अध्याय 10 कानून और सामाजिक न्याय

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 उपभोक्ता :- जो व्यक्ति बाज़ार में बेचने के लिए नहीं बल्कि इस्तेमाल के लिए कोई चीज खरीदता है उसे उपभोक्ता कहा जाता है।

 

उत्पादक :– ऐसा व्यक्ति या संस्थान जो बाज़ार में बेचने के लिए चीजें बनाता है।

 

कानून :- लोगों को शोषण से बचाने के लिए सरकार कुछ कानून बनाती है। इन कानूनों के जरिए इस बात की कोशिश की जाती है कि बाजार में अनुचित तौर-तरीकों पर अंकुश लगाया जाए।

 

सामाजिक न्याय :-

मजदूरों को सुरक्षा प्रदान करने के लिए न्यूनतम वेतन का कानून बनाया गया है।

उत्पादकों और उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करने के लिए भी कानून बनाए गए हैं।

 

मजदूर , उपभोक्ता और उत्पादक तीनों के संबंधो को इस तरह संचालित किया जाता है कि उनमें से किसी का शोषण न हो

 

कानूनों को बनाने , लागू करने और और कायम रखने के लिए सरकार व्यक्तियों या निजी कंपनियों की गतिविधियों को नियंत्रित कर सकती है ताकि सामाजिक न्याय सुनिश्चित किया जा सके।

 

संविधान में यह भी कहा गया है कि 14 साल से कम उम्र के किसी भी बच्चे को किसी कारखाने या खदान या किसी अन्य खतरनाक व्यवसाय में काम पर नही रखा जाएगा।

 

सन 2011 की जनगणना के मुताबिक भारत में 5 से 14 साल की उम्र के 40 लाख से ज़्यादा बच्चे विभिन्न में नौकरी करते हैं।

 

2016 में संसद ने बाल श्रम ( प्रतिषेध एवं विनियमन ) अधिनियम , 1986 में संशोधन किया है कि 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों के सभी व्यवसायों में तथा किशोरों ( 14-18 वर्ष ) के जोखमकारी व्यवसायों और प्रक्रियाओं में नियोजन करने पर प्रतिबंध है।

 

भोपाल गैस त्रासदी :- 2 दिसंबर 1984

अनुच्छेद 21 :- जीवन के अधिकार का उल्लंघन न हो ।

1998 के बाद सर्वोच्च न्यायालय ने अपने कई फैसलों में यह आदेश दिया कि दिल्ली में सार्वजनिक वाहन कम्प्रेस्ड नेचुरल गैस ( सी.एन. जी.) ईंधन का इस्तेमाल करें।

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