादन किया हमारे देश में अरेबिक किस्म की कॉपी पैदा की जाती है जो आरंभ में यमन से लाई गई थी इसकी कॉपी की विश्व भर में अधिक मांग है इसकी खेती नीलगिरी की पहाड़ियों के आसपास कर्नाटक केरल और तमिलनाडु में की जाती है

 

 

बागवानी फसल

सन 2014 में भारत का विश्व में फलों और सब्जियों के उत्पादन में चीन के बाद दूसरा स्थान था भारत उसने और शीतोष्ण कटिबंधीय दिनों इसी प्रकार के फलों का उत्पादक है भारतीय फलों जिनमें महाराष्ट्र आंध्र प्रदेश तेलंगाना उत्तर प्रदेश और पश्चिमी बंगाल के आम नागपुर और चेरापूंजी के संतरे केरल मिजोरम महाराष्ट्र और तमिलनाडु के केले उत्तर प्रदेश और बिहार की लीची मेघालय के अनन्नास आंध्र प्रदेश तेलंगाना और महाराष्ट्र के अंगूर तथा हिमाचल प्रदेश और जम्मू व कश्मीर के सेब नाशपाती खूबानी और अखरोट की विश्व भर में बहुत मांग है भारत विश्व की लगभग 13% सब्जियों का उत्पादन करता है

 

 

अखाद्य फसलें

 

रबड़

रबड़ भूमध्यरखी क्षेत्र की फसल है परंतु विशेष परिस्थितियों में उसने और पोस्ट ने क्षेत्र में भी गाड़ी जाती है इसको 200 से मी से अधिक वर्षा और 25 सेल्सियस से अधिक तापमान वाली नाम और आर्द्र जलवायु की आवश्यकता होती है रबड़ एक महत्वपूर्ण कच्चा माल है जो उद्योगों में प्रयुक्त होता है सन 2012 -13 मैं प्रकृतिक रबड़ के उत्पादन में भारत का विश्व में चौथा स्थान था

 

 

रेशेदार फसलें

कपास जूता और प्राकृतिक रेशम भारत में उगाई जाने वाली चार मुख्य रेशेदार फसलें हैं इनमें से पहेली तीन मिट्टी में फसल उगाने से प्राप्त होती है और चौथा रेशम कीड़े के को कौन से प्राप्त होता है जो मेलबरी पेड़ की हरी पत्तियों पर पलता है रेशम उत्पादन के लिए रेशम के कीड़ों का पालन रेशम उत्पादन कहलाता है

 

कपास

भारत को कपास के पौधे का मूल स्थान माना जाता है सूती कपड़ा उद्योग में कपास का एक मुख्य कच्चा माल है कपास उत्पादन में भारत का विश्व में तीसरा स्थान है 70 पठार के शुष्क भागों में काली मिट्टी कपास उत्पादन के लिए उपयुक्त मानी जाती है इस फसल को उगाने के लिए उच्च तापमान हल्की वर्षा या सिंचाई 210 पाला रहित दिन और खिली धूप की आवश्यकता होती है यह खरीफ की फसल है और इसे पक कर तैयार होने में 6 से 8 महीने लगते हैं यह मुख्य रूप से भारत के महाराष्ट्र गुजरात मध्य प्रदेश कर्नाटक आंध्र प्रदेश तेलंगाना तमिलनाडु पंजाब हरियाणा और उत्तर प्रदेश में बोई जाती है

 

 

जूट

जूट को सुनहरा रेशा कहा जाता है जूट की फसल बाढ़ के मैदान में जल निकासी वाली उर्वरक मिट्टी में उगाई जाती है जहां हर वर्ष बाढ़ से आई नहीं मिट्टी जमा होती रहती है इसके बढ़ने के समय उच्च तापमान की आवश्यकता होती है पश्चिम बंगाल बिहार असम और ओडिशा तथा मेघालय जूट के मुख्य उत्पादक राज्य है

 

 

प्रौद्योगिकी और संस्थागत सुधार

 

भारत में कृषि हजारों वर्षों से की जा रही है परंतु प्रौद्योगिकी और संस्थागत परिवर्तन के अभाव में लगातार भूमि संसाधन के प्रयोग से कृषि का विकास अवरुद्ध हो गए जाता है

भारत में कृषि अभी भी मानसून पर और भूमि की प्राकृतिक उर्वरता पर निर्भर करती है 60% से भी अधिक लोगों को आजीविका प्रदान करने वाली कृषि में कुछ गंभीर तकनीकी एवं संस्थागत सुधार लाने की आवश्यकता है भूमि सुधार के कानून तो बने परंतु इनके लागू करने में ढील की गई

किसानों के लाभ के लिए भारत सरकार ने किसान क्रेडिट कार्ड और व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा योजना भी शुरू की थी कृषि की राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था रोजगार और उत्पादन में योगदान

 

कृषि भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ की हड्डी रही है सकल घरेलू उत्पाद में कृषि के योगदान का अनुपात 1951 से लगातार घटने के उपरांत भी यह 2010-11 में देश की लगभग 52% जनसंख्या के लिए रोजगार और आजीविका का साधन थी

 

कृषि के महत्व को समझते हुए भारत सरकार ने इस के आधुनिकरण के लिए प्रयास किए हैं भारतीय कृषि में सुधार के लिए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद में कृषि विश्वविद्यालय की स्थापना पशु चिकित्सा सेवाएं और पशु प्रजनन केंद्र की स्थापना मौसम विज्ञान और मौसम के पूर्वानुमान के क्षेत्र में अनुसंधान और विकास को वरीयता दी है

 

 

खाद्य सुरक्षा

हमारी सरकार ने सावधानीपूर्वक खाद्य सुरक्षा प्रणाली की रचना की है इसके दो घटक है

1 बफर स्टॉक
2 सार्वजनिक वितरण प्रणाली

 

भारत की खाद्य सुरक्षा नीति का प्राथमिक उद्देश्य सामान्य लोगों को खरीद सकने योग्य कीमतों पर खाद्यान्नों की उपलब्धता को सुनिश्चित करना है इससे निर्धन भोजन प्राप्त करने में समर्थ हुए हैं

 

भारतीय खाद्य निगम सरकार द्वारा घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य पर किसानों से खाद्यान्न प्राप्त करती है सरकार उर्वरक ऊर्जा और जल जैसे कृषि निवेश पर सहायता उपलब्ध कराती है

जैसा कि आप जानते हैं कि उपभोक्ताओं को दो वर्गों में बांट दिया गया है गरीबी रेखा से नीचे बिलो पावर्टी लाइन बीपीएल और गरीबी रेखा के ऊपर अब वो पॉवर्टी लाइन एपीएल

 

वैश्वीकरण का कृषि पर प्रभाव

 

1990 के बाद वैश्वीकरण के तहत भारतीय किसानों को कई नई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है चावल का पास रबड़ चाय कॉफी झूठ और मसालों का मुख्य उत्पादन होने के बावजूद भारतीय कृषि विश्व के विकसित देशों से इस पर्दा करने में असमर्थ है क्योंकि उन देशों में कृषि को अत्यधिक सहायकी दी जाती है

भारतीय कृषि को सक्षम और लाभदायक बनाना है तो सीमांत और छोटे किसानों की स्थिति सुधारने पर जोर देना होगा हरित क्रांति ने लंबा चौड़ा वायदा किया परंतु आज यह कई वायदों से घिरा है

भारत में लगभग 83.3 करोड लोग लगभग 25 करोड हेक्टेयर भूमि पर निर्भर हैं इस प्रकार एक व्यक्ति के हिस्से में औसतन आधा हेक्टेयर से भी कम कृषि भूमि आती है

 

 

 

 

अध्याय 5 : खनिज तथा ऊर्जा संसाधन

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