हरियाणा पुरातात्त्विक स्मारक संग्रहालय | Haryana GK

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हरियाणा के प्रमुख पुरातात्त्विक स्मारक संग्रहालय

काबुली बाग, पानीपत-

पानीपत के निकट काबुली बाग में एक मस्जिद तथा तालाब बना हुआ है यह बाग बाबर ने पानीपत की प्रथम लड़ाई में विजय की खुशी तथा अपनी सबसे प्रिय रानी मुसम्मत काबुली बेगम की याद में बनवाया था भारत में मुगल वस्तु शिल्प कला की यह प्रथम इमारत है जिसका निर्माण कार्य सन् 1529 में पूरा हुआ।

आध्यात्मिक संग्रहालय, पानीपत-

पानीपत नगर में आश्रम रोड पर स्थित प्रजापति ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय का आकर्षण भव्य भवन निर्मित है यह तीन मंजिल भवन अत्यधिक सुंदर होने के कारण मनमोहन है आमजन इस भवन को 5 मूर्तियों वाले आश्रम के नाम से जानते हैं क्योंकि इस भवन में फाइबर से निर्मित पांच प्रमुख धर्म की भव्य मूर्तियों एक ही ज्योति बिंदु शिव की ओर इशारा कर रही है

इब्राहिम लोदी की मजार, पानीपत-

इब्राहिम लोदी की मजार एक ऐतिहासिक मकबरा पानीपत के तहसील कार्यालय के निकट स्थित है। इसे 1526 में इब्राहिम लोदी ने बाबर के साथ युद्ध किया था जिसमें उनकी पराजय हुई और वह मारा गया था युद्ध स्थल पर ही इब्राहिम लोदी को दफनाया गया था बाद में अंग्रेजों ने लाखोरी ईंटों से स्थान पर एक बहुत बड़ा चबूतरा बनवाया तथा एक पत्थर पर उर्दू में इस कब्र के महत्व के बारे में लिखवाया।

काला अम्ब, पानीपत-

पानीपत से 8 किलोमीटर दूर पूर्व दिशा में काल अंब में 1761 में पानीपत का तीसरा युद्ध अफगान सरदार अहमद शाह अब्दाली और मराठा सरदार सदा शिवराज भाऊ के मध्य हुआ था युद्ध में मराठों का इतना खून बहा की धरती लाल हो गई आम का वृक्ष भी वृद्ध होने से काला पड़ गया था तभी से इस स्थान को काला अंब नाम से जाना जाता है इस स्थान पर हरियाणा सरकार ने वार हीरोज मेमोरियल विकसित किया यहां संग्रहालय भी स्थापित किया गया है।

इब्राहिम खान का मकबरा, नारनौल-

इस मकबरे का निर्माण शेरशाह सूरी ने अपने दादा इब्राहिम खान की याद में सन् 1543-44 के आसपास करवाया था नारनौल नगर के दक्षिण में घनी आबादी के बीच स्थित इब्राहिम खान का मकबरा एक विशाल गुंबद के आकार का है लोदी शासनकाल में इब्राहिम खान नारनोल के जागीरदार रहे थे मकबरे के भीतरी भाग में इब्राहिम खान की कब्र है जिस पर शाही खानदार का निशान भी अंकित है

महल एवं बाराखंबा छतरी,होडल-

फरीदाबाद जिले के होटल नगर में स्थित महलनुमा हवेली का निर्माण 1754 से 1764 ईस्वी के बीच भरतपुर के राजा सूरजमल के ससुर चौधरी काशीराम सोरोत ने करवाया था महारानी किशोरी राजा सूरजमल की धर्मपत्नी और चौधरी काशीराम की पुत्री थी सूरजमल से संबंध होने के उपरांत चौधरी काशीराम को सोरोतों के 24 गांव का चौधरी बान दिया गया। और इन गांव से मिलने वाले राजस्व में उसे हिस्सा दिया जाने लगा। इस तरह रुतबा बढ़ जाने से चौधरी काशीराम ने एक शानदार हवेली और कचहरी भवन का निर्माण करवाया।

कुंजपुरा और तरावड़ी के कीलें-

जिला करनाल में स्थित कुंजपुरा नामक स्थान पर छोटी-छोटी ईटों से बनी हुई एक हवेली थी जिसका आप प्रवेशद्वार ही बचा है इसे कुंजपुरा के नवाब निरजावत खान ने सन् 1765 के आसपास बनवाया था दुर्गा का तो अब नामोनिशान भी नहीं है

करनाल के तरावड़ी नामक स्थान पर एक सराय है। जिसका निर्माण शाहजहां के शासनकाल में हुआ था इसे भ्रमवश आज भी पृथ्वीराज चौहान द्वारा बनवाया गया दुर्ग और मुगलकालीन सराय के वास्तुशिल्प में मौलिक भिन्नताएं होती हैं।

कोस मीनार,कोहणड-

शेरशाह सूरी ने महामार्ग का निर्माण करवाया था जिसको ऐतिहासिक जीटी रोड के नाम से भी जाना जाता है उसने जनता की सुविधाओं के लिए मार्ग के प्रत्येक कोर्स पर एक मीनार खड़ी करवाई थी जिसको कोर्स मिनार कहा गया शेरशाह सूरी ने काल की मुंह बोलती तस्वीर के रूप में हरियाणा क्षेत्र में मौजूद सुदृढ़ ढांचे में निर्मित यह ऐसी मीनारें है जो ऊपर से पतली और नीचे से चौड़ी है शायद इस तरह से निर्माण के पीछे निर्मित निर्माताओं का उद्देश्य क्या था यह था कि महामार्ग से आते हुए दूर से ही है। ज्ञात हो जाए कि उनके अगले पड़ाव की दूरी अब कितनी शेष है अथवा वै कहां तक आ चुके हैं।

ख्वाजा की सराय, फरीदाबाद-

फरीदाबाद जिले के गांव सराय ख्वाजा में लगभग 300 वर्ष पुरानी एक सराय है इस सराय के नाम पर ही गांव का नाम सराय ख्वाजा पड़ा यह सराय पीर ख्वाजा ने बनवाई थी।

गऊ कण तालाब, रोहतक-

गऊ कण नामक तालाब रोहतक नगर में स्थित है सन 2004 और 2005 में इस तालाब का नवीकरण किया गया प्राचीन तालाब पर उत्तर में जनाना घाट एवं पश्चिम तथा पूर्व में गौ घाट था यहां स्थिति डेरा बाबा लक्ष्मण पुरी इस तीर्थ की देखभाल करने है।इसका निर्माण 1558 ईस्वी में करवाया गया था।

चनेटि स्तूप, जगाधरी-

जगधरी नगर से 3 किलोमीटर दूर पूर्व दिशा में स्थित स्तूप का प्रथम विवरण चीन के विद्वान यात्रा ह्रेनसांग के यात्रा संस्मरण से प्राप्त होता है वे यहां सम्राट हर्षवर्धन के शासनकाल में आए थे हेनसांग ने लिखा है कि यह स्तूप शत्रुघ्न गांव से पश्चिम की ओर यमुना के दाएं तट प्रदेश में स्थित है और यहां इसके अलावा दासियों अन्य स्तूप भी है यह भी लिखा है कि सत्रुघन में एक बहुत बड़ा बौद्ध मठ भी है जिसमें सैकड़ों भिक्षुक निवास करते है इसका निर्माण संभव है कि सम्राट
अशोक के समय किया गया था

चोर गुम्बद, नारनौल-

नारनौल नगर कि उत्तर पश्चिम दिशा में एक ऊंचाई वाले स्थान पर निर्मित ऐतिहासिक स्मारक चोर गुंबद का निर्माण जमाल खान नामक एक अफगान ने अपनी ही समाधि स्थान के रूप में करवाया था

जल महल, नारनौल-

ऐतिहासिक स्मारक
जल महल नारनौल नगर के दक्षिण में आबादी से बाहर स्थित थी इसका निर्माण सन 1591 में नारनौल के जागीरदार शाह कुली खान ने करवाया था पानीपत के ऐतिहासिक प्रसिद्ध द्वितीय युद्ध में शाह कुली खान ने हेमू को पकड़ा था इसी उपलक्ष्य में अकबर ने प्रसन्न होकर शाह कुली खान को नारनोल की जागीर सौंपी थी जल महल का निर्माण लगभग 11 एकड़ में विशाल भूखंड पर किया था

तावडू के मकबरे-

तावडू ग्राम में अनेक मकबरे पश्चिम छोर पर बने हुए हैं जिसका निर्माण उत्तर इस्लामिक काल में संभवत सन् पंद्रह सौ के आसपास हुआ था इनमें से एक मकबरे का जीर्णोद्धार सन 2007 में इंडिया नेशनल ट्रस्ट फाॅर आर्ट एंड कल्चरल हेरिटेज नामक संस्था ने किया था इस परिसर में सात-आठ मकबरे हैं जो संरक्षण घोषित नहीं हुए हैं

बैठक भवन,डीघल-

प्रसिद्ध साहूकार लाला फतेह चंद ने डीघल गांव में सन् 1880 के आसपास एक कलात्मक बैठक भवन का निर्माण करवा इसी आज भी उनकी कलात्मक अभिरुचि और उसके खानदान की समृद्धि का प्रतीक माना जाता है इसमें एक गद्दी कक्ष, एक कक्षा दो ओबरे और एक जमींदोज भोरे के अलावा पूर्व मुख शानदार बरामद बनवाया गया।

 

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